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मोकामा के लहेरिया टोला में कुछ ओरतें रोती  भागती जा रही ,आपस में मगही में कहती जा रही थी “मार देलकय नाटा के”.आज ही के दिन 7 फरवरी 2003 की वो शाम लहेरिया टोला के एक घर में मोकामा के एक नामी अपराधियों में से एक नाटा सिंह को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था.वही नाटा जिसके डर से पूरा मोकामा थर थर कांपता था,आज महज एक इतिहास बन गया था.पुरे मोकामा पर राज करने वाला बस एक लाश बन गया था.वही नाटा जिसने शांति की नयी शुरुआत की थी.15 साल की दुश्मनी भुला के दोस्ती का पैगाम दिया था.पर उसी शन्ति ने नाटा से उसका भाई राजेश छीन लिया जिसके परिणाम नाटा फिर अपराध की दुनिया में वापस लौट आया था.नाटा था तो एक बहुत  शातिर अपराधी मगर उसके भी कुछ उसूल थे.ज्यादातर अपराधी चरित्रहीन होते है पर उसने अपनी मर्यादा बनाई रखी.मंदिर तो मंदिर मस्जिद तक में  क्षर्धा से सर झुकाता था.धार्मिक स्थलों की देखरेख भी करता था.

अपने जाति  के साथ साथ उसने दुसरे छोटे जाति की लडकियों की शादी में मदद करता था.व्यापारी भी उसके पास अपनी समस्या लेकर आते थे ,तो निराश नहीं करता था.यही कारन था की भागोलाल जैसे बड़े व्यापारी भी नाटा के मरने  5 दिन के अन्दर मोकामा  से चले गए .लहेरिया टोला से ज्यादा तर व्यापारी उसके मरने के बाद भाग गए.एक ज़माने में ये कहावत बड़ी मशहूर थी.”लोहे में टाटा ,जुटे में बाटा और मोकामा में नाटा सबसे मजबूत”.नाटा को असलहा से ज्यादा प्यारा रसगुल्ला लगता था.हालाँकि एक ज़माने में वो बहुत बड़े नशेडी के रूप में भी जाना था,मगर जब उसने नशा छोड़ दिया तो दुबारा फिर मरते दम तक नशा नहीं किया.ये नाटा सिंह का ही जादू था की जब शांति हुआ तो सूरजभान सिंह का हर शागिर्द नाटा सिंह का पक्का चेला बन गया था .उस ज़माने का चर्चित अपराधी बुलेट सिंह जिसने नाटा सिंह पर 5 बार जानलेवा हमला किया वो भी हमेशा नाटा सिंह के पास ही अपना समय व्यतीत करता था.

(नोट:-यह पोस्ट लिखने का मकसद किसी को नाटा सिंह जैसा अपराधी बनने के लिए प्रेरित करना नहीं है,ये बस एक सूचना भर है.)
सुलगते मोकामा में कैसे उगा शांति का ‘सूरज’ …विडिओ देखिये

 

मार देलकय नाटा के