मोकामा
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गुरु का बाग से निकला नगर कीर्तन,सरदार गुरुजीत सिंह ने दशमेश गुरु श्री गुरु गोविन्द सिंह महाराज के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया

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खालसा पंथ के 319 स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु का बाग से सिखों ने नगर कीर्तन निकाला। भजन-कीर्तन और प्रवचन के बीच दोपहर लगभग साढ़े तीन बजे नगर-कीर्तन शुरू हुआ। गुरु का बाग के दूसरे मार्ग से अशोक राजपथ के विभिन्न क्षेत्रों से घूमते हुए नगर कीर्तन शाम लगभग आठ बजे तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब पहुंचा। पुष्प वर्षा के बीच धार्मिक नारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो रहा था.बैसाखी जुलूस की अगुवाई पंज-प्यारे कर रहे थे। नगर-कीर्तन में श्री गुरु गो¨वद ¨सह बालक व बालिका उच्च व मध्य तथा श्री गुरु नानक सेंट्रल स्कूल के बच्चों का मार्च पास्ट आकर्षक था। -धार्मिक नारों से गूंजता रहा मुख्यमार्ग.

वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह, राज करेगा खालसा, आकी रहे न कोय, बोले सो निहाल- सत श्री अकाल जैसे धार्मिक नारों से वातावरण गूंज रहा था। बैंड बाजों पर देहि शिवावर मोहि इहै. आदि धार्मिक धुन माहौल को भक्तिमय बना रहे थे। जत्थेदार ज्ञानी इकबाल ¨सह सेवा कर रहे थे। शोभायात्रा का मुख्यमार्ग में जगह-जगह स्वागत किया गया। -त्रिदिवसीय अ,गुरु का बाग में तीन दिनों से चल रहे अखंड पाठ की समाप्ति शुक्रवार को हुई। इसके बाद हजूरी रागी जत्था भाई क¨वदर ¨सह, भाई न¨वदर ¨सह, पाटियाला के भाई लाल ¨सह फक्कड़, भाई रजनीश ¨सह द्वारा शबद कीर्तन प्रस्तुत किया गया। जत्थेदार ज्ञानी इकबाल ¨सह तथा कथावाचक ज्ञानी सुखदेव ¨सह ने खालसा पंथ की स्थापना पर प्रकाश डाला। -मार्ग की सफाई में जुटे श्रद्धालुखंड-पाठ की हुई समाप्ति.खालसा सृजना दिवस की पूर्व संध्या पर निकले नगर कीर्तन में शामिल महिला-पुरुष सिख श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और आस्था के साथ दशमेश गुरु श्री श्री गुरु गोविन्द सिंह महाराज के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। नगर-कीर्तन में आगे-आगे ऊंट व हाथी पर बच्चे सवार थे। पीछे पांच बैंड-बाजा, कीर्तनी जत्था व पालकी के आगे पंज-प्यारे हाथ में तलवार लिए चल रहे थे। गुरु ग्रंथ साहिब की सवारी जहां से गुजर रही थी उस पर श्रद्धालु फूलों की बारिश कर रहे थे। सिख श्रद्धालुओं ने मुख्य मार्ग की सफाई की। उसके पीछे सफाई किए गए मार्गो पर फूल का छिड़काव बच्चे, युवक-युवतियां व वृद्ध श्रद्धालु कर रहे थे। नगर कीर्तन में रथ के आगे पंज-प्यारे चल रहे थे। पीछे बीबी गुरचरण कौर व अमृतपाल कौर ढिल्ल्न के नेतृत्व में महिलाएं कीर्तन करते चल रही थी। -एक झलक पाने की लगी थी होड़.

अशोक राजपथ में दोनों ओर नगर-कीर्तन की एक झलक पाने की होड़ लगी थी। सुरक्षा के मद्देनजर जगह-जगह पुलिस बल को तैनात किया गया था। बैसाखी को लेकर तख्त श्री हरिमंदिर जी गुरुद्वारा की विशेष साज-सज्जा की गई है। खालसा सृजना दिवस का मुख्य समारोह शनिवार को मनाया जाएगा। इधर नगर-कीर्तन के तख्त साहिब पहुंचने पर कीर्तन दरबार सजा। इसमें कीर्तनी जत्थाओं भाई क¨वदर ¨सह ने शबद कीर्तन कर संगत को निहाल किया। नगर कीर्तन में प्रबंधक कमेटी के सदस्य आरएस जीत, उपाध्यक्ष बीबी कंवलजीत कौर, सचिव महेंद्र ¨सह छाबड़ा, सरदार जगजोत ¨सह, राष्ट्रीय सिख संगत के महामंत्री अविनाश जायसवाल, सरदार अमरजीत ¨सह शम्मी, मोकामा के सरदार गुरुजीत सिंह, अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष सरदार चरण ¨सह, सरदार रविन्द्र ¨सह, सरदार हरजीत ¨सह, प्रबंधक दलजीत ¨सह व सरदार त्रिलोक ¨सह समेत अन्य शामिल थे।By Jagran