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मोकामा कन्हायपुर की मुखिया धर्मशीला कुमारी नारी शिक्षा के क्षेत्र में नयी मिसाल कायम कर रही हैं. वह पिछले दो वर्षों से पंचायत की दलित बस्ती में अनपढ़ महिलाओं को साक्षर बनाने में जुटी हैं. मुखिया की इस मुहिम से गांव की महिलाएं भी शिक्षा के प्रति जागरूक हो रही हैं. वे अपने कामकाज के बीच समय निकाल कर दो अक्षरों का ज्ञान हासिल करने को प्रयासरत हैं. सार्वजनिक स्थल पर महिलाएं जुट कर सबक बनाना नहीं भूलतीं. शिक्षा का अलख जगाने के लिए गांव की अन्य पढ़ी-लिखी महिलाएं भी सहयोग कर रही हैं. अब तक गांव की तकरीबन 150 महिलाओं ने अपना हस्ताक्षर करना सीख लिया है. ये महिलाएं अब शान से बैंक का कामकाज निबटाती हैं, जबकि अन्य दर्जनों महिलाओं के बीच ककहरा सीख समाज में अपना मान बढ़ाने की ललक है.
मुखिया धर्मशीला कुमारी ने बताया कि नारी सशक्तीकरण के क्षेत्र में सरकार सार्थक कदम उठा रही है. इससे प्रेरित होकर उन्होंने गांव की महिलाओं को जीविका संगठन से जोड़ना शुरू किया, लेकिन अधिकतर महिलाओं के बीच अक्षर ज्ञान का न होना स्वरोजगार में बाधा बनने लगा. बैंक व कार्यालयों में हस्ताक्षर बनाने को लेकर खींचतान से ऊब कर महिलाएं संगठन से विमुख होने लगीं. तब मुखिया ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें साक्षर करने का निश्चय किया. वहीं, दर्जन भर महिलाओं की टीम बना कर उन्हें अक्षर का ज्ञान बताना शुरू किया. बाद में अन्य महिलाएं भी इससे प्रेरित होकर पढ़ना-लिखना सीख रही हैं. इस संबंध में जीविका संघ प्रखंड अध्यक्ष राममणि देवी ने बताया कि जीविका से जुड़ी अधिकतर महिलाओं ने हस्ताक्षर करना सीख लिया है. इससे वह कार्यालयों में परेशानी से बच रही हैं. अन्य महिलाओं को भी साक्षर बनाने की कवायद तेज है. कन्हायपुर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की सीएसपी शाखा के कर्मी सुहब कुमार ने बताया कि पंचायत की अंगूठा लगाने वाली दर्जनों महिलाएं अब हस्ताक्षर कर बैंक से पैसे की निकासी कर रही हैं.
कन्हायपुर की महिलाओं ने अपने बच्चों को पढ़ाने की ठान ली है. सुषमा देवी ने बताया कि यहां की महिलाएं खेती के साथ घरेलू उत्पाद तैयार कर आत्मनिर्भर बनी हैं, लेकिन  पर्याप्त शिक्षा के अभाव में महिलाओं को परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है. वह अपने बच्चों को पढ़ने की प्रेरणा देंगी ताकि भविष्य में बच्चे परेशानियों से बच सकें. करिश्मा देवी ने बताया कि वह अपने आस-पड़ोस की महिलाओं को साक्षर करने में मुखिया का समर्थन कर रही हैं. इसमें स्थानीय अधिकारियों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है. सुनीता देवी का कहना है कि वह महिलाओं ने बच्चों को हस्ताक्षर करना नहीं जानती थीं. इससे उसे लज्जित होना पड़ता था, लेकिन अब वह रोजमर्रा के काम के लायक पढ़ना-लिखना सीख चुकी हैं. ललिता देवी ने कहा कि वह अक्षर ज्ञान सीख रही हैं. इससे उसे काफी सकून मिल रहा है.

अनपढ़ को पढ़ा रही मुखिया