मोकामा
संपादकीय

आज रहेगा आधा मोकामा मौन

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हिन्दू धर्म में माघ महीने का विशेष महत्व होता है। इस पवित्र महीने की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस बार मौनी अमावस्या 16 जनवरी को मनाई जा रही है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन मौन रखना, गंगा स्नान करना और दान देने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पितरों से संबंधित सभी श्राद्ध-तर्पण आदि कार्य अमावस्या तक और अनुष्ठान या बड़े यज्ञ आदि कार्य शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तक किए जाते हैं। इन सभी युतियों में माघ माह में सूर्य एवं चन्द्र का मिलन सर्वश्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दौरान सभी देवी देवता प्रयाग तीर्थ में इकट्ठे होते हैं माघ की अमावस्या के दिन यहां पितृलोक के सभी पितृदेव भी आते हैं। अतः यह दिन पृथ्वी पर देवों एवं पितरों के संगम के रूप में मनाया जाता हैं।

16 जनवरी को मंगलवार के दिन अमावस्या तिथि का संयोग बना है। ज्योतिषशास्त्र और धर्म की दृष्टि से यह बहुत ही अद्भुत संयोग माना जा रहा है। धर्म ग्रंथों में इसे मौनी अमावस्या कहा गया है। मौनी शब्द मौन से बना है इसलिए अपने नाम के अनुसार इस अमावस्या तिथि में सुबह बिना कुछ भी बोले स्नान करना होता है।