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मरांची मोकामा का सबसे प्राचीन और खुशहाल गावं :- यंहा का इतिहास अपने आप में गरिमामयी है .एक गावं होने के बावजूद भी यंहा सुख सुविधा के सारे  संसाधन मौजूद है.बिजली, पानी, सड़क ,बैंक ,पुलिस जैसे संसाधनों मैं यह गावं बड़े बड़े शहरो से भी बेहतरीन प्रतीत  होता है. यंहा के लोग कृषि के साथ साथ अन्य व्यापार  मैं भी महारथ हासिल कर चुके है .सबसे जयादा ट्रक इसी गावं मैं है जिसकी संख्या लगभग १००० होगी .२५ से जयादा ईटा बनाने की चिमनी जो लगभग ४०० लोगो को रोजगार का अवसर प्रदान करता है .३०० के आस पास छोटी बड़ी दुकाने लोगो को शहर जाने से रोकने मैं सक्षम है .यंहा सोने चाँदी,  कपडे लत्ते  का अच्छा खासा बाज़ार है .मरांची का टाल अपने आप मैं बेमिसाल है यंहा के चने और मसूर की तारीफ पूर्व प्रधानमंत्री श्री मति इंदिरा गाँधी भी कर चुकी है .लगभग ६००० बीघे मैं फैला मरांची टाल ५००० से जयादा लोगो को रोजगार देता है .कटनी और बुआई के वक्त लोग दूर दूर से यंहा आकर काम करते है .४०००० की आवादी वाला यह गावं वास्तव मैं एक शहर ही है क्योंकि यह सड़क और रेल दोनों से जुड़ा हुआ है .गंगा नदी के किनारे बसा यह गावं बहुत बड़ा इतिहास समेटे हुए है .यंहा के धानेश्वर बाबा मंदिर,त्यागी बाबा मंदिर ,काली मंदिर, प्राचीन ठाकुरवाड़ी,राम जानकी मंदिर जंगलिया बाबा मंदिर इसके धार्मिक सदभाव का परिचायक है. खेल की दुनिया मैं स्मिता कुमारी(कब्बडी कप्तान ) ने इस गावं को विश्व के नक़्शे पर पंहुचा दिया.

सौजन्य ;-Rajesh Kumar Singh

मरांची मोकामा का सबसे प्राचीन और खुशहाल गावं!

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