सांझे बोले चिरई, बिहाने बोले मोरबा  ऐ गोरी, ई होली काहे न धड़के हमरा ल तोहर दिलबा .

फागुन
झूम रहे पंछी हैं, पेड़ भी हैं घायल ,कोयल के पांवों में बंध गयी है पायल !
बज रहा हर ओर रुनझुन सा गीत ,मदहोशी लाता है फागुन यह प्रीत !
व्यंग्य और हंसी का है यह गठजोड़,आपको लोक संस्कृति से जोड़ेंगे इस होली हर मोड़!

उल्लास, उत्साह, उमंग का महीना फागुन अपने नैसर्गिक होली की रंगीनियों के लिये जाना जाता है। होली की विशेष गायन शैली आपसी स्नेह और भाईचारे के इस पर्व की आत्मा है।मोकामा ऑनलाइन ने इस बार होली की इस रंगीं खूबसूरती को आप तक पहुंचाने की एक कोशिश की है। आज से होली के दिन तक हम आपके लिए हर दिन लोकभाषा के रस में सराबोर होरी, जोगीरा, फगुआ आदि पेश करेंगे , जिसमें कुछ हंसी ठिठोली होगी और होगा कुछ व्यंगबान।गीत, कविता, छंद के साथ आप वीडियो में देखेंगे अपनी लोकसंस्कृति को। अगर आपके पास हो होली का कोई गीत या फगुआ गायन का वीडियो तो वह भी हमें भेजें- वह आपके नाम से आएगा मोकामा ऑनलाइन पर।

मोकामा क्षेत्र में आयोजित होली स्नेह मिलन की तस्वीरें और वीडियो भी आप विवरण के साथ भेज सकते हैं।तो होली की हुड़दंगी हर दिन मनाएं मोकामा ऑनलाइन संग।तो क्लिक कीजिए हर दिन अपने mokamaonline को। फेसबुक पर लाइक करें ‘मोकामा’ पेज और अपने स्नेहियों तथा मित्रों को भी प्रेरित करें कि वे लाइक करें – मोकामा पेज।


सांझे बोले चिरई, बिहाने बोले मोरबा  ऐ गोरी,
ई होली काहे न धड़के हमरा ल तोहर दिलबा ।

Comments are closed.