कलाम मानो मोकामा में बसते हों

अपना कार्यकाल पूरा करके कलाम जब राष्ट्रपति भवन से जा रहे थे तो उनसे विदाई संदेश देने के लिए कहा गया. उनका कहना था, ‘विदाई कैसी, मैं अब भी एक अरब देशवासियों के साथ हूं.’आज मोकामा के बच्चे जिस तरह से डॉ अब्दुल कलाम को समर्पित सप्ताह मना रहे हैं,यूँ लगता है डॉ अब्दुल कलाम मोकामा में ही कंही बस गये है.पिछले 5 दिनों से मोकामा के हजारो बच्चे सिर्फ अब्दुल कलाम की बात कर रहे हैं.हर कोई उनके जैसा दिखने बनने की कोशिश कर रहा है.बच्चों का मनोबल देखकर लगता नहीं की कलाम हमारे बीच नहीं है.और सच भी है कलाम मरा नहीं करते वो जिन्दा हैं भारत के हर उस बच्चे के सपने में जो देश के लिए कुछ करना चाहते हैं.अमीर गरीब जात पात से उपर उठकर मोकामा का हर तबका डॉ कलाम को समर्पित सप्ताह में अपना अपना सहयोग दे रहे हैं. पुरे भारत में मोकामा पहला येसा गावं होगा जन्हा डॉ अब्दुल कलाम को याद करने के लिए 100 से ज्यादा आयोजन किये जा रहे हैं.अपने आप में एक अनोखा और अद्भुत कार्यक्रम .सिर्फ बच्चे ही नही बड़े लोगों में भी उत्साह की सीमा नहीं है.नयी नयी रूप रेखा तैयार की जा रही है.

मोकामा के हर्ष राज रानू ने मिसाइल लांच कर डॉ कलाम को याद किया ,जबकि पाटलिपुत्र जन संस्थान ने प्रखंड स्तरीय मेधा जाँच प्रतियोगिता करवाया जिसमे 1000 से जायदा बच्चों ने भाग लिया .रेड रोज हैप्पी स्कूल के बच्चों ने अपने हाथों से डॉ कलाम की तस्वीर बनाई .काका कलाम मंच ने आज कलाम काव्य पाठ का आयोजन स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय में किया है.एमबीटीसी कोचिंग परिसर में आज शाम कलाम पर परिचर्चा आयोजित की गई है .डॉ अब्दुल कलाम को समर्पित सप्ताह की विडियो देखिये .