4 महीने से सरकारी अस्पताल में जड़ा है ताला ,44 गावं परेशान ,कितनी और जान चाहिए जनप्रतिनिधि जी

इंसान का मरना उतना बुरा नहीं है जितना उम्मीद का मर जाना.मोकामा को मोकामा के ही जनप्रतिनिधियों ने शमशान का शहर बनाने का निर्णय ले लिए है .बिहार का गौरव कहे जाने वाले नाजरथ अस्पताल के बंद होने के बाद तो मोकामा के लोग हर छोटी मोटी दुर्घटना और बिमारी से भी मर जाने लगे है .किसी भी दुर्घटना में गोल्डन ऑवर का बहुत महत्त्व होता है .यानि की अगर एक घंटे के अन्दर अगर रोगी को अस्पताल पहुचाया जा सके तो उसकी जान बचने की सम्भावना ज्यादा होती है . अगर आप मोकामा के हैं और अगर आपका दुर्घटना हो गया तो यकीं मानिये स्वय इश्वर भी आपको बचाने नहीं आयेंगे ,क्योंकि मोकामा में अब एक भी अस्पताल चालू नहीं है कुछ है भी तो डॉक्टर या दावाई की राह देख रहा है .मोकामा के घोसवरी प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चार महीनों से तालाबंदी है.कोई सुनने वाला नहीं है हमारे जनप्रतिनिधि तो मोकामा के नाम से ही चिढ़ते है उन्हें सिर्फ चुनाव में मोकामा याद आता है.सभी के सभी चाहे वो किसी भी सभा में मोकामा का पर्तिनिधितव कर रहे हों मोकामा उनके लिए कोई मायने नहीं रखता है.दुनिया के हर देश समाज में स्वास्थ सबसे बड़ी समस्या है इसपर कार्य करना न सिर्फ जनता की सेवा है बल्कि रोगी की सेवा को इश्वर की सेवा माना जाता है .पर मोकामा के चुने हुए नेता को किसी अस्पताल के बंद होने से कोई फर्क ही नहीं पड़ता .

घोसवरी प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चार महीनों से तालाबंदी है। तालाबंदी किसी और ने नहीं बल्कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने की है। हालांकि डॉक्टर इसके लिए अस्पताल में हुई तोड़-फोड़ को जिम्मेवार मानते हैं।अस्पताल में हुई तोड़फोड़ की घटना के बाद डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने इलाज बंद कर दिया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तालाबंदी होने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है।इस वजह से बंद हुआ पीएचसी .दरअसल, 1 मार्च को गर्भवती महिला की मौत से नाराज लोगों ने अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की थी। जिसके बाद अस्पतालकर्मियों ने पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं को ठप कर दिया। इलाज न होने से 44 गांव प्रभावित .पीएचसी बंद होने की वजह से बीते 4 महीने से लोगों का इलाज घोसवरी पीएचसी में नहीं हो पा रहा है। यहां तक की आठ पंचायतों के 44 गांवों के लोग बुरी तरह प्रभावित हैं। लोगों को इलाज के लिए मोकामा जाना पड़ता है या फिर सरमेरा जाना पड़ रहा है।सीनियर अफसरों से बात के बाद होगा कुछ.हालांकि घोसवरी बीडीओ की मानें तो उन्होंने उच्च अधिकारियों को इस मामले की जानकारी दे दी है। अब सीनियर अफसरों से बात कर बहुत जल्द स्वास्थ्य सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी।

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