रामकृष्ण सिन्हा जैसे व्यक्तित्व की जीवनी से युवा पीढ़ी को अवगत कराकर उन्हें प्रेरित करना चाहिए:- मुख्यमंत्री

पटना, 11 अगस्त 2018:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज शहीद दिवस के अवसर पर आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह में कवि एवं स्वतंत्रता सेनानी स्व0 रामकृष्ण सिन्हा के काव्य संग्रह ‘टंकार’ का लोकार्पण किया। बिहार विधान परिषद के उप सभागार में आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह में कार्यक्रम के संयोजक विधान पार्षद श्री नीरज कुमार ने मुख्यमंत्री को गुलदस्ता भेंटकर उनका स्वागत किया।लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज इस काव्य संग्रह के लोकार्पण समारोह में शामिल होकर मुझे बेहद प्रसन्नता हो रही है। आज शहीद दिवस के दिन 11 अगस्त को जिस पुस्तक का लोकार्पण हुआ है, उसमंे महान स्वतंत्रता सेनानी स्व0 रामकृष्ण सिन्हा द्वारा लिखी गयी कविताओं का संग्रह है। 11 अगस्त के साथ स्व0 रामकृष्ण सिन्हा का अद्भुत संबंध है। उन्होंने कहा कि 11 अगस्त को आज ही के दिन वर्ष 1942 में युवाओं के एक समूह ने सचिवालय को घेर लिया था और वे वहाॅ झंडा फहराना चाहते थे, जिसका अंग्रेज सिपाहियों ने काफी विरोध किया। इन सबके बीच स्व0 रामकृष्ण सिन्हा ने सचिवालय के अंदर प्रवेश कर झंडा फहरा दिया। यह अपने आप में काफी महत्वपूर्ण बात है कि झंडा फहराने के बाद भी जो भीड़ वहाॅ जमा थी, वह पीछे हटने को तैयार नहीं थी। अंग्रेजों ने भीड़ को पीछे न हटते देख फायरिंग कर दी, जिसमें सात लोग आज ही के दिन सायंकाल में शहीद हो गये। सात लोग जो शहीद हुए उनकी स्मृति और सम्मान में हम सब शहीद दिवस मनाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों की जो सात मुर्तियाॅ लगी हैं, वह काफी अद्भुत है। इन्हें इटली से लाकर लगाया गया है। सात लोग तो शहीद हो गये लेकिन रामकृष्ण सिन्हा झंडा फहराने में कामयाब हुए और वे वहां से निकल गये। बाद में उन्हें गिरफ्तार किया गया और सजा भी हुई। जिस रामकृष्ण सिन्हा ने इतना बड़े काम को अंजाम दिया, उन्होंने कभी भी इसकी चर्चा तक किसी से नहीं की। जेल में ही उन्होंने कविताएँ लिखीं। उन्होंने सरकारी नौकरी भी की और सेवानिवृति के बाद 61 वर्ष की उम्र में ही उनका निधन हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों का दायित्व बनता है कि इस तथ्य को प्रचारित-प्रसारित करें कि जिस व्यक्ति ने इतना बड़ा काम किया, उसने इसकी चर्चा तक किसी से नहीं की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मोकामा से हमारा आत्मीय संबंध है। जिस धरती पर स्व0 रामकृष्ण सिन्हा जी पैदा हुए थे, वहां के लोगों ने मुझे पाँच बार सांसद बनाया, जिसके कारण लोग हमें जानने लगे। मोकामा को हम कभी भूल नहीं सकते हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं तो यही चाहूँगा कि ‘टंकार’ नाम से जो पुस्तक प्रकाशित हुई है, इसे सभी सरकारी पुस्तकालयों के साथ ही प्रत्येक स्कूलों में भी पहुंचा दिया जाए ताकि नई पीढ़ी के लोग यह जान पायें कि सचिवालय पर झंडा किसने फहराया था। उन्होंने कहा कि 11 अगस्त 1942 को 7 लोग शहीद हुए थे, इनमें सारण जिले के उमाकांत प्रसाद सिंह, पटना के धनरुआ निवासी रामानंद सिंह, भागलपुर के सतीश प्रसाद झा, औरंगाबाद के जगपति कुमार, मिलर हाई स्कूल पटना में छात्र रहे देवीपद चैधरी, सारण जिले के नया गाँव निवासी राजेन्द्र सिंह एवं रामगोविंद सिंह के नाम शामिल हंै।

शहीदों के परिवारों के प्रति हमारे मन में आदर का भाव होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि हम सभी को रामकृष्ण सिन्हा जी से प्रेरणा लेनी चाहिए कि उन्होंने इतना बड़ा काम किया और कभी इसका दावा तक नहीं किया। आजकल तो जमाना 180 डिग्री से सीधे घूम गया है, पूरा जमाना ही बदल गया है। लोग करते कुछ नहीं और सिर्फ झूठा दावा करने में ही लगे रहते हैं। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण सिन्हा जैसे व्यक्तित्व की जीवनी से युवा पीढ़ी को अवगत कराकर उन्हें प्रेरित करना चाहिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार का इतिहास अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है। चंपारण के किसानों को नीलहों के अत्याचार से मुक्ति दिलाने के लिए राजकुमार शुक्ल के काफी आग्रह और निरंतर प्रयास के कारण 10 अप्रैल 1917 को गाँधी जी पटना पहुंचे और उसी दिन चंपारण के लिए रवाना हो गये। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे होने पर एक साल तक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देश भर के स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गाँधी जी के उपर ‘विमर्श’ कार्यक्रम से हुई क्योंकि गाँधी जी कहा करते थे कि मेरा विचार ही मेरा सन्देश है। उनके विचारों से युवा पीढ़ी को अवगत कराने एवं उसे जन-जन तक पहुँचाने के लिए गाँधी जी पर दो किताबें प्रकाशित करवाकर स्कूलों में कथावाचन की शुरुआत करवाई गई। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं होगा जो राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के बारे में नहीं जानता हो। मुझे पूरा विश्वास है कि 10 से 15 प्रतिशत लोग भी अगर गाँधी जी के विचारों को आत्मसात कर लंे तो फिर जमाना 180 डिग्री घूमकर वापस रामकृष्ण सिन्हा के दौर में पहुँच जाएगा। गाँधी जी के जन्म के 150 साल पूरा होने को हंै, ऐसे में हमने महामहिम राष्ट्रपति और आदरणीय प्रधानमंत्री जी को दो सुझाव दिए थे। पहला यह कि पूरे देश में गाँधी जी के विचारों पर आधारित कथावाचन करायें एवं दूसरा जेल में बंद जो बुजुर्ग व्यक्ति या महिलायें हैं, जिनका कोई घृणित अपराध नहीं हो, उन्हें रिहा कर दिया जाय। केंद्र सरकार ने इसे मान भी लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी को गाँधी जी के जीवन से सीखना चाहिए। भारत छोड़ो आन्दोलन का संचालन जे0पी0 और लोहिया ने भी किया, उन सबकी बदौलत ही देश आजाद हुआ। इस बात को निरंतर हमें युवा पीढ़ी को बताना होगा कि देश गुलाम था और वह कैसे आजाद हुआ। देश को आजाद कराने में काफी लोगों को शहादत देनी पड़ी है। उन्होंने कहा कि आजकल तो भटकाव और गाली-गलौज का माहौल है। समाज में टकराव पैदा कराने के लिए सोशल मीडिया का दुरूपयोग किया जा रहा है इसलिए नई पीढ़ी के लोगों को देश को आजाद कराने वाले शहीदों एवं गाँधी जी के विषय में बताने की आवश्यकता है ताकि उनमें बदलाव आ सके। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण सिन्हा जैसा व्यक्तित्व होना कोई मामूली बात नहीं है। इनसे युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए।मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद स्व0 रामकृष्ण सिन्हा के सुपुत्र श्री नवेंदु शर्मा सहित उपस्थित लोगों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए रामकृष्ण सिन्हा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। ‘टंकार’ पुस्तक को प्रकाशित करने वाले मानक प्रकाशन के प्रकाशक श्री मथुरा प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री ने गुलदस्ता भेंटकर उनका अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन विधान पार्षद श्री रामवचन राय ने किया।लोकार्पण समारोह को बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति श्री हारून रशीद, बिहार विधानसभा अध्यक्ष श्री विजय कुमार चैधरी, उप मुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी, स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पाण्डेय, विधान पार्षद श्री नीरज कुमार ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर भीम राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ0 निहार नंदन सिंह सहित बिहार विधानमंडल के सदस्यगण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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