1974 में मोकामा में वेंकटेश बाबू से मिलने के चक्‍कर में अटल जी का छूट गया था हवाई जहाज

अटल जी और वेंकटेश बाबू

अटल जी और वेंकटेश बाबू

मोकामा। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता वेंकटेश नारायण सिंह (बीनो बाबू) का पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के साथ मित्रवत संबंध था। उनकी निकटस्थता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक बार अटल जी का अपने मित्र वेंकटेश बाबू से मिलने के चक्कर में हवाई जहाज छूट गया था। अटल जी को याद करते हुए 84 वर्षीय वेंकटेश बाबू कहते हैं कि उनमें देवत्व गुणों की भंडार थी। वर्ष-1967 में पहली बार अटल जी का मोकामा की धरती पर आगमन हुआ और उसके बाद टाल की मिट्टी की सौंधी खुशबू उन्हें नौ बार यहां खींच लाई।वेंकटेश बाबू वर्ष-1974 का एक रोचक किस्सा सुनाते हैं। अटल जी तब धनबाज में जनसंघ के एक कार्यक्रम में शामिल होकर टे्रन से वापस पटना लौट रहे थे। पटना से उन्हें हवाई जहाज से दिल्‍ली जाना था लेकिन मोकामा में ट्रेन रुकते ही उन्हें अपने मित्र वेंकटेश नारायण से मिलने की इच्छा हुई। पटना के बदले वे मोकामा में उतर गए और सकरवार टोला स्थित वेंकटेश बाबू के आवास की ओर चल दिए।

अटल जी अचानक यूं वेंकटेश बाबू के यहां आना सबको हतप्रभ कर रहा था। मोकामावासी वायपेयी जी इस शालीनता के कायल हो गए। वेंकटेश बाबू ने वाजयेयी जी का आतिथ्य सत्कार किया और फिर अपने निेजी वाहन से उन्हें पटना छोडने गए। हालांकि हवाई अड्डा पहुंचने के पहले ही हवाई जहाज उड़ान भर चुका था। अटज जी को उस समय दिल्‍ली में पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होना था लेकिन विमान छूट जाने से वे दिल्‍ली जा नहीं सके। बावजूद इसके बिना किसी चिंता के वे उस पल का आनंद लेने से नहीं चूके और सत्संग करने बैठ गए।

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