डॉ कलाम बहुत आप बहुत याद आयेंगे

मिट्टी से जन्मा एक व्यक्ति जिसे मिट्टी ने ही गढ़ा। समुद्र ने जिसे विशालता दी। बच्चों की मासूमियत ने भोलापन दिया। प्रकृति ने निश्छलता। संगीत और कविता ने संस्कार। ज्ञान ने गहराई। आसमान ने सपने दिए और पक्षियों नें परवाज़ अता की। और फिर इस तरह भारत में बना एक अद्भुत, अद्वितीय कलाम। एक ‘अग्नि-पुरूष’ जिसकी आग ने देश को शीतलता का अहसास दिया I एक लंबे अरसे तक अपनी ऊर्जा, ज्ञान और चमक बिखेरने के बाद वर्तमान भारत में बच्चों और युवाओं का आखिरी ‘रोल मॉडल’ भी चला गया। आकाश में बैठे अकेले, उदास ईश्वर को उसकी जीवंतता, सादगी, निश्छलता और उजली हंसी शायद बहुत भा गई। अब दूसरी दुनिया में लगा करेगी कलाम सर की क्लास !खिराज़, सर ! कभी मुलाक़ात हुई तो ईश्वर से ज़रूर पूछना कि एक अरसे से उसने आप जैसे प्यारे-प्यारे लोगों को भारत में भेजना क्यों बंद कर रखा है.(Dhruv Gupt)