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पटना हाईकोर्ट ने  मगध विश्वविद्यालय, बोधगया में नियुक्त किये गये  21 प्राचार्यों की नियुक्ति को अवैध करार दिया है. न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाठी और न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद के दो सदस्यीय खंडपीठ ने भी गुरुवार को उनकी नियुक्ति को निरस्त कर दिया. खंडपीठ ने कहा कि हाइकोर्ट की एकलपीठ ने इन प्राचार्यों की नियुक्ति को रद्द करने का जो फैसला दिया था, वह सही है.
इसमें हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं. एकलपीठ का आदेश सभी दस्तावेजों  को देखने और सभी पक्षों को सुनने के  बाद आया है. खंडपीठ ने 21 प्राचार्यों की ओर से दायर नौ एलपीए  (अपील) पर पहले ही  सुनवाई कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. खंडपीठ ने पाया कि इन  प्राचार्यों की नियुक्ति प्रक्रिया में  व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी और अनियमितता का जो आरोप एकलपीठ के याचिकाकर्ता ने  लगाया है, वह सही है.
 
खंडपीठ  ने राज्य सरकार के आदेश पर  निगरानी विभाग द्वारा की जा रही जांच को  जल्द पूरा करने को कहा है. साथ ही यह भी आदेश दिया है कि जांच में इस बात का ध्यान रखा जाये कि कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाये.
एकलपीठ में सुनवाई के समय याचिकाकर्ता ने इन प्राचार्यों की नियुक्ति में चयन समिति द्वारा अनियमितता बरतने के साथ-साथ पैसे के लेन-देन की बात कोर्ट को बताया था. चयन समिति में शामिल तीन  सदस्यों ने भी अदालत को बताया था कि प्राचार्यों की नियुक्ति में बड़े  पैमाने पर अनियमितता बरती गयी. इतना ही नहीं, चयन  समिति के एक वरीय सदस्य  डॉ शिव जतन ठाकुर ने अदालत में स्वयं उपस्थित होकर कहा था कि मेरे अंधेपन  का फायदा उठा कर नियुक्ति में अनियमितता बरती गयी.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने  अदालत को बताया कि  इन  सभी नियुक्तियों का मामला उस समय का है, जब  बिहार में कुलपतियों की नियुक्ति ही विवादास्पद हुआ करती थी. काॅलेजों में नियुक्तियां  राज्य सरकार के परामर्श के बगैर हुआ करती थीं. पटना  हाईकोर्ट  के एक फैसले के बाद  कुलपतियों की नियुक्ति  के मामले में बड़ा  फैसला आया, जो सुप्रीम कोर्ट तक गया.  हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों  के आलोक में बिहार सरकार ने अपने विश्वविद्यालय कानून को संशोधित किया.
राज्य सरकार द्वारा गठित सर्च कमेटी के माध्यम से कुलपतियों की नियुक्ति का एक  नया प्रावधान बनाया. उसी तरह उस समय 21  प्राचार्यों की बहाली में भारी  गड़बड़ी की शिकायत सरकार को विधानसभा के ध्यान आकर्षण में प्राप्त हुई. तत्कालीन शिक्षा मंत्री  ने  गड़बड़ी की जांच का आदेश मगध  प्रमंडल के तत्कालीन आयुक्त को दिया. आयुक्त ने जांच में शिकायत को सही पाया. राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए  जांच  का जिम्मा निगरानी विभाग को सौंप दिया. सुनवाई के समय मगध विश्वविद्यालय  की ओर से बहाली प्रक्रिया से  जुड़े सारे दस्तावेजों को कोर्ट को सौप दिया गया.
दो फरवरी, 2012 को हुई थी नियुक्ति (बॉक्स)
मगध  विश्वविद्यालय में कुल 22 प्राचार्यों की नियुक्ति दो फरवरी, 2012 को की गयी  थी. 22 में केवल 21 प्राचार्यों ने ही योगदान दिया था. 29 मार्च,  2012 को मगध प्रमंडल के आयुक्त ने जांच रिपोर्ट सौंपी. 12  सितंबर, 2014 को 21 प्राचार्यों की नियुक्ति को हाईकोर्ट के न्यायाधीश शिवाजी पांडेय की एकलपीठ ने नियुक्ति को  निरस्त कर दिया. वर्ष  2015 में हटाये गये 21  प्राचार्यों ने एकलपीठ के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी थी, जिस पर दो सदस्यीय खंडपीठ ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया.
प्रभावित होनेवाले प्राचार्य
1. डॉ  शैलेश कुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य, एएनएस कॉलेज, औरंगाबाद
2.डॉ राजीव रंजन, प्राचार्य, जेजे कॉलेज, बिहटा, पटना
3. डॉ आनंद कुमार सिंह, प्राचार्य, डीएन  सिन्हा कॉलेज,जहानाबाद
4. डॉ राजेश शुक्ला, प्राचार्य, जेएल कॉलेज, खगौल, दानापुर
5. डॉ सीके वर्मा, प्राचार्य, आरएलएस यादव कॉलेज, बख्तियारपुर, पटना
6. डॉ  जवाहर प्रसाद सिंह, प्राचार्य, एसयू कॉलेज, हिलसा,
7. डॉ राज कुमार मजूमदार, प्राचार्य, एसपीएन कॉलेज, नालंदा
8. डाॅ गणेश महतो, प्राचार्य, दाउदनगर कॉलेज, औरंगाबाद
9. डॉ फूलो पासवान, प्राचार्य, राम लखन सिंह यादव कॉलेज, औरंगाबाद
10. डॉ सुशीला दास, प्राचार्य, आरपीएन कॉलेज, पटना सिटी
11. डॉ तपन कुमार शांडिल्य, मगध विश्वविद्यालय मुख्यालय
12 डॉ ओम प्रकाश सिंह, प्राचार्य, एसएन सिन्हा कॉलेज,  औरंगाबाद
13. डॉ सतीश चंद्र, प्राचार्य, विक्रम कॉलेज, पटना
14. डॉ दिलीप कुमार, प्राचार्य, नौबतपुर कॉलेज, पटना
15. डॉ सत्येंद्र प्रजापति, प्राचार्य, एसएन सिन्हा कॉलेज, बिहारशरीफ
16. डॉ एमएस हसन,  प्राचार्य, शेरघाटी कॉलेज, गया
17. डॉ सुनील सुमन, पीएस  कॉलेज, हिसुआ, नवादा
18. डॉ  मीरा कुमार,  प्राचार्य, जीबीएम महिला कॉलेज,  गया
19. डॉ विजय रजक, प्राचार्य, अरवल कॉलेज, अरवल
20. डॉ जितेंद्र रजक, प्राचार्य, आरपीएस कॉलेज, मोकामा, पटना
21. डॉ विनोद कुमार, प्राचार्य,  जवाहरलाल नेहरू कॉलेज मोकामा, पटना
फर्जी बहाली था डॉ जितेंद्र रजक का आर आर एस कॉलेज, मोकामा में प्राचार्य बनना
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