मोकामा में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम, मंजय कश्यप ने दी संगीतमय बधाई

मोकामा में कृष्ण जन्माष्टमी बड़े ही धूम धाम से मनाई जा रही है.मन्दिरों को बड़े ही भव्य तरीके से सजाया गया है.श्री कृष्ण के आगमन की सारी तैयारी कर ली गई हैं.ज्यादातर महिलाओं ने आज निर्जला व्रत रखा है .24 तक ये लोग पानी तक नहीं पियेंगे.डॉ मंजय कश्यप इंडिया ने एक सुन्दर गीत गाकर कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामना दी.भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अत्यंत कठिनाई में मातुल कंस की जेल में हुआ. पिता वसुदेव ने उफनती यमुना को पार कर रात्रि में ही उन्हें वृंदावन में यशोदा-नन्द के घर छोड़ा.यशोदानंदन को खोजने और मारने कंस ने कई राक्षस-राक्षनियों को वृंदावन भेजा. नन्हे बालगोपाल ने स्वयं को इनसे बचाया. इंद्र के प्रकोप और घनघोर बारिश से वृंदावनवासियों को बचाने गोवर्धन पर्वत उठाया. मनमोहन ने गोपिकाओं से माखन लूटा. गायें चराईं. मित्र मंडली के साथ खेल खेल में कालियादह का मानमर्दन किया. बृजधामलली राधा और अन्य गोपियों के साथ रास किया. कंस वध किया.
बालमित्र सुदामा से द्वारकाधीश होकर भी दोस्ती को अविस्मृत रखा. द्रोपदी का चीरहरण निष्प्रभावी किया. धर्मपालक पांडवों की हर परिस्थिति में रक्षा की. अर्जुन को कुरुक्षेत्र में गीता का उपदेश दिया.श्री कृष्णा के जीवन से लोग हिम्मत नहीं हरने की प्रेरणा लेते है .कितनी भी बुरी परिस्तिथि हो जो लोग कृष्णा की तरह हार नहीं मानते .सुनिए मंजय कश्यप का गीत.

शांति क्लिनिक का शुभारंभ

मोकामा में स्वास्थ्य व्यवस्था बहुत ही ख़राब है.जिस वजह से पिछले 15 सालों से सेकड़ों जाने गई है जिसे समय पर सही इलाज से बचाया जा सकता हा था.सरकार की उदासीनता कहिये या बेफिक्री उसे जनता के इस दर्द से कोई वास्ता नहीं .छोटे मोटे क्लिनिक खुल रहे है हैं.पर वो ऊंट के मुंह में जीरा के समान हैं.लेकिन कहते हैं न डूबने वाले को तिनका का सहारा ही बहुत होता है .आज 29 जुलाई को शांति क्लिनिक का शुभारम्भ मोकामा में किया गया है,धर्मेंद्र कुमार एवं राजकपूर जी ने मिलकर इसका उद्घाटन किया .इस क्लिनिक में बेगुसराय से भी नियमित डॉक्टर आया करेंगे.डाँ रामकृष्ण ( फिजिशियन M.B.B.S) 4 :00 Pm से 8:00 pm तक प्रतिदिन एवं एवं डॉ गुड़िया कुमारी (स्त्री एवं प्रसव रोग विशेषज्ञ ) सुबह 11:00 am से 3:00 pm तक प्रतिदिन मरीजो को देखेंगी.मोकामा घाट सिसौनी में इस क्लिनिक के खुलने से लोगो को अब थोरी रहत मिलने की सम्भावना है.

अशोक धाम में श्रावणी मेला शुरू, सांसद ने किया उद्घाटन

अशोक धाम में विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला शनिवार से शुरू हो गया. सांसद वीणा देवी ने श्रावणी मेले का उद्घाटन किया,उनके साथ लखीसराय के विधायक एवं मंत्री विजय सिन्हा भी थे. सुबह से ही कांवड़ियां कतारबद्ध होकर बाबा बैद्यनाथ को जलाभिषेक कर रहे हैं. मंदिर परिसर पूरा केसरियामय हो चुका है. वहीं पुलिस प्रशासन द्वारा कांवड़ियों की सुरक्षा और सुविधा का पुख्ता इंतजाम किया गया है.सांसद वीणा देवी ने सुबह बाबा भोला की पूजा अर्चना की. सांसद ने बाबा भोलेनाथ से बिहार प्रदेश और मुंगेर की जनता की सुख-समृद्धि की कामना की.पूजा के बाद सांसद बाबा अशोक धाम मंदिर के पंडित से मिली और उनसे आशीर्वाद लिया. यहां से वह अपने कार्यकर्ताओं के साथ मोकामा रवाना हुई . 28 जुलाई से शुरू हुआ ये श्रावणी मेला 26 अगस्त तक चलेगा.सांसद इस बार श्रावणी मेले पर खुद नजर रख रही हैं. लिहाजा, प्रशासन भी किसी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है.

अशोक धाम आने वाले शिव भक्त और कांवरियों के लिए इस बार माकूल इंतज़ाम किए गए हैं. पानी, बिजली, सड़क के अलावा कावरियों को रात में ठहरने के लिए टेंट और जगह-जगह पर चिकित्सा सुविधा का भी खास ध्यान रखा गया है.दूर दूर से बाबा के भक्त उनके दर्शन करने को यंहा पैदल चलकर आते है ,यह रास्ता काफी कठिन होता है. इस दौरान भक्तों को पथरीले सड़कों से होकर गुजरना पड़ता है, लेकिन उत्साह का माहौल बना रहता है.मोकामा के बेटे मंजे कश्यप द्वारा गाया गया भगवान् शिव की आराधन में गाया गया अद्भुत गीत देखिये .

अमरनाथ की यात्रा पर रवाना हुए मोकामा के श्रद्धालु

अमरनाथ की यात्रा पर रवाना हुए मोकामा के श्रद्धालु |मोकामा। बाबा बर्फानी यानी अमरनाथ यात्रा के लिए मोकामा से श्रद्धालु भक्तों का समूह २७ जून को रवाना हुआ। ‘बम बम भोले’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गुंजायमान मोकामा स्टेशन पर अमरनाथ यात्रियों को विदाई देने लिए लिए बड़ी संख्या से मोकामा वासी उपस्थित हुए। एलआईसी एजेंट मनोज कुमार ने बताया कि मोकामा वासी हर साल बाबा बर्फानी के दर्शन को जाते हैं. हर साल करीब ३०० मोकमा क्षेत्र वासी अमरनाथ की यात्रा करते हैं। इस बार भी २७ जून को रावण हुए समूह में ३५ लोग शामिल हैं जबकि अगले कुछ दिनों में और भी श्रद्धालु अमरनाथ जायेंगे। सुदर्शन , नन्दलाल सहित दर्जनों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के जयकारे लगाते हुए अमरनाथ को रवाना हुए.
गौरतलब है कि इस बार अमरनाथ यात्रा के लिए इलेक्ट्रोमेगनेटिक चिप, बाइक, बुलेटप्रूफ एसयूवी से लैस पुलिस काफिले और जगह-जगह बुलेटप्रूफ बंकर जैसे व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं.

आपको बता दें कि दक्षिण कश्मीर स्थित हिमालय में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर बसी अमरनाथ गुफा में हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए अब तक दो लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने रजिस्‍ट्रेशन कराया है.

निकम्मे जनप्रतिनिधियों ने ली एक और जान

निकम्मे जनप्रतिनिधियों ने ली एक और जान |मोकामा को राजनीती का मक्का कहा जाता है । भारत और बिहार के हर पार्टी के बड़े बड़े नेता इसी मिट्टी से जन्मे हैं। आज भारतीय लोकतंत्र के हर सदन में यहां के लोग प्रतिनितिधत्व कर रहे हैं। हर छोटी बड़ी राजनीतिक पार्टियों में यहां के लोग बड़े बड़े ओहदे पर विराजमान हैं। फिर चाहे वह 10 जनपथ हो, चाहे 6-A दीनदयाल मार्ग , 1 आने मार्ग हो या 11 बलवंत मेहता राय मार्ग। हर दल में अपनी धाक जमाने वाले मोकामा के नेता मौजूद हैं।दुर्भाग्य से लोकतंत्र का असली चेहरा आजकल बाहुबल और धनबल ही है , तो पूरे बिहार में जिनकी तूती बोलती है सब यहीं से हैं। मगर स्वघोषित बड़े बड़े सूरमा के होते हुए मोकामा स्वास्थ्य में इतना कैसे पिछड़ गया, इसका जवाब किसी सरकार, दद्दा, भैया, प्रवक्ता के पास नहीं है।इतना बड़ा अस्पताल , बिहार का गौरव नाजरथ अस्पताल बंद हो गया। सरकारी अस्पताल तो खुद बीमार है। मोकामा, घोसवरी , मरांची में सरकारी आस्पताल तो है मगर डॉक्टर नहीं , दवाई नहीं ,जाँच नहीं ,सफाई नहीं। अगर आप स्वस्थ है तो इन सरकारी अस्पतालों में चले जाइये यकीनन आप कोमा में चले जायेंगे, बीमार होकर लौटेंगे। चाहे वर्तमान के जनप्रतिनिधि हो या पूर्व जनप्रतिनिधि किसी ने भी मोकामा के स्वास्थ्य व्यवस्था पर कभी सोचा तक नहीं।

हाँ, अगर स्वास्थ मंत्री कभी आये हैं तो बस मीडिया में बाईट देने के लिए। भगत किस्म के चमचे जिनका नारा बुलंद करते हैं उनके मुँह से अपने नेता के सामने यह बोल नहीं निकलता कि ‘आएं जी हममे सब बीमार होके मर रहलिये हैं अ तोरा देखाय नै दे हो।’हर दिन मौत के साए में है जिन्दगी। सड़क पर इतनी दुर्घटना हो रही है। पिछले 5-10 सालों में कितने नौनिहालों ने अपनी जान गवाई है, कितनी माताएं बाँझ हुई है, कितनी मांगों का सिन्दूर उजरा , कितनी बहनें राखी पर रोती हैं। आज मोकामा में ऐसा एक भी टोला या मोहल्ला नहीं है जहाँ किसी ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कमी के वजह से जान न गवाई हो। मोकामा का हर मोहल्ला मातम पर मजबूर हुआ है। मोकामा के हर वार्ड हर पंचायत के लोग इस बिगड़ी स्वास्थ व्यवस्था के कारण अपनी जान गंवाने को मजबूर हैं। डर कर जीने को लाचार हैं, सिसकने और रोने के लिए बेबस है क्योंकि आप अपने जनप्रतिनिधियों के सामने मुँह नहीं खोल रहे हैं। आज न कल सबकी बारी आ सकती है जब तक जिन्दा हैं वोट दे लीजिये , रख लीजिये जिन्दा लोकतंत्र को। लेकिन सोचिये खुद मरकर कब तक निक्कमे लोगों के लिए नारे बुलन्द करेंगे आप?

अभी कल की ही बात है अपने विपिन दा की बेटी की शादी थी। पूरा गांव इनकी बेटी की शादी में शामिल था। पटना से बारात आई थी। अपनी औकाद से बढ़कर उन्होंने खर्चा किया ताकि गांव और उनकी इज्जत बनी रहे। सारी परम्पराएँ निभाई जा रही थी। महिलाएं ,बच्चे , रिश्तेदार हर कोई खुश था अचानक विपिन दा की तबीयत बिगड़ गई और इलाज के आभाव में उनकी मौत हो गई।जी हाँ बेटी का कन्यादान करने वाला पिता स्वास्थ्य सुविधा न होने के कारण मर गए। आज अगर मोकामा में स्वास्थ व्यवस्था ठीक रहता तो यकीनन आज विपिन दा जिन्दा होते। शहनाई वाले घर में मातम नहीं पसरा होता। गांव अपनी बेटी को विदा करते हुए रोता, मगर दुर्भाग्य पूरा गावं बेटी विदाई पर खुशी के आंसू बहाने के बदले विपिन दा को कंधा देते समय रो रहा था। बेटी के विवाह मंडप पर पिता की चिता सजी थी।यह घटना मोकामा के हाथीदह गांव में सोमवार की रात में हुई। विपिन सिंह की पुत्री डोली कुमारी की पटना से बरात आयी थी। बरातियों के दुरागमन के बाद मंडप पर शादी की रस्में पूरी हो रही थीं। इसी दौरान विपिन सिंह अचेत होकर गिर पड़े। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। इधर, गांव के प्रबुद्ध लोगों ने हस्तक्षेप कर विवाह को संपन्न कराया। बाद में घटना की जानकारी मिलते ही शादी की खुशियां मातम में बदल गयीं। ग्रामीणों ने बताया कि विपिन सिंह अपनी इकलौती बेटी के विवाह को लेकर काफी खुश थे, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। दूसरी ओर, बड़े बेटे विकास की भी गुरुवार को बेगूसराय बरात जाने वाली थी। लेकिन अब गांव के लोग इस घटना से काफी मर्माहत हैं।

आपको क्या लगता है ये एक सामान्य मौत है , किसी सोची समझी साजिश का आभास नहीं होता आपको? पिछले एक दशक से लोग छोटी छोटी घटनाओ में जान गवा रहे हैं। दुर्घटना ,आत्महत्या ,अचानक से आया कोई दौरा, हर बार सिर्फ और सिर्फ मौत जबकि हर मौत को टाली जा सकती थी।हमारे जनप्रतिनिधि चाहे वो किसी भी सदन के हों , नेता चाहे किसी भी दल के हों इन्हें कोई शर्म नहीं है। सबकुछ लूट लिया आपका फिर भी चुपचाप हैं। कब तक सवाल नहीं करेंगे अपने सोये नेताओं से। अगर उनमें कुछ गैरत बची है तो कम से कम मिल-बांट कर मोकामा की स्वास्थ्य व्यवस्था तो सुधार दें।

नगर परिषद के खिलाफ धरना के लिए तैयार हो रहा मोकामा

नगर परिषद् मोकामा के सभी योजनाओं अनियमितता और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए बैठक वार्ड नंबर 10 में किया गया . श्री राम नरेश प्रसाद सिंह वार्ड नंबर 17 ,एडवोकेट सिविल कोर्ट, बाढ के अध्यक्षता में किया गया . युवा नेता रोशन कुमार ने विधवा पेंशन ,वृद्धा पेंशन, दिव्यांग पेंशन ,आवास योजनाएं ,पेयजल की गंभीर समस्याओं को लेकर समाज के हित के लिए 20/ 6 /2018 महाधरना में जनहित के लिए शंखनाद किए l टाल विकास समिति मोकामा – बड़हिया संयोजक- आनंद मुरारी वार्ड नंबर 10 ने सकारात्मक जनहित के मुद्दों पर विचार रखें . तपोवन परिसर अजय सर ने प्रीत परिजनों एवं वंचित जरूरतमंद नागरिकों को योजनाओं का लाभ मिले . सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष कुमार, वार्ड नंबर 13 समीर कुमार ,आनंद कुमार, वार्ड नंबर 12 सुधीर कुमार, वार्ड नंबर 10 दिनेश कुमार मोदन गाछी वार्ड नंबर 5, बिट्टू कुमार उर्फ नवीन कुमार वार्ड नंबर 10 एवं महाधरना संयोजक- चंदन कुमार, जय हिंद, जय मोकामा ,जय बिहार ,जय भारत

आज गंगा महा आरती ,महादेव स्थान मोकामा में आप सदर आमंत्रित है

गंगा महाआरती/संघोष्ठी,दिनांक 24-05-2018 को संध्या 5 बजे महादेव स्थान,सकरवार टोला,मोकामा में गंगा दशहरा के अवसर पर माँ गंगा आरती और संघोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है,आप सभी नगर वासी सपरिवार सादर आमंत्रित है।निवेदक:-गंगा संरक्षण समिति ,मोकामा.ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन गंगा का धरती पर हस्त नक्षत्र में अवतरण हुआ था। पुराणों के अनुसार इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। साथ ही इस दिन गंगा की विशेष पूजा अर्चना और भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है। गंगा दशहरा पर दान और उपवास का बड़ा महत्व होता है। दस तरह के पापों को हरने के कारण इसे दशहरा कहते हैं। इन दस तरह के पापों में तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक पाप होते हैं.इस साल ज्येष्ठ मास अधिकमास है, इसलिए अधिकमास की शुक्लपक्ष की दशमी को गंगादशहरा मनाया जाएगा।

जिस वर्ष अधिकमास हो तो उस वर्ष अधिकमास में ही गंगा दशहरा माना जाता है न कि शुद्धमास में। इस दिन व्यक्ति गंगाजी या पास में स्थिति किसी पवित्र नदी में स्नान और पूजन करने की परंपरा है। गंगा स्नान करते समय ऊं नम: शिवाय नारायण्यै दशहरायै गंगायै नम: का जप करना चाहिए।

धूम धाम से निकली श्री राम नवमी की शोभा यात्रा

जय श्री राम के नारों से गुंजायमान हुआ मोकामा.21 मार्च को जब मोकामा में श्री रामनवमी की शोभा यात्रा निकली तो कंही से यकीन करना मुश्किल था की ये रामनगरी अयोध्या नहीं मोकामा है.हजारो लोग जब भगवा पहन जय श्री राम के नारों के साथ सडको पर उतरे तो पूरा मोकामा भक्तिमय माहौल में झूम उठा.क्या युवा और क्या बुजुर्ग हर किसी का उत्साह देखने लायक था.हर वर्ग के लोग शमिल हुए.बच्चों में अनोखा ही उत्साह था.रौशन भारद्वाज के नेत्र्तिव में पुरे मोकामा का भ्रमन किया गया.इस दौरान प्रभु श्री राम जी की झांकीयां सजाई गईं जहां  बड़ी संख्या में राम भक्तों ने हाजिरी लगवाई.श्री राम और उनके परिवार की सुन्दर झांकी ने सबका मन मोह लिया.श्री राम के गानों पर डीजे पर थिरकते रहे लोग.संजीव जी,बब्बन जी,कन्हैया जी,हेमू जी,रामकृष्ण जी,संदीप जी ,सन्नी जी  जैसे सेकड़ों कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम की सफलता के लिए दिन रात एक कर दिया था जिसका परिणाम हुआ की इतना अच्छा शोभा यात्रा निकाला गया.श्री कृष्ण मारवाड़ी विद्यालय से ये शोभा यात्रा प्रारम्भ की गई और पुरे शहर में घुमाई गई.पूरा मोकामा भक्तिमय माहोल में जय श्री राम के नारों से गुंजायमान था.


याद किये गए श्रीबाबू

मोकामा के मरांची में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की पुण्यतिथि  मनाई गई .इस कार्यक्रम काआयोजन विचार मंच के सौजन्य से  गया था.जिसका संयोजन पवन कुमार ने किया.कार्यक्रम की शुरुआत बीडीओ नीरज कुमार, सीओ जयकृष्ण प्रसाद, थानाध्यक्ष राजीव कुमार पटेल, भाजपा नेता शशि शंकर शर्मा व जदयू नेता परशुराम पारस ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया बीडीओ नीरज कुमार और श्रीकृष्ण विचार मंच के अध्यक्ष पवन कुमार ने कहा कि श्रीबाबू का जीवन प्रेरणा स्रेत है तथा उनके मुख्यमंत्रीत्वकाल में बिहार ने कई बुलंदियों को छुआ. मौके पर मुखिया राम कुमार, पूर्व मुखिया केदार सिंह, मंटू यादव, राजकुमार यादव, प्रणव कुमार, अशोक सिंह, संजय सिंह आदि मौजूद थे.

श्री बाबू 02/04/1946 से 31/01/1961 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे .डॉ. राजेन्द्र प्रसाद तथा अनुग्रह नारायण सिन्हा के साथ वे भी आधुनिक बिहार के निर्माता के रूप में जाने जाते हैं। बिहार, भारत का पहला राज्य था, जहाँ सबसे पहले उनके नेतृत्व में ज़मींदारी प्रथा का उन्मूलन उनके शासनकाल में हुआ.आघुनिक बिहार के निर्माता डा0 श्री कृष्ण सिंह स्वतंत्रता-संग्राम के अग्रगण्य सेनानियों में से रहे है . इनका का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र एवं जन-सेवा के लिये समर्पित था . स्वाधीनता की प्राप्ति के बाद बिहार के नवनिर्माण के लिए उन्होंने जो कुछ किया उसके लिए बिहारवासी सदा उनके ऋणी रहेंगे . राजनीतिक जीवन के दुर्धर्ष संघर्ष में निरन्तर संलग्न रहने पर भी जिस स्वाभाविकता और गम्भीरता के साथ वे अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते थे. वह आज के युग मे अत्यन्त दुर्लभ है . सत्य और अहिंसा के सिद्धांत में उनकी आस्था अटल थी .

अपनी अद्भुत कर्मठता उदारता एवं प्रखर राजनीतिक सूझ-बूझ के धनी डा0 श्रीकृष्ण सिंह सन् 1917 ई0 में लेजिस्लेटिव कौंसिल और सन् 1934 ई0 में केन्द्रीय एसेम्बली के सदस्य चुने गये . सन् 1931 ई0 का भारतीय संविधान जब 1 अप्रैल 1937 से लागू हुआ तो डा0 श्रीकृष्ण सिंह के प्रधान मंत्रित्व से ही बिहार में स्वायत्त शासन का श्रीगणेश हुआ . वे ही बिहार के एक ऐसे वरेण्य कालपुरूष थे जो जीवन के अंतिम घड़ी (31 जनवरी 1961) तक बिहार के मुख्य मंत्री के सम्मानित पद पर बने रहे . उन्होंने इस राज्य का लगभग 15 वर्षो तक मुख्य मंत्री के रूप में सफलतापूर्वक दिशा-निर्देश किया था एवं इस राज्य के नव निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी .

कृष्ण सिंह बड़े ओजस्वी अधिवक्ता थे. ये 1937 में केन्द्रीय असेम्बली के और 1937 में ही बिहार असेम्बली के सदस्य चुने गए. 1937 के प्रथम कांग्रेस मंत्रिमंडल में ये बिहार के मुख्यमंत्री बने. राजनैतिक बंदियों की रिहाई के प्रश्न पर इन्होंने और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविन्द बल्लभ पंत ने त्याग पत्र की धमकी देकर अंग्रेज सरकार को झुकाने के लिए बाध्य कर दिया था. 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध आरंभ होने पर कृष्ण सिंह के मंत्रिमंडल ने त्याग पत्र दे दिया. 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह के लिए गांधी जी ने सिंह को बिहार का प्रथम सत्याग्रही नियुक्त किया था 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी ये जेल में बंद रहे.1946 में कृष्ण सिंह फिर बिहार के मुख्यमंत्री बने और 1961 तक मृत्युपर्यंत इस पद पर रहे. इनके कार्यकाल में बिहार में महत्त्व के अनेक कार्य हुए. जमींदारी प्रथा समाप्त हुई, सिंद्री का खाद कारखाना, बरौनी का तेल शोधक कारखाना, मोकामा में गंगा पर पुल इनमें से विशेष उल्लेखनीय है.

बच्चा बाबू को श्रद्धांजलि दी गयी

मोकामा। डॉ वैद्यनाथ शर्मा उर्फ बच्चा बाबू की आठवीं पुण्यतिथि पर 27 दिसम्बर को श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई एवं लघु काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। गणित शिक्षक चन्दन कुमार के शिक्षण संस्थान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मगही कवि भाई बालेश्वर एवं शिक्षक अजय कुमार ने डॉ वैद्यनाथ शर्मा की तस्वीर पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। तत्पश्चात उपस्थित गणमान्य जनों ने पुष्पांजलि अर्पित की।

प्रेम प्रकाश ‘मनोज’, सागर जी, संजय जी, पप्पू जी, धीरज कुमार, आनन्द मुरारी आदि ने अपने वक्तव्य में डॉ शर्मा को स्मरण किया। मोकामा की उन्नति तथा प्रगति में डॉ शर्मा की महत्ती भूमिका पर वक्ताओं ने सारगर्भित उद्गार व्यक्त किये। शिक्षण, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में बच्चा बाबू के सराहनीय योगदान को वक्ताओं ने अभिव्यक्त किया एवं मोकामा तथा बिहार की समृद्धि के लिए बच्चा बाबू ने जो स्वप्न देखे थे उसे साकार करने का स्वसंकल्प लिया गया।

काव्य गोष्ठी की शुरुआत मिथिलेश कुमार ने की और अपनी रचना में मोकामा की महत्ता को रेखांकित किया। आशुतोष कुमार आर्य उर्फ बौआ जी ने डॉ शर्मा के सम्पूर्ण जीवन एवं उनके अनुकरणीय योगदान को काव्य भाव में प्रस्तुत कर श्रोताओं की वाह वाही ली। प्रसिद्ध मगही कवि भाई बालेश्वर ने अपनी रचनाओं से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। मोकामा का स्वर्णिम इतिहास और वर्तमान की चिंताजनक समस्याओं पर उन्होंने अपनी रचनाओं से कुठाराघात किया और नई पीढ़ी को कृतसंकल्पित होकर हर क्षेत्र में सफलता के शिखर पर पहुंचने हेतु प्रेरित किया जिससे बच्चा बाबू का मोकामा की समृद्धि के लिए देखा गया सपना पूरा हो। अजय कुमार ने शिक्षा एवं समाज हेतु बच्चा बाबू के योगदान को स्मरण किया एवं प्रेरणादायी काव्य पाठ किया। सुप्रीम कोर्ट में सेवारत युवा अधिवक्ता कुमार सानू ने उपस्थित विद्यार्थियों को रोचक अंदाज में स्वर्णिम भविष्य की सफलता के गुर दिए।

कार्यक्रम का संचालन डॉ सुधांशु शेखर ने किया एवं पप्पू जी ने आभार ज्ञापित किया।