शरद सागर ने किया दो दिवसीय मोकामा दौरा,बच्चों संग की बात

जुलाई 5, 2018,मोकामा के ऐतिसाहिक स्थलों पर किया हज़ारों युवाओं का सम्बोधन, राष्ट्रकवि दिनकर के स्कूल जाकर भी किया छात्रों को सम्बोधित .भारतीय युवा आइकॉन और विश्व प्रसिद्द युवा उद्यमी श्री शरद सागर ने किया दो दिवसीय मोकामा दौरा। 4 और 5 जुलाई के दौरे की शुरुआत श्री शरद सागर ने मोकामा से लखीसराय जाकर एक सरकारी स्कूल में सैंकड़ों बच्चों से बातचीत कर की। शरद सागर ने विश्व प्रसिद्द मोकामा टाल का भी भ्रमण किया। मोकामा टाल को दाल के कटोरे के नाम से जाना जाता है। मोकामा टाउनहॉल में किया 600 से भी ज़्यादा बच्चों को सम्बोधित.5 जुलाई सुबह 10 से 12 शरद सागर ने मोकामा के ऐतिहासिक टाउनहॉल में लगभग 10 स्कूलों से आये 600 से अभी अधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को किया सम्बोधित। अपने भाषण में श्री शरद सागर ने कहा – “मेरा जीवन दिनकर की कविताओं से प्रेरित रहा है और दिनकर का जीवन और उनकी कविताएं इसी मोकामा से प्रेरित रही हैं। इसलिए मेरा मोकामा आना सम्मान की बात है। हमें ज़रूरत हैं की मोकामा से हम भारत के लिए अगला नेतृत्व तैयार करें। हमने अपने बच्चों को नेतृत्व से दूर रखा है। आज हमें ज़रूरत है की हम शिक्षा और नेतृत्व को जोड़ें ताकि देश के अगले डॉक्टर, चिकित्सक, अभियंता और राजनेता मोकामा जैसे छोटे शहरों से आएं।”

टाउनहॉल में श्री शरद सागर के साथ मोकामा के ही रहने वाले श्री कुमार शानू थे। श्री कुमार शानू एक सामाजिक कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हैं जिन्होंने अपारदर्शिता को बढ़ावा देते सुस्त सरकारी विभागों के खिलाफ कई मुक़दमे लड़े हैं। शानू ने सीबीएसई के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक मुकदमा भी जीता जिसके बाद सीबीएसई भी सूचना का अधिकार क़ानून के अंतर्गत आता है। टाउनहॉल में आपन बिहार के संस्थापक अविनाश कुमार भी मौजूद थे। टाउन हॉल के बाद श्री शरद सागर ने मोकामा के ऐतिहासिक राम रतन सिंह महाविद्यालय जाकर श्री राम रतन जी की प्रतिमा को माल्यार्पण भी किया।मोकामा घाट जाकर राष्ट्रकवि दिनकर के ऐतिहासिक स्कूल का किया दौरा और बच्चों को किया सम्बोधित – श्री शरद सागर ने मोकामा घाट स्थित सरकारी उच्च विद्यालय के निमंत्रण को स्वीकार किया और वहां स्कूल के सभी बच्चों को किया सम्बोधित.मोकामा घाट हाई स्कूल में डॉ सुधांशु शेखर जी ने मंच संचालन कर बच्चों को शरद जी के बारे में बताया,एवं प्रचार्य द्वारा शरद जी को बुके भेंट कर समानित किया गया ,इस मौके पे रंजन सर ,अब्दुल मोगनी सर,रंजन सर,धरमेंद्र सर,गोपाल सर,कन्हैया सर ,किरण मैडम , कुंदन मैडम आदि मौजूद थे.300 से ज्यादा बच्चे और शिक्षक गण वंहा मौजूद थे .कुंदन मैडम के द्वारा राष्ट कवि दिनकर जी का एक शोध किया गया था ,जिसे उन्होंने बच्चों एवं शरद सागर जी को सुनाया .शरद जी रामधारी सिंह दिनकर जी के छात्रावास ,वो कूआं जन्हा दिनकर जी स्नान करते थे ,वह क्लास रूम जन्हा दिनकर जी पढ़ते थे देखा और स्कुल प्रांगन का भ्रमण किया. वहां स्कूल के बच्चों से शरद सागर ने कहा – “देश और दुनिया भर को दिनकर और उनकी कविताओं ने प्रेरित किया और आप सभी तो उसी कक्षाओं में पढ़ते हैं जहाँ राष्ट्रकवि पढ़े। इन्ही जगहों से दिनकर ने इस देश का मार्गदर्शन किया। आज आवश्यक है की आप सब भी वही मार्गदर्शन करें जो इसी विद्यालय के एक छात्र ने किया।शरद जी ने दिनकर जी की कविता भी बच्चों को सुनाई. “4 जुलाई को मोकामा के स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों को किया सम्बोधित और की मुलाकात – मोकामा टाल समिति के अध्यक्ष एवं स्थानीय शिक्षक, अध्यापकगण, उद्यमी, एवं लोगों के परेशानियों को समझा और एक बेहतर नेतृत्व का निर्माण करने पर बात की.

मोकामा के विद्यार्थियों के साथ साथ स्थानीय ग्रामीण भी शरद सागर को सुनने आये थे .डॉ सुधांशु शेखर,आनंद मुरारी,प्रणव शेखर शाही,विक्रांत जी ,चन्दन जी ,अजय सर,प्रभात जी,चन्दन जी आत्मा,गौतम जी,बीट्टू जी,आनंद कुमार सिंह और सेकड़ो स्थानीय लोग भी उन्हें सुनने के लिए उत्सुक नज़र आये .


अनुशासन के पर्याय फुची दा हुए सेवानिवृत्त ,रुद्रावती विद्यालय में आखिरी दिन

पिछले कई दशक से रामकृष्ण रुद्रावती उच्च विद्यालय में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी रहे रामसागर सिंह उर्फ़ फुची दा आज अपने पद से सेवानिवृत्त हुए .उच्च विद्यालय में बच्चे अपना बचपना छोड़ किशोरावस्था में रहते है.पढाई और खेल कूद के साथ साथ वो हर अच्छे बुरे चीजो को अपना लेते है जो संभवतः उनके जीवन को बर्बाद कर दे.मोकामा के 90 से लेकर 2005 तक का खुनी माहौल जब बच्चे आसानी से अपराधियों के चंगुल मैं फस जाते थे .उनकी एक गलती उन्हें अपराध की दुनिया मैं धकेल सकती थी जन्हा से वापस आना असंभव होता है.फुची दा ने न केवल अपना स्कूल का काम किया वल्कि हमेशा विद्यालय के बच्चो को डरा कर, धमका कर ,फुसला कर सही रास्ते पर चलने को प्रेरित किया .कुछ बच्चे उन्हें उस समय समझ नहीं पाए और वन्ही से अपराध की दुनिया के रास्ते इस दुनिया से भी रुखसत हो गये .पर फुची दा सेकड़ो बच्चो को सही राह दिखाने में कामयाब रहे .

विद्यालय में फुची दा एकदम कड़क थे ,हर किसी के मन में उनका खौफ होता था ,जरूरत पड़ने पर वो पिटते भी थे.पर अन्दर से एकदम कोमल एक बाप की तरह हर बच्चे के अभिभावक जो बच्चो के जीवन को सवारने के लिए हमेशा तत्पर रहे.घर से लेकर विद्यालय तक सेकड़ो बच्चो के गार्जियन रहे .सकरवार टोला के रहने वाले फुची दा जरूरत पड़ने पर बच्चो के घर तक आकर उन्हें प्रेरित करते थे.अपने वक्तिगत जीवन में दुखों के पहाड़ पर बैठे ये हर समय बच्चे का भला ही करते रहे .इन्होने राजा बाबु ,सीताराम बाबु,सुरेश बाबु जैसे अनुशासन प्रिय शिक्षक के साथ काम किया.95 से लेकर 2005 के दौर में भी उन्होंने विद्यालय को सवारने की हर कोशिश की जब हर सरकारी स्कूल महज एक कंक्रीट का भवन रह गया था.फुची दा ने विद्यालय का वो स्वर्णिम दौर भी देखा जब पंकज कुमार आई ए एस और प्रभात कुमार टेकरीवाल नासा वैज्ञानिक जैसे होनहार पढाई कर रहे थे.उन्होंने वो दौर भी देखा जब उनके विद्यालय के बच्चे अपराध के दुनिया के सिरमौर भी बन रहे थे.आज उनके सेवानिवृत्त होने के मौके पर उन्हें विदा करने मोकामा के अभिवावक भी आये ,शिक्षक और बच्चों ने उनके विदाई समारोह मैं उनके लिए अपना आभार जताया.पारम्परिक तरीके से उन्हें सम्मान के साथ सेवानिवृत्त किया गया.
मोकामा ऑनलाइन शिक्षा के मंदिर के सबसे छोटे पुजारी रामसागर सिंह उर्फ़ फुची दा के सेवा सेवानिवृत्त होने पर उन्हें धन्यवाद देता है .आपके वजह से सेकड़ो बच्चे आज सुरक्षित और सफल हैं.ईश्वर ने आपको इन बच्चों के जीवन में खुशियाँ देने का माध्यम चुना और आपने बखूबी इसे निभाया.आप सदा स्वस्थ रहें.उम्मीद करते है की आप भी सीताराम बाबु की तरह मरते दम तक रुद्रवती विद्यालय से कभी रिटायर्ड नहीं होंगे ,सरकार भले ही आपको वेतन न दें पर आप रुद्रवती को अपना प्यार हमेशा देते रहेंगे .आपको सेवानिवृत्त जीवन की बहुत बहुत शुभकामना .

मोकामा की बेटी 3 बार मेट्रिक फेल ,तीनो बार गणित में 17 नंबर ,संयोग या साजिश

बिहार बोर्ड से छात्रा ने पूछा सवाल, मैट्रिक में तीन बार से एक ही पेपर में समान अंक क्‍यों?बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में फेल कर रही एक छात्रा को तीन बार से एक ही विषय में समान अंक आ रहे हैं। छात्रा का कहना है कि ऐसा संभव नहीं, उसे इस बार करीब 70 अंक की अपेक्षा थी।अगर यह संयोग है तो अद्भुत है। अगर नहीं तो बड़ा सवाल भी है। बिहार विद्यालय परीक्षा समीति (बिहार बोर्ड) के हाल में जारी मैट्रिक रिजल्ट में एक छात्रा को एक ही विषय में तीसरी बार 17 अंक आए हैं। छात्रा शुक्रवार को बिहार बोर्ड कार्यालय में अपनी ऐसी समस्‍याओं के साथ पहुंचे सैकड़ों अन्‍य छात्र-छात्राओं में शामिल थी।लगातार तीन परीक्षाओं में समान नंबर.पटना के मोकामा की रहने वाली छात्रा प्रियंका कुमारी पिछले साल से मैट्रिक की परीक्षा में फेल कर रही है। वजह है गणित में 17 अंक। मोकामा के मोर स्थित श्रीभगवती हाईस्कूल की छात्रा प्रियंका को 1917 की मैट्रिक परीक्षा में गणित में 17 अंक आए। उसने कंपार्टमेंटल परीक्षा दी। उसमें भी गणित में 17 अंक हीं आए। फिर 2018 की परीक्षा के हाल में घोषित रिजल्‍ट में भी प्रियंका को गणित में 17 अंक ही आए हैं। छात्रा ने इसपर सवाल उठाते हुए अनियमितता की आशंका जाहिर की है।,/p>

छात्रा का दावा, आने चाहिए अधिक नंबर.प्रियंका का कहना है कि उसकी परीक्षा ठीक गई थी तथा उसे 70 के आसपास अंक आने चाहिए। उसके अनुसार मूल्‍यांकन में गड़बड़ी की गई है। हालांकि, बोर्ड के एक अधिकारी ने नाम नहीं देने के आग्रह के साथ कहा कि गोपालगंज में मैट्रिक की कॉपियां गायब हुईं हैं तो ऐसा नहीं कहा जा सकता कि कोई गड़बड़ी हुई ही नहीं है। लेकिन, जरूरी नहीं कि यह गड़बड़ी का ही मामला हो।

रंग उमंग कार्यशाला,17 गांवों के सौ से अधिक बच्चे ले रहे भाग

रंगकर्म के ककहरे से गुलजार हुआ मरांची गांव,आदर्श मध्य विद्यालय मरांची में सौ से अधिक बच्चे ले रहे भाग.रंगकर्म के ककहरे से गुलजार हुआ मरांची गांव। 17 गांवों के सौ से अधिक बच्चे ले रहे हैं कार्यशाला में भाग। आदर्श मध्य विद्यालय मरांची में संगीत, नृत्य, नाटक, ललित कला और व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों पर 17 गांवों के सौ से अधिक बच्चे अपनी विधाओं को प्रस्तुत कर रहे हैं। आकाशगंगा रंग चौपाल एसोसिएशन बरौनी द्वारा ग्रीष्मकालीन रंग कार्यशाला रंग-उमंग के तहत 11 दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कई विधाओं के प्रशिक्षक अपने-अपने तरीके से गांव के बच्चों को रंगकर्म के ककहरे से वाकिफ कर रहे हैं।

गर्मी की छुट्टी के दिनों में खासकर के ग्रामीण बच्चों के लिए आकाशगंगा का यह प्रयास मध्य विद्यालय मरांची के मैदान में अल सुबह से देखते बन रहा है । अल सुबह 5:30 से ही कार्यशाला में पहुंच रहे हैं इन बच्चों का बेसब्री से इंतजार कर रहे होते हैं । सुबह 6 बजे इन बच्चों का व्यायाम-योग शुरू होता है जिसे मध्यप्रदेश नाटय़ विद्यालय से पास आउट ऋषिकेश कुमार देख रहे हैं। शरीर के विभिन्न अंगों के साथ-साथ भाषा और शब्दों को भी ध्यान में रखकर बच्चों का वाइस एक्सरसाइज भी कराया जा रहा है। इसके बाद कार्यशाला के संगीत प्रशिक्षक नरेश कुमार के नेतृत्व में बच्चे स्वर अभ्यास भी करते हैं। फिर इन बच्चों की मस्ती की पाठशाला में ये बच्चे अपनी अभिरुचि के अनुसार अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षण लेते हैं। नाटक, लोक नृत्य, शास्त्रीय नृत्य, पाश्चात्य नृत्य, ललित कला, संगीत सहित अन्य विधाओं में यह बच्चे प्रशिक्षण लेकर अपने अंदर कला की भूख को पैदा कर रहे हैं । कार्यशाला में पटना से आये नृत्य प्रशिक्षक राहुल मुकेश, लक्ष्मण, कुंदन, विक्की, संगीत में नरेश कुमार, बबलू कुमार, सुबोध कुमार ललितकला में मनीष कुमार अंकित वर्मा राधे कुमार, रूपेश कुमार, अमरेश कुमार, डॉ. कुन्दन कुमार आदि लगातार प्रशिक्षण दे रहे हैंर्।शाला निर्देशक राष्ट्रीय नाटक विद्यालय नई दिल्ली से पास आउट गणोश गौरव कहते हैं कि गांव के बच्चों के लिए सुनहरा अवसर है जहां वे एक साथ अलग-अलग विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं । यह एक मानव निर्माण की कार्यशाला है, जिसमें समाज के पूर्ण सहयोग की आवश्यकता है ।

लगातार गांव के हर अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों से मिलकर कार्यशाला की सफलता को लेकर प्रयास किया जा रहा है । कार्यशाला प्रभारी और आकाश गंगा के संयोजक डॉ. कुन्दन कुमार कहते हैं कि का कस्बाई रंगमंच और गांव के बच्चों के लिए विगत 14 वर्षो से रंग उमंग कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है ।(Rastiy Sahara)

12वी नतीजे में मोकामा के होनहारों ने भी दिखाया जलवा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 12वी कें नतीजे घोषित कर दिए गए हैं. पिछले साल की तरह इस साल भी लड़कियों ने बाजी मारी है. नोएडा की मेघना श्रीवास्तव ने 500 में से 499 अंक लाकर टॉप किया है, तो वहीं गाजियाबाद की अनुष्का चंद्रा 498 और जयपुर की चाहत बोधराज 497 अंक हासिल कर दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं.मोकामा के भी विद्यार्थी बहुत ही अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हुए है.पिछले कुछ वषों से मोकामा के बच्चे पढने में जान लगा रहे है.जिसका परिणाम है की न सिर्फ उनका परीक्षा परिणाम अच्छा हो रहा है वरन जब वो प्रतियोगिता में जाते है तो वंहा भी एक नया मुकाम पाते है.लड़के और लडकियाँ सबने पढाई के बल पर मोकामा को एक नया नाम देने का रास्ता दिखाया है .आज हर साल मोकामा के हजारों छात्र हर प्रतियोगिता परीक्षा में चयनित हो रहे हैं.

मोकामा ऑनलाइन उन सभी विद्यार्थियों को शुभकामना देता है जिसके वजह से मोकामा पुनह गौरवान्वित होता जा रहा है.अभी कुछ बच्चो की सूचि है जिनके अच्छे परिणाम पर आप उन्हें बधाई दे सकते है.मोकामा हथिदह के छात्र अमित भूषण (पिता श्री शेलेन्द्र भूषण,दादा श्री राम नंदन प्रसाद सिंह) ने अच्छे अंक लाकर अपने गावं का नाम रौशन किया है,इनका ननिहाल भी मोकामा है ,इनके नाना जी श्री राम बालक सिंह है,मामा जी श्री ललन सिंह है .
मोकामा मोर से गौरव कुमार(पिता श्री दीनबंधु कुमार) ने अच्छे अंक लाकर मोर गावं को गौरवान्वित किया है .अच्छे अंक लाकर आगे अपनी पढाई को और आगे बढ़ाएंगे .जीवन में कुछ अच्छा कर हमेशा ही मोर गावं का नाम ऊँचा रखेंगे .

छात्र संघ चुनाव रद्द

मगध विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाला आर आर एस कॉलेज मोकामा का छात्र संघ चुनाव रद्द कर दिया गया है .एसा इसलिए की किसी भी उम्मीदवार की उपस्तिथि 75 से कम थी. मगध विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में पक्षपात करने का आरोप लगाकर छात्र संगठनों ने फिर हंगामा किया। सोमवार को छात्र राजद, एआईएसएफ, एनएसयूआई और आइसा से जुड़े दर्जनों विद्यार्थी व छात्र नेताओं ने मगध विश्वविद्यालय शाखा कार्यालय के आगे काफी देर तक प्रदर्शन किया और ताला जड़ दिया। यही नहीं, सड़क को भी जाम कर दिया, जिस कारण वाहनों की लाइन लग गई।

जाम व हंगामे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस किसी तरह समझा-बुझाकर प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाने की कोशिश करने लगी, लेकिन प्रदर्शनकारी हटने को तैयार नहीं थे। कुछ छात्र नेता कार्यालय के गेट पर ही बैठ कर नारेबाजी करने लगे। इनलोगों ने आरोप लगाया कि पटना सिटी स्थित आरपीएम कॉलेज में एबीवीपी के छह उम्मीदवारों को छोड़ कर सभी का पर्चा खारिज कर दिया गया। प्रदर्शनकारी बाढ़, मोकामा, खगौल आदि के कॉलेजों में भी बेवजह नामांकन रद्द करने का आरोप लगाया। वे चुनावी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करने की मांग पर अड़े रहे।
(सौजन्य हिन्दुस्तान)

जल्दी कीजिये अंतिम तिथि 28 जनवरी

बिहार सरकार (पटना) के समाज कल्याण विभाग ने समेकित बाल विकास सेवाओं के अंतर्गत आंगनवाड़ी सेविका और सहायिका के 237 पदों पर रिक्तियां निकाली हैं। ये नियुक्तियां बाढ़-अथमलगोला, मोकामा-घोसवरी और पालीगंज के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नए आंगनवाड़ी केंद्रों में की जाएंगी। इच्छुक और योग्य महिलाएं पदों के लिए डाक से आवेदन भेज सकती हैं। पद, योग्यता और आवेदन से संबंधित जानकारियां इस प्रकार हैं :

परियोजना का नाम : बाढ़-अथमलगोला
कुल पद : 38
(पदों के आधार पर रिक्तियां)
– आंगनवाड़ी सेविका, पद : 20
– आंगनवाड़ी सहायिका, पद : 18

परियोजना का नाम : मोकामा-घोसवरी
कुल पद : 50
(पदों के आधार पर रिक्तियां)
– आंगनवाड़ी सेविका, पद : 26
– आंगनवाड़ी सहायिका, पद : 24

परियोजना का नाम : पालीगंज
कुल पद : 149
(पदों के आधार पर रिक्तियां)
– आंगनवाड़ी सेविका, पद : 75
– आंगनवाड़ी सहायिका, पद : 74

योग्यता (पद के आधार पर)
– आंगनवाड़ी सेविका पद के लिए : मान्यता प्राप्त स्कूल शिक्षा बोर्ड से मैट्रिक या समकक्ष परीक्षा पास की हो।
– आंगनवाड़ी सहायिका पद के लिए : आठवीं की परीक्षा पास की हो। इस पद के लिए चयन में विधवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
आयु सीमा : न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष।

आवेदन प्रक्रिया
– वेबसाइट www.patna.bih.nic.in पर लॉगइन करें। यहां होमपेज पर बाईं तरफ आपको Recruitments सेक्शन नजर आएगा।
– इस सेक्शन के अंतर्गत दिए गए Other Recruitments/Results लिंक पर क्लिक करें।
– इस तरह नई विंडो खुलेगी। यहां आप ‘जिला प्रोग्राम कार्यालय, पटना (I.C.D.S)’ सेक्शन में जाएं।
– इस सेक्शन के सामने ‘आंगनबाड़ी सेविका / सहायिका के चयन हेतु विज्ञापन| विज्ञापन सं.- 03/2017 -रिक्तियां’ लिंक मौजूद है। इस पर क्लिक करें।

ऐसा करने पर पद संबंधित विज्ञापन डाउनलोड हो जाएगा। इसे ध्यान से पढ़ें और अपनी योग्यता जांच लें।
– इसके बाद ‘मार्गदर्शिका 2016 एवं आवेदन पत्र का प्रपत्र एवं विभागीय पत्रांक’ लिंक पर क्लिक करें।
– इसमें दिए गए दिशा-निर्देश पढ़ लें। साथ ही दिए गए आवेदन का ए4 साइज के पेपर पर प्रिंटआउट निकाल लें।
– अब इसमें मांगी गई सभी जानकारियां सावधानी से दर्ज करें। साथ ही पासपोर्ट साइज की फोटो चिपकाएं।
– फिर इसे एक लिफाफे में डालें और डाक माध्य मे संबंधित बाल विकास परियोजना कार्यालय में जमा करा दें।

आवेदन स्वीकार होने की अंतिम तारीख : 28 जनवरी 2018

अधिक जानकारी यहां
फोन : 0612-2219073
वेबसाइट www.patna.bih.nic.in

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं कल्याणी कबीर जी

शिक्षक का दर्जा समाज में हमेशा से ही पूज्यनीय रहा है। कोई उसे गुरु कहता है, कोई शिक्षक कहता है, कोई आचार्य कहता है, तो कोई अध्यापक या टीचर कहता है ये सभी शब्द एक ऐसे व्यक्ति को चित्रित करते हैं, जो सभी को ज्ञान देता है, सिखाता है और जिसका योगदान किसी भी देश या राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करना है। सही मायनो में कहा जाये तो एक शिक्षक ही अपने विद्यार्थी का जीवन गढता है।

आपको, आपके जन्मदिन पर बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं… आने वाला प्रत्येक नया दिन, आपके जीवन में अनेकाे सफलताएँ एवं अपार खुशियाँ लेकर आये.

फर्जी बहाली था डॉ जितेंद्र रजक का आर आर एस कॉलेज, मोकामा में प्राचार्य बनना

पटना हाईकोर्ट ने  मगध विश्वविद्यालय, बोधगया में नियुक्त किये गये  21 प्राचार्यों की नियुक्ति को अवैध करार दिया है. न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाठी और न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद के दो सदस्यीय खंडपीठ ने भी गुरुवार को उनकी नियुक्ति को निरस्त कर दिया. खंडपीठ ने कहा कि हाइकोर्ट की एकलपीठ ने इन प्राचार्यों की नियुक्ति को रद्द करने का जो फैसला दिया था, वह सही है.
इसमें हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं. एकलपीठ का आदेश सभी दस्तावेजों  को देखने और सभी पक्षों को सुनने के  बाद आया है. खंडपीठ ने 21 प्राचार्यों की ओर से दायर नौ एलपीए  (अपील) पर पहले ही  सुनवाई कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. खंडपीठ ने पाया कि इन  प्राचार्यों की नियुक्ति प्रक्रिया में  व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी और अनियमितता का जो आरोप एकलपीठ के याचिकाकर्ता ने  लगाया है, वह सही है.
 
खंडपीठ  ने राज्य सरकार के आदेश पर  निगरानी विभाग द्वारा की जा रही जांच को  जल्द पूरा करने को कहा है. साथ ही यह भी आदेश दिया है कि जांच में इस बात का ध्यान रखा जाये कि कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाये.
एकलपीठ में सुनवाई के समय याचिकाकर्ता ने इन प्राचार्यों की नियुक्ति में चयन समिति द्वारा अनियमितता बरतने के साथ-साथ पैसे के लेन-देन की बात कोर्ट को बताया था. चयन समिति में शामिल तीन  सदस्यों ने भी अदालत को बताया था कि प्राचार्यों की नियुक्ति में बड़े  पैमाने पर अनियमितता बरती गयी. इतना ही नहीं, चयन  समिति के एक वरीय सदस्य  डॉ शिव जतन ठाकुर ने अदालत में स्वयं उपस्थित होकर कहा था कि मेरे अंधेपन  का फायदा उठा कर नियुक्ति में अनियमितता बरती गयी.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने  अदालत को बताया कि  इन  सभी नियुक्तियों का मामला उस समय का है, जब  बिहार में कुलपतियों की नियुक्ति ही विवादास्पद हुआ करती थी. काॅलेजों में नियुक्तियां  राज्य सरकार के परामर्श के बगैर हुआ करती थीं. पटना  हाईकोर्ट  के एक फैसले के बाद  कुलपतियों की नियुक्ति  के मामले में बड़ा  फैसला आया, जो सुप्रीम कोर्ट तक गया.  हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों  के आलोक में बिहार सरकार ने अपने विश्वविद्यालय कानून को संशोधित किया.
राज्य सरकार द्वारा गठित सर्च कमेटी के माध्यम से कुलपतियों की नियुक्ति का एक  नया प्रावधान बनाया. उसी तरह उस समय 21  प्राचार्यों की बहाली में भारी  गड़बड़ी की शिकायत सरकार को विधानसभा के ध्यान आकर्षण में प्राप्त हुई. तत्कालीन शिक्षा मंत्री  ने  गड़बड़ी की जांच का आदेश मगध  प्रमंडल के तत्कालीन आयुक्त को दिया. आयुक्त ने जांच में शिकायत को सही पाया. राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए  जांच  का जिम्मा निगरानी विभाग को सौंप दिया. सुनवाई के समय मगध विश्वविद्यालय  की ओर से बहाली प्रक्रिया से  जुड़े सारे दस्तावेजों को कोर्ट को सौप दिया गया.
दो फरवरी, 2012 को हुई थी नियुक्ति (बॉक्स)
मगध  विश्वविद्यालय में कुल 22 प्राचार्यों की नियुक्ति दो फरवरी, 2012 को की गयी  थी. 22 में केवल 21 प्राचार्यों ने ही योगदान दिया था. 29 मार्च,  2012 को मगध प्रमंडल के आयुक्त ने जांच रिपोर्ट सौंपी. 12  सितंबर, 2014 को 21 प्राचार्यों की नियुक्ति को हाईकोर्ट के न्यायाधीश शिवाजी पांडेय की एकलपीठ ने नियुक्ति को  निरस्त कर दिया. वर्ष  2015 में हटाये गये 21  प्राचार्यों ने एकलपीठ के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी थी, जिस पर दो सदस्यीय खंडपीठ ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया.
प्रभावित होनेवाले प्राचार्य
1. डॉ  शैलेश कुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य, एएनएस कॉलेज, औरंगाबाद
2.डॉ राजीव रंजन, प्राचार्य, जेजे कॉलेज, बिहटा, पटना
3. डॉ आनंद कुमार सिंह, प्राचार्य, डीएन  सिन्हा कॉलेज,जहानाबाद
4. डॉ राजेश शुक्ला, प्राचार्य, जेएल कॉलेज, खगौल, दानापुर
5. डॉ सीके वर्मा, प्राचार्य, आरएलएस यादव कॉलेज, बख्तियारपुर, पटना
6. डॉ  जवाहर प्रसाद सिंह, प्राचार्य, एसयू कॉलेज, हिलसा,
7. डॉ राज कुमार मजूमदार, प्राचार्य, एसपीएन कॉलेज, नालंदा
8. डाॅ गणेश महतो, प्राचार्य, दाउदनगर कॉलेज, औरंगाबाद
9. डॉ फूलो पासवान, प्राचार्य, राम लखन सिंह यादव कॉलेज, औरंगाबाद
10. डॉ सुशीला दास, प्राचार्य, आरपीएन कॉलेज, पटना सिटी
11. डॉ तपन कुमार शांडिल्य, मगध विश्वविद्यालय मुख्यालय
12 डॉ ओम प्रकाश सिंह, प्राचार्य, एसएन सिन्हा कॉलेज,  औरंगाबाद
13. डॉ सतीश चंद्र, प्राचार्य, विक्रम कॉलेज, पटना
14. डॉ दिलीप कुमार, प्राचार्य, नौबतपुर कॉलेज, पटना
15. डॉ सत्येंद्र प्रजापति, प्राचार्य, एसएन सिन्हा कॉलेज, बिहारशरीफ
16. डॉ एमएस हसन,  प्राचार्य, शेरघाटी कॉलेज, गया
17. डॉ सुनील सुमन, पीएस  कॉलेज, हिसुआ, नवादा
18. डॉ  मीरा कुमार,  प्राचार्य, जीबीएम महिला कॉलेज,  गया
19. डॉ विजय रजक, प्राचार्य, अरवल कॉलेज, अरवल
20. डॉ जितेंद्र रजक, प्राचार्य, आरपीएस कॉलेज, मोकामा, पटना
21. डॉ विनोद कुमार, प्राचार्य,  जवाहरलाल नेहरू कॉलेज मोकामा, पटना

गणित दिवस (रामानुजम जयंती )

मोकामा संस्कृत पाठशाला के द्वारा विगत 25  वर्षों से महान भारत के सपूत गणितज्ञ श्री रामानुजम जी  की जयंती पर गणित दिवस का आयोजन किया जा रहा है. इस  वर्ष भी ये कार्यकर्म बड़े धूम धाम से मनाया गया. इस अवसर पर गणित प्रतियोगिता, विज्ञान पर्दर्शनी का आयोजन हुआ.

कार्यकम के संस्थापक संजय सर ने अध्यक्षता की जबकि पप्पू दा मुख्य अतिथि के रूप में थे .अजय सर  जैसे शिक्षक ने अपनी उपस्थिथि से इसमें चार चाँद लगा दिया.रौशन भरद्वाज और कीर्ति आज़ाद ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया.बिहट के चर्चित गणित शिक्षक नंदन जी और विकाश जी ने भी रामानुजम जयंती को सराहा.

पंकज जी और ललन जी ने संगीतमय प्रस्तुती दी .

वर्ग 9 का आदित्य कुमार ने चरखे से बल्ब जला कर सबको अचंभित किया.

इस बार 8 बच्चों को छात्रवृति भी डी गई .पहले स्थान प्राप्त करने वाले   को 1301,दुसरे  को 1001 (3 विद्यार्थी),जबकि तीसरे  स्थान पाने वाले को 801(4 विद्यार्थी)  रूपये की छात्रवृति दी गई. ये छात्रवृति संस्कृत पाठशाला के ही पूर्व छात्र उज्जवल कुमार(धौरानी टोला) के द्वारा दी गई .