आज रुखसाना प्रवीण जी करेंगी विडियो लांच

डॉ अब्दुल कलाम के 100 कार्यकर्म की विडिओ रिलीज होगी.राम रतन सिंह महा विदयालय के सायकोलोजी की एच.ओ.डी रुखसाना प्रवीण जी के कर कमलो से ये विडिओ 8.8.18 को दिन में 12:30 बजे लांच होगा.इस विडिओ में डॉ अब्दुल कलाम को समर्पित सप्ताह के कार्यक्रम की तस्वीर है.मोकामा ने डॉ अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर 100 से ज्यादा कार्यकर्म करके एक ने एक सुनहरा नया इतिहास लिखा है .हजारो लोगों ने इस अद्भुत कार्यकर्म को अंजाम तक पहुचाया .इस कार्यक्रम की सफलता में कुछ लोगों ने रात दिन एक किया .मिडिया और सोशल मिडिया के मित्रों ने कार्यकर्म का परचार प्रसार किया.सभी शिक्ष्ण संस्थान ने इस कार्यकर्म को अद्भुत रूप से पेश किया.

नागपंचमी पर भगवती स्थान सज धज का तैयार

मोकामा गंगा किनारे माँ विसहरी भगवती विराजती हैं.यूँ तो हर दिन माँ की पूजा बड़े ही धूम धाम होती है ,मगर मंगवार और शनिवार को यंहा भक्तो की भीड़ बहुत बढ़ जाती है. गंगा किनारे माता भगवती का मंदिर शक्ति के लिए जाना जाता है .इस मंदिर में आस्था रखने वाले लोग बताते है की उन्होंने यंहा मुर्दे को जीते देखा है .यंहा माँ भगवती विषहरी रूप में विराजती है .बीमार ,लाचार ,अपंग लोग यंहा अपने स्वस्थ की कामना करते है माँ भगवती उनकी मांगे जरुर पूरी करती है .सापं ,बिच्छू व् अन्य जहरीले जंतु के काटे को माँ पल में ठीक करती है . सिर्फ मोकामा के ही नहीं वरन दूर दूर से लोग सापं बिच्छू काटे को लेकर यंहा आते है और ठीक होकर जाते है .लोगों का विस्वास है की अगर किसी व्यक्ति को जहरीले जंतु ने काटा हो वो बिना किसी डॉक्टर बैद्य को दिखाए माँ के दरवार में आ जाये तो वो जरुर ठीक हो जायेगा .जब यंहा के घरो में शादी होती है तो लड़का लड़की यंहा माता का आशीर्वाद लेने जरुर आते है .जब लड़के की शादी होती है तो लड़का माँ का आशीर्वाद लेकर ही शादी करने जाता है .जब लड़की की शादी होती है तो लड़की यंहा मंगरोड़(एक प्रकार की मिठाई जो आता ,मैदा ,गुड ,चीनी आदि से बनाया जाता है ) चढाने जाती है .अगर किसी कारन(पकरुआ,प्रेम विवाह आदि ) शादी मोकामा से न हो तो भी शादी के बाद भी नव दम्पति यंहा जरुर आते है .

सालाना मेला नागपंचमी को बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है .आज के नागपंचमी मेले के लिए पूरी तैयारी हो चुकी है .मदिर को बहुत ही अच्छे तरीके से सजाया गया है.ग्रामीणों ने बताया की मेला 12 बजे से शुरू होकर रात के 9 बजे तक चलता है ,भक्त इस बीच कभी माँ के दर्शन कर लेते है.माँ भक्तो की हर मनोकामना पूरी करती है.नागपंचमी का त्योहार श्रावण कृष्ण पंचमी और श्रावण शुक्ल पंचमी इन दोनों तिथियों में मनाया जाता है। बिहार, बंगाल, उड़ीसा, राजस्थान में लोग कृष्ण पक्ष में यह त्योहार मनाते हैं जो इस इस साल 2 अगस्त को है।भविष्य पुराण के पंचमी कल्प में नागपूजा और नागों को दूध पिलाने का जिक्र किया गया है। मान्‍यता है कि सावन के महीने में नाग देवता की पूजा करने और नाग पंचमी के दिन दूध पिलाने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं और नागदंश का भय नहीं रहता है। यह भी मान्यता है कि नागों की पूजा से अन्‍न-धन के भंडार भी भरे रहते हैं।सावन के महीने में नागपंचमी के दिन रुद्राभिषेक कराने का काफी महत्‍व है। भगवान शिव के आशीर्वाद स्वरूप नाग पृथ्वी को संतुलित करते हुए मानव जीवन की रक्षा करें, इस पर्व को मनाने की यह भी एक मान्‍यता है।

ओरिएंट 2018 में भाग लेंगे ईएनटी सर्जन डॉ. संजीव

गोवा में 3 से 5 अगस्त को कान, नाक, गला रोग पर आधारित राष्ट्रीय सेमिनार ओरिएंट 2018 में बिहार के ईएनटी सर्जन डॉ. संजीव कुमार भी हिस्सा लेंगे। इस सेमिनार में ईएनटी से जुड़ी समस्याओं और उसके इलाज की आधुनिक प्रक्रियाओं पर संबोधित करने के लिए डॉ. संजीव को आमंत्रित किया गया है। सेमिनार में चुनिंदा और दिग्गज ईएनटी सर्जनों को ही बोलने का मौका मिला है।ज्ञात हो की डॉ संजीव पटना जिला के मोकामा के रहने वाले हैं और मोकामा के रामकृष्ण रुद्रवती के छात्र रहे हैं.पटना में जानकी ENT अस्पताल चलते हैं.जबकि अपने पैतृक गावं मोकामा में भी मेडिकेम सिटी हॉस्पिटल चला रहे हैं जिसमे समय समय पर गरीबो का निशुल्क इलाज किया जाता है.

मोकामा के मंदिरों में उबड़ा सैलाब ,सावन की पहली सोमवारी

सोमवार को सावन माह के पहली सोमवारी को लेकर गंगा तट पर स्थित महादेव स्थान मे जलाभिषेक के लिए सुबह से ही आस्था का जनसैलाव उमड़ गया। बोलबम का नारा है बाबा एक सहारा है,हर हर महादेव के जयघोष से दिशाए गूंज उठीं। इस दौरान श्रद्धालुओ ने गंगा मे डुबकी लगाकर पवित्र शिवलिंग का जलाभिषेक कर मनौतिया मांगी। लोगों का कहना था कि सच्चे मन और श्रद्धा से बाबा का जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। तपस्वी स्थान,परशुराम स्थान,नारायणी घाट ,मालिया घाट,पाठक घाट ,पीपर तर , के मंदिरों पर सुबह से ही जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।शिवनार में प्राचीन नीलकंठ शिव मंदिर में सावन माह की प्रहली सोमवारी को हजारों लोगों ने भोलेनाथ का दर्शन किया और शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। गंगा में रात से ही लोगों ने स्नान करना शुरू कर दिया। सुबह में जैसे ही बाबा भोले का पट खुला ‘‘बोल बम’ के नारे के साथ जो दर्शन का सिलसिला शुरु हुआ वह देर शाम तक जारी रहा।

इस बीच कई अतिविशिष्ट लोगों ने भी जलाभिषेक किया।सावन के पहली सोमवारी मे शहर एवं ग्रामीण इलाके में शिव भक्तों का आस्था चरम पर देखने को मिला। हर जगह शिवमंदिरों में श्रद्धालूओं की हुजूम सी उमड़ पड़ी। पहली सोमवारी को लेकर जलाभिषेक करने को लेकर अहले सुबह से श्रद्धालुओं का आने का सिलसिला जारी था। मोकामा के बेटे मंजे कश्यप की आवाज़ में सुनिए सावन मे बाबा भोला को समर्पित ये गीत .

डॉ कलाम बहुत आप बहुत याद आयेंगे

मिट्टी से जन्मा एक व्यक्ति जिसे मिट्टी ने ही गढ़ा। समुद्र ने जिसे विशालता दी। बच्चों की मासूमियत ने भोलापन दिया। प्रकृति ने निश्छलता। संगीत और कविता ने संस्कार। ज्ञान ने गहराई। आसमान ने सपने दिए और पक्षियों नें परवाज़ अता की। और फिर इस तरह भारत में बना एक अद्भुत, अद्वितीय कलाम। एक ‘अग्नि-पुरूष’ जिसकी आग ने देश को शीतलता का अहसास दिया I एक लंबे अरसे तक अपनी ऊर्जा, ज्ञान और चमक बिखेरने के बाद वर्तमान भारत में बच्चों और युवाओं का आखिरी ‘रोल मॉडल’ भी चला गया। आकाश में बैठे अकेले, उदास ईश्वर को उसकी जीवंतता, सादगी, निश्छलता और उजली हंसी शायद बहुत भा गई। अब दूसरी दुनिया में लगा करेगी कलाम सर की क्लास !खिराज़, सर ! कभी मुलाक़ात हुई तो ईश्वर से ज़रूर पूछना कि एक अरसे से उसने आप जैसे प्यारे-प्यारे लोगों को भारत में भेजना क्यों बंद कर रखा है.(Dhruv Gupt)

जाने महादेव स्थान मोकामा वाले गंगाधर महादेव की कथा

जटाजूटमध्ये स्फुरद्गांगवारि,महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम्।।(वेदसारशिवस्तव:).अर्थात्–जिनके जटाजूट में श्रीगंगाजी खेल रही हैं, उन एकमात्र कामारि श्रीमहादेवजी का मैं स्मरण करता हूँ।पर्वतराज हिमालय की ज्येष्ठ कन्या हैमवती गंगा को मृत्युलोक में जाने का आदेश तो ब्रह्माजी ने दे दिया, पर गंगा के स्वर्ग से गिरने का वेग एक समस्या बनकर रह गई। ब्रह्माजी ने स्पष्ट कहा–’गंगा के गिरने का वेग पृथ्वी सहन नहीं कर सकेगी। केवल त्रिनेत्रधारी शंकर में ही इसके प्रचण्ड वेग को रोकने की क्षमता है।’आकाश से गिरती हुई गंगाजी को, जो स्वच्छ, सुन्दर एवं चंचल जलराशि से युक्त तथा ऊंची-ऊंची लहरों से उल्लसित होने के कारण भयंकर जान पड़ती थी, भगवान शिव ने फूलों की हिलती हुई सुन्दर माला की भांति सहसा ही अपने मस्तक पर धारण कर लिया। भगवान शंकर के सिर पर अपनी लहरों के साथ लहराती हुई गंगा आकाश से इस प्रकार अवतरित हो रही है, जैसे चन्द्रमा को निर्मल मृणालकन्द (कमल के डंठल के मध्य का रेशा) समझकर उसे पाने की इच्छा करती हुई और अपने पंखों को हिलाती-डुलाती हंसिनी आकाश से सरोवर में उतर रही हो। भगवान शंकर की अनुकम्पा ने पृथ्वी को गंगा जैसा अद्भुत उपहार प्रदान किया, उन औघड़दानी शिव की प्रशंसा में जितना कुछ कहा जाए, कम ही होगा।गंगा किनारे 108 गंगाधर शिव विराजमान हैं जिन्होंने गंगा के प्रचंड वेग को काबू किया.मोकामा के महादेव स्थान वाले शिव भी गंगाधर शिव हैं जो शिवलिंग में विराजते हैं,

भगवान शंकर का मंदिर महादेव स्थान मोकामा के दो टोलों के ठीक बिच में है .जी हाँ मोकामा के सकरवार और मोलदियार टोला का बोर्डर है . रामायण काल में जब राम भगवान अपने गुरुदेव के साथ माता सीता के स्वयम्बर में जा रहे थे तो इसी महादेव स्थान में उन्होंने विश्राम किया था राम ने महादेव की पूजा आराधना की थी .भगवान राम ने जब भी महादेव की पूजा की भगवान शंकर ने उनकी इच्छा पूरी की . भगवान राम ने मोकामा में महादेव की पूजा की थी और मंदिर में विश्राम किया था तब से ही इस जगह को मोकामा कहा जाने लगा ..एक जगह और भी जब भगवान राम ने महादेव को इसी रूप में पूजा था तो वंहा का नाम रामेश्वरम पड़ा .बड़ी पवित्र जगह है महादेव स्थान . एक समय में महादेव स्थान मोकामा का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र था .कलकत्ता ,बनारस ,बम्बई ,पटना आदि से लोग यंहा व्यापार करने आते थे . यंही पर गौरी माता का भी मंदिर है .कुमारी कन्यायें यंहा दोनों मंदिर में अपने लिए अछे पति की प्रार्थना करती है .और महादेव और माता गौरी की कृपा से उन्हें अपना मन पसंद जीवन साथी मिलता है .आइये सुनते है इस सावन अपने मोकामा के बेटे मंजय कश्यप की आवाज़ में गाया गया बाबा भोला का पावन गीत

रामरतन सिंह महाविद्यालय का स्थापना दिवस आज मनाया जाएगा

आज ही के दिन बाबु रामरतन सिंह ने अपने गावं समाज की शिक्षा की जरूरतों को ध्यान में रखकर मोकामा में अपने सेकड़ों एकड़ जमीन दान करके इस महाविद्यालय की स्थापना की थी.जब लोग किताब कॉपी से नाता भी नहीं रखते थे उस ज़माने में भी मोकामा के भविष्य की चिंता कर रहे लोगो ने अपने खून के एक एक बूंद से इस कॉलेज़ को सहेजा सवांरा ताकि आने वाली पीढ़िया समाज में कन्धा से कन्धा मिलकर आगे बढ़ सके.बुजुर्गो के इस देन को लोगो ने प्यार से नाम दिया बाबा कॉलेज़ जो मोकामा के दशा और दिशा को बदलने वाला साबित हुआ.बाद के कई दशको तक इस कॉलेज़ ने कई येसे येसे विद्यार्थी और प्रोफ़ेसर देखे जिन्होंने इस कॉलेज़ का नाम बुलंदियों तक पहुँचाया.डॉ बैद्यनाथ शर्मा ,डॉ राम नरेश शर्मा,के के नारायण,डॉ शिव नारायण शर्मा,डॉ श्रीकान्त शर्मा,संजीव कुमार ,राजेन्द्र प्रसाद सिंह जैसे प्रोफ़ेसर ने इस कॉलेज़ को मगध कॉलेज़ के सबसे मजबूत और सबसे प्रगतिशील कॉलेज़ में शामिल करवाया.संजीव कुमार बाद में बिहार में ही एम् एल सी निर्वाचित हुए और बहुत मंझे हुए नेता साबित हुए.यंहा के छात्रों ने पुरे भारत में प्रतिभा का परचम लहराया.चाहे वो कोई क्षेत्र हो ,राजनीती में श्याम सुन्दर सिंह धीरज ने वर्षों तक अपनी धाक बनाये रखी थी ,जबकि वर्तमान में कन्हैया कुमार ने अपने बोलने की अद्भुत शैली से भारत में अपनी एक नयी पहचान बनाई है.खेल के खेत्र में तो अगणित बच्चों ने अपना नाम कमाया है ,स्मिता कुमारी को कौन भूल सकता है जिसे देश ने गोल्डन गर्ल से नवाज़ा .समाज को हमेशा सहयोग करने वाले वेंकटेश नारायण सिंह जैसे विद्वान् बिभुतिओं को देने वाला जिसकी विद्वता की चर्चा खुद पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी भी किया करते थे .डॉ सुधांशु शेखर जैसे उभरते लेखक और कवी जिनकी किताब और उनका आकशवाणी पाठ कितना चर्चित रहा है.

आइये आज इस कार्यक्रम का हिस्सा बनके बाबा जी को याद करें.

बाबू रामरतन सिंह के सपनो पर कुठाराघात करता समाज

आजादी के तुरंत बाद ही अपने गावं के बेहतर समाज निर्माण के लिए बाबु रामरतन सिंह ने अपनी सेकड़ो एकड़ कीमती जमीन दान करके एक कॉलेज़ का निर्माण कराया.जब लोग किताब कॉपी से नाता भी नहीं रखते थे उस ज़माने में भी मोकामा के भविष्य की चिंता कर रहे लोगो ने अपने खून के एक एक बूंद से इस कॉलेज़ को सहेजा सवांरा ताकि आने वाली पीढ़िया समाज में कन्धा से कन्धा मिलकर आगे बढ़ सके.बुजुर्गो के इस देन को लोगो ने प्यार से नाम दिया बाबा कॉलेज़ जो मोकामा के दशा और दिशा को बदलने वाला साबित हुआ.बाद के कई दशको तक इस कॉलेज़ ने कई येसे येसे विद्यार्थी और प्रोफ़ेसर देखे जिन्होंने इस कॉलेज़ का नाम बुलंदियों तक पहुँचाया.डॉ बैद्यनाथ शर्मा ,डॉ राम नरेश शर्मा,के के नारायण,डॉ शिव नारायण शर्मा,डॉ श्रीकान्त शर्मा,संजीव कुमार ,राजेन्द्र प्रसाद सिंह जैसे प्रोफ़ेसर ने इस कॉलेज़ को मगध कॉलेज़ के सबसे मजबूत और सबसे प्रगतिशील कॉलेज़ में शामिल करवाया.संजीव कुमार बाद में बिहार में ही एम् एल सी निर्वाचित हुए और बहुत मंझे हुए नेता साबित हुए.यंहा के छात्रों ने पुरे भारत में प्रतिभा का परचम लहराया.चाहे वो कोई क्षेत्र हो ,राजनीती में श्याम सुन्दर सिंह धीरज ने वर्षों तक अपनी धाक बनाये रखी थी ,जबकि वर्तमान में कन्हैया कुमार ने अपने बोलने की अद्भुत शैली से भारत में अपनी एक नयी पहचान बनाई है.खेल के खेत्र में तो अगणित बच्चों ने अपना नाम कमाया है ,स्मिता कुमारी को कौन भूल सकता है जिसे देश ने गोल्डन गर्ल से नवाज़ा .समाज को हमेशा सहयोग करने वाले वेंकटेश नारायण सिंह जैसे विद्वान् बिभुतिओं को देने वाला जिसकी विद्वता की चर्चा खुद पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी भी किया करते थे .डॉ सुधांशु शेखर जैसे उभरते लेखक और कवी जिनकी किताब और उनका आकशवाणी पाठ कितना चर्चित रहा है.

पर आज की वर्तमान हालत बहुत बुरी हो गई है .जिस महाविद्यालय को बनाने में अपना सर्वोच्च देने से भी नहीं हिचके थे बाबा रामरतन सिंह आज कुछ पतित लोग उनकी समाधि से खिलवाड़ कर रहे है.कुछ प्रोफ़ेसर येसे है जिनका पढाई और ज्ञान से कोई मतलब नहीं दिखता .बस नौकरी करना है उनको, घर से ही हाजरी लगाई जा रही है .भारत के सोशल टायकून शरद सागर जब मोकामा आये थे तो उन्होंने कॉलेज़ देखने का मन बनाया,अपसोस इतने अच्छे वक्ता जिसको सुनने के लिए बराक ओबामा तक बेक़रार रहते है मगर कॉलेज़ का एक भी प्रोफ़ेसर और कर्मचारी उनकी अगवानी में बाहर तक नहीं आया ,हरिकांत सर सिर्फ साथ रहे जिससे थोरी बहुत इज्जत बच पाई.शरद ने खुद ही लोकल ग्रामीणों के साथ मिलकर बाबा जी की मूर्ति पर माल्यार्पण किया था.खुद ही विसिटिंग रजिस्टर लाये और उसपर अपने अनुभव लिखे.मगर प्राचार्य से लेकर कोई भी स्टाफ उनको एक भी गिलास पानी पूछने नहीं आया.क्या यंही था बाबा रामरतन सिंह का संस्कार ,येसा ही अतिथि सत्कार होता है उनके ज़माने में .प्रोफ़ेसर घर से ही हाजरी लगा कर सिर्फ खाना पूर्ति कर रहे है.बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है.कॉलेज़ प्रशाशन बाबा रामरतन सिंह की गरिमा के साथ एक गन्दा खेल खेलने में लगा है.आये दिन कॉलेज़ में मार पिटाई और गुंडागर्दी होते रहता है,कुछ स्थानीय शरारती बच्चे बाहर से आने वाले बच्चों के साथ मार पिटाई कर रहे है . कॉलेज़ प्रशाशन भी शरारती तत्वों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करता है.बाहरी छात्र मजबूरन घुट घुट कर इस कॉलेज़ से जुड़े हुए है.लड़किओं के साथ अभद्रता के साथ पेश आते कुछ बच्चे इस वजह से भी कुछ गार्जियन अपनी बेटिओं को कॉलेज़ भेजने से कतराने अलगे हैं.अफ़सोस तो इस बात का भी है की हमारे चुने हुए प्रतिनिधि भी मोकामा के एकमात्र धरोहर को तिल तिल ध्वस्त होता देख तो रहे है पर इसे बचाने के लिए कुछ कर नहीं रहे है. एम् एल सी नीरज कुमार,सांसद वीना देवी,विधायक अनंत कुमार के साथ साथ डॉ राम सागर सिंह और ललन सिंह जैसे क्षेत्रीय नेता भी चुप चाप है.पर याद रखिये ये अपमान सिर्फ बाबा रामरतन सिंह का नहीं है इस कॉलेज़ और मोकामा से जुड़े हर आदमी का है,आप सब जन प्रतिनिधिओं का भी है.p>

अभी बहुत कुछ नहीं बिगड़ा है आइये मोकामा के एकमात्र धरोहर को बचाने में सब मिलकर प्रयास करें,अपने पूर्वजों को अपमानित करने वाले कारकों को चिन्हित कर उसे बदके को और मौका दें राम रतन बाबु को स्वर्ग से ही अपने धरोहर को देखकर मुस्कुराने का .आइये आप सभी मोकामा वासियों से अनुरोध करता हूँ की आपसी राजनीती और भेद भाव को भुला कर बाबा जी के इस अमूल्य धरोहर को बर्बाद होने से बचा लें.जैसे नाजरथ अस्पताल बंद हो गया ,मोकामा की सारी फेक्ट्री बंद हो गई अगर ये भी बंद हो गया तो आने वाली पीढ़िया हमें कभी माफ़ नहीं करेगी .अभी वक्त है बचा लीजिये राम रतन बाबा की इस समाधी को नहीं तो पूर्वजों का भी शाप लगेगा .

20 साल बाद भी क्यों एक शादी कार्ड सोशल मिडिया पर वायरल है

दाल अरहर है, घी अहगर है.किसी की शादी है इसका पता निमंत्रण पत्र से चलता है लेकिन कुछ निमंत्रण पत्र खास होते हैं, मानो कोई पांडुलिपि हो – एकदम सदियों तक संभालकर रखा जाने वाला। हर किसी की चाहत रहती है कि हमारी ‘शादी’ यादगार बने। शादी में जब मेहमान आएं तो व्यवस्थाएं देखकर दंग रह जाएं। हम भारतीय अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए क्या कुछ नहीं करते हैं। अपने बच्चों की शादी के लिए माता-पिता अपने जीवन की सारी पूंजी तक न्यौछावर कर देते हैं। एक से बढ़कर एक खाने की आइटम, शादी की सजावट, गहने-कपड़े और खासकर शादी का निमंत्रण पत्र। हर कोई चाहता है कि उसकी शादी का निमंत्रण पत्र कुछ खास हो, कुछ अलग हो और इसके लिए कुछ लोग एक्सपेरिमेंट करने से भी गुरेज नहीं करते। निमंत्रण पत्र की खूबी यह भी है कि इसमें वैवाहिक कार्यक्रमों के अलावा विभिन्न सामाजिक संदेशों के जरिए समाज को जगाने की कोशिश की जाए। अपनी परंपरा और लोक संस्कृति की झलक हो। निमंत्रण पत्र पढते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाए, मन मचलने लगे कि इस विवाह समारोह में तो जरुर जाना है।

ऐसा ही एक निमंत्रण पत्र इन दिनों मेरे गांव ‘मोकामा’ में चर्चा का विषय बना हुआ है। वह भी 19 वर्ष पूर्व हुई शादी का निमंत्रण पत्र।इस निमंत्रण पत्र में न कहीं गणेश की प्रतिमा है और ना ही ‘मंगलम भगवान विष्णु’ जैसे मंत्र बल्कि इसमें मंत्र के कामायनी की पंक्‍तियां उद्धृत हैं और गणेश की जगह अजंता की प्रस्तर प्रतिमा। और भी बहुत कुछ जो आपको अचंभित करेगा। वर्ष-1999 शरत सांकृत्यान की शादी थी तो उनके पिताजी डॉ (प्रो.) जर्नादन प्रसाद सिंह ने बेटे के विवाह का निमंत्रण पत्र ऐसा छपवाया कि आज तक उसकी चर्चा है। कुछ विशेषताओं पर गौर करें – जहां ‘मंगलम भगवान विष्णु’ जैसा मंत्र लिखा जाता है वहां उन्होंने कामायनी की पंक्‍ति ‘सत्य ही रहता नहीं यह ज्ञान-तुम कविता, कुसुम या कामिनी हो।’ इन पंक्‍तियों के ऊपर अजंता की प्रस्तर प्रतिमा जो आप संलग्‍न फोटो से देखकर समझ सकते हैं। इसी प्रकार आगे के पन्‍नों पर है – बारात सजेगी, बाजे बजेंगे, द्वाराचार होगा, गलसेंकी होगी, विविध मिष्ठान, शरबत-ठंडई, पान सुपारी से स्वागत का आयोजन है-इत्र, फाहे गमकेंगे-हास्य विलास होगा। रात्रि में मृगशिरा नक्षत्र में कन्यादान होगा, तदुपरांत सिन्दूरदान-सप्‍तपदी होगी। अठंगर कुटाएगा, कमरखोलाई होगी, खिरखिलायी होगी। इस बारात में शामिल होने वाले बारातियों को बताया गया है कि खाने में क्या होगा। हमारे बिहार में पहले विवाह के बाद वाले दिन बारात पक्ष को लड़की वाले भात खिलाते थे, अब यह परंपरा न के बराबर है। तो निमंत्रण पत्र में लिखा गया है -दोपहर में भातखय है,भात गमकउआ है,दाल अरहर है,घी अहगर है,विदुर का शाक है,छान्दस परिपाक है, मुक्‍त दधिलेप है,सूचना संक्षेप है ,भांड़ी और गाली सब है….

डॉ जेपी सिंह यह भी जानते हैं कि इस विवाह के पश्‍चात जो अगली पीढी आएगी वह भी अपना रोशन करेगी। इसलिए वे लिखते हैं। अवश्य ही इनका दामपत्य असाधारण होगा,काव्यात्म होगा,दिव्य से दिव्यतर होगा,लोक कल्याणकारी एवं लोकार्पित होगा,इनकी सन्ततियां करेंगी स्वयं को प्रमाणित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्यों में। तो अगली बार जब आप भी कोई निमंत्रण पत्र छपवाएं तो कुछ अलग करें जैसा हमारे मोकामा वाले डॉ जेपी सिंह जी ने अपने शरत की शादी पर किया था।

शरद संवाद बना मोकामावासियों के लिए नजीर

मोकामा। यूथ आइकॉन शरद सागर का प्रेरणादायक संवाद कार्यक्रम मोकामा क्षेत्र के लोगों के लिए नजीर बन गया। मोकामा के शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग शरद सागर के कार्यक्रम की खुले दिल से प्रशंसा कर रहे हैं। मोकामा के शिक्षक पारस कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, आज शरद सागर जी के आगमन से बच्चों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। शरद सागर ने विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान किया और जीवन के हर एक मौके को सफल कैसे बनाया जाए इसके बारे में जानकारी दी । बच्चे उनकी बातों से काफी उत्साहित थे। इस प्रकार के कार्यक्रम होने से विद्यार्थियों को बल मिलता है और मानसिक रूप से आगे बढ़ने को तैयार होंगे। इस प्रकार के कार्यक्रम मोकामा में हमेशा होते रहने चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ रामसागर सिंह ने कहा, शरद सागर जी का कार्यक्रम अत्यंत प्रशंसनीय रहा। ऐसे आयोजन होते रहने चाहिए ताकि समाज में सकारात्मकता का प्रभाव बढ़े। सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए आयोजकों विशेष कर युवा अधिवक्ता कुमार शानू का आभार जताया जिनकी वजह से मोकामा के युवाओं को शरद सागर जैसे ओजस्वी वक्ता को सुनने का अवसर मिला।