प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता थे विश्वनाथ बाबू!

प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता थे विश्वनाथ बाबू!

मोकामा (एसएनबी)। स्वतन्त्रता सेनानी और सामाजिक कार्यकर्ता विश्वनाथ शर्मा का मंगलवार को निधन हो गया। विश्वनाथ शर्मा स्वतन्त्रता सेनानी भी थे और आजादी के बाद शिक्षक के तौर पर कार्यरत थे। नब्बे साल से अधिक उम्र होने पर भी विश्वनाथ

पुण्य स्मरण सह श्रद्धासमर्पण समारोह संपन्न

पुण्य स्मरण सह श्रद्धासमर्पण समारोह संपन्न

मोकामा। स्व. युगल किशोर सिंह उर्फ डायरेक्टर साहब का श्रद्धांजलि समारोह 19 जनवरी को श्री सिंह के ज्येष्ठ पौत्र अजय कुमार के निवास परिसर ‘सुधा सदन’, तपोवन पथ में आयोजित किया गया। डायरेक्टर साहब बीसवीं सदी के मध्यकाल में साहित्यिक

अर्जुन सिंह: एक जीवित किंवदंती/Arjun Singh: A Living Legend

अर्जुन सिंह: एक जीवित किंवदंती/Arjun Singh: A Living Legend

मोकामा के शेरपुर गांव में आपका जन्म हुआ।  जीवन के नौ दशक देख चुके श्री अर्जुन सिंह ने बिहार सरकार में जूनियर इंजीनियर के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की थी  और वर्ष 1983 में इंजीनियर इन चीफ के रूप में सर्वोच्च

एक था कीसा!

एक था कीसा!

एक था कीसा;- कीसा मतलब कृष्ण सा ..थोरा नटखट थोरा शर्मीला,वैसे तो उसका पूरा नाम कृष्णकांत शर्मा था पर उसके कर्मों के कारन लोग उसे किसान सिंह तो कोई एम्बुलेंस बुलाता था मगर वो कीसा के नाम से ही जाना

स्व: श्री राम नन्दन सिंह(धरित्री )

स्व: श्री राम नन्दन  सिंह ,एक इंसान जो जबतक जिया उसकी समाज को बेहतर बनाने की ललक हमेशा  जवान रही.साधारण कद काठी मगर आकर्षक वक्तितव आपकी  खासियत थी .जिधर से आप  गुजर जाते थे. परनाम सर परनाम सर कहने वालो

धारित्री- मोकामा कि धरती इतराती हो!

धारित्री- मोकामा कि धरती इतराती हो!

मोकामा प्रणाम, जैसा की विदित है की मोकाम ऑनलाइन अपनी संस्कृति और सामाजिक धरोहर को बचाने के लिए अपना योगदान कर रहा है .जिसका छोटा सा उदहारण शहीद द्वार जो शहीद प्रफुल्ला चाकी के बलिदान की कहानी कहता है का

आचार्य राजेंद्र प्रसाद सिंह!

आचार्य राजेंद्र प्रसाद सिंह!

आचार्य राजेंद्र प्रसाद सिंह:-मोकामा से २ किलोमीटर दूर पंचमहला गावं में एक किसान के घर 04 मई 1941 को एक बालक का जन्म हुआ.बचपन से ही पढने में महारत हासिल.जब भी देखो वो किताबों की दुनिया में खोया रहता .माँ

डॉ. मंजय कश्यप…होनहार विरवान के होत चिकने पात!

डॉ. मंजय कश्यप…होनहार विरवान के होत चिकने पात!

डॉ. मंजय कश्यप…होनहार विरवान के होत चिकने पात , यह कथन अक्षरश सही होती है डॉ. मंजय कश्यप जी पर,अपने वल्य्काल से ही अपने मित्रों के बीच एक गायक के रूप में मशहूर रहे थे,भोजपुरी मैथिलि मगही आदि गीतों को

श्री चंद्रशेखर प्रसाद सिंह उर्फ़ चंद्रशेखर बाबू!

श्री चंद्रशेखर प्रसाद सिंह उर्फ़ चंद्रशेखर बाबू!

धारित्री में आज जानेंगे मोकामा के वीर सपूत श्री चंद्रशेखर प्रसाद सिंह उर्फ़ चंद्रशेखर बाबू को चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊं चाह नहीं प्रेमी माला में बिंध प्यारी को ललचाऊं चाह नहीं सम्राटों के सिर पर हे हरि !

आनंद शंकर!

आनंद शंकर!

१ मार्च १९५० का दिन  मोकामा के मोलदियार टोला के  एक मध्यमवर्गीय परिवार मैं किलकारियां गूंजी एक बालक का जन्म हुआ.माता पिता सहित पुरे मोहेल्ले ने पुत्र  होने की ख़ुशी मैं मंगल गीत गाये.लड़के को देखने भर से दिल मैं