कठिन परिस्थितियों में भी हार न माने:-डॉ अब्दुल कलाम

डॉ कलाम जी के जीवन से यह बात जरुर सिखनी चाहिए की कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानना चाहिए और डटकर मुकाबला करना चाहिए | जीवन आसान नहीं है और कदम कदम पर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है लेकिन अपने साहस से उन चुनौतियों से डरकर घबराने की बजाय लड़कर सफलता का मार्ग ढूंढना चाहिए |भारत के 11वें राष्ट्रपति का जन्म रामेश्वरम के एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ थे तथा एक टूटी नौका के सहारे घर का खर्च चलता था और बचपन में पिताजी और परिवार की मदद करने के लिए अख़बार भी बेचना पड़ा था | लेकिन अपनी कड़ी मेहनत,कठिनाइयों से हार न मानने की प्रवृत्ति ,जुझारू स्वभाव तथा हर मुश्किल का साहसिक तरीके से मुकाबला करने की वजह से उन्होंने बड़ी बड़ी उपलब्धियां हासिल की और देश के राष्ट्रपति बने |

डॉ कलाम जी से यह बात अवश्य सीखनी चाहिए की कितनी भी रुकावटें आये लेकिन हमें अपने ख्वाबों का पीछा नहीं छोड़ना चाहिए और उन्हें पूरा करने की भरपूर कोशिश अवश्य करनी चाहिए | कलाम जी का ऐसा मानना था की अगर कोई अपने सपनो को पूरा करने के लिए जी जान से मेहनत करता है और अपने सपनों को पूरा करने में पूर्ण विश्वास रखता है तो कोई भी चुनौती और कठिनाई उसे उसको मंजिल तक पहुँचने से नहीं रोक सकती | उन्होंने ये साबित कर दिया की एक गरीब परिवार का बच्चा अपनी कड़ी मेहनत और जुझारू स्वरुप के चलते ISRO का डायरेक्टर और भारत का राष्ट्रपति बन सकता है |आई.ए.एस. पंकज कुमार को कलाम सेण्टर ने सम्मानित किए विडियो देखिये


2020 तक भारत को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए काम कर रहा हूं.कलाम

डॉ अब्दुल कलाम के सपने को सच करने की दिशा में हम भी एक कदम उठायें.2020 तक भारत को एक विकसित देश बनाने में अपना सर्वश्रेठ दें.हम जो भी हैं उन्नति के शिकाह्र को चुने की कोशिश करें तभी हमारा देश भी उन्नति करेगा.भारत के 11वें राष्ट्रपति अबुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम यानी कि एपीजे अब्दुल कलाम साल 2002 में राष्ट्रपति चुने गए थे. 15 अक्टूबर 1931 को हुआ और वह 27 जुलाई 2015 को गुजर गए. मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के नाम से जाना जाता है. बच्चों के बीच ही नहीं बल्कि समस्त देशवासियों के बीच प्रख्यात डॉक्टर कलाम जाने माने वैज्ञानिक थे. उनके प्रेरक बोल आज भी लोगों के जीवन में बड़ी प्रेरणा के तौर पर आते हैं. एक मछुआरे के बेटे का दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का राष्ट्रपति बन जाना यूं ही नहीं हुआ होगा, इसलिए लिए अथक परिश्रम और पॉजिटिव सोच रही होगी जिसे उन्होंने पग पग पर जीवन में उतारा.

आइए आज उनकी पुण्यतिथि पर उनके महान विचारों से रूबरू हों : 1.सपने तभी सच होते हैं, जब हम सपने देखना शुरू करते हैं.२.सबके जीवन में दुख आते हैं, बस इन दुखों में सबके धैर्य की परीक्षा ली जाती है.३,जीवन में सुख का अनुभव तभी प्राप्त होता है जब इन सुखों को कठिनाईओं से प्राप्त किया जाता है.४.शिखर तक पहुंचने के लिए ताकत चाहिए होती है, चाहे वह माउन्ट एवरेस्ट का शिखर हो या कोई दूसरा लक्ष्य.५.अगर हम अपने सफलता के रास्ते पर निराशा हाथ लगती है इसका मतलब यह नहीं है कि हम कोशिश करना छोड़ दें क्योंकि हर निराशा और असफलता के पीछे ही सफलता छिपी होती है.6.सपने हमारे तभी तभी सच हो सकते हैं, जब सपनों को पूरा करने के लिए अपनी नींद तक का त्याग कर दें.

डॉ अब्दुल कलाम को समर्पित सप्ताह

27 जुलाई 2015 को IIM शिलांग में युवाओ को संबोधन के दौरान ही डॉ अब्दुल कलाम का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था.देश के लिए जो प्यार अब्दुल कलाम के दिल में था बहुत कम लोगो में होता है.युवाओं के प्रेरणा डॉ कलाम आज हमारे बीच नहीं है पर उनके दिखाए राह पर चलकर हम भारत को एक नयी दिशा दे सकते है .25 जुलाई 2002 को डॉ अब्दुल कलाम भारत के 11वे राष्ट्रपति बने .27 जुलाई 2015 को उनका निधन हुआ था.28 जुलाई को उनके पार्थिव शरीर को हवाई जहाज के जरिये दिल्ली ले जाया गया. दिल्ली से उनके शरीर को उनके घर उनके शहर रामेश्वरम ले जाया गया। रामेश्रवम में उनके शरीर को जनता के देखने के लिए खुले में रखा गया . जहां जनता ने अपने राष्ट्रपति को अंतिम बिदाई दी.30 जुलाई को जनता के राष्ट्रपति के मृत शरीर को पूर्ण सम्मान के साथ दफनाया गया.इसलिए मोकामा ऑनलाइन ये पूरा सप्ताह समर्पित करता है देश के सबसे बड़े महापुरुषों में से एक डॉ अब्दुल कलाम के नाम .आइये हमसब मिलकर डॉ अब्दुल कलाम को सच्ची श्रद्धांजलि.आजसे लेकर 27 जुलाई तक याद कीजिये डॉ कलाम को और बताइए देश को मोकामा कैसा जगह है , किसकी आराधना करता है.

मोकामा के हर व्यक्ति से अनुरोध है की इस सप्ताह कमसेकम एक बार डॉ अब्दुल कलाम को याद करें और उनके बताएं रस्ते पर चलने की कोशिश भी करे. हर शिक्षण संस्थान डॉ अब्दुल कलाम पर एक छोटा सा ही सही कार्यकर्म जरुर करें, बच्चों को उनके बारे में बताएं.घर के गार्जियन से अनुरोध है की वो अभी अपने घर के बच्चों को डॉ अब्दुल कलाम के बारे में बताएं.दूकानदार भाइयों से अनुरोध की अपने दुकान पर डॉ अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि मनाएं अपने ग्राहक से भी डॉ अब्दुल कलाम की चर्चा जरुर करें.आप जिस भी तरह से डॉ अब्दुल कलाम को याद करें ,चाहे वो कोई गोष्ठी हो ,परिचर्चा हो या कोई कार्यकर्म हो उसकी तस्वीर और विडियो हमें भेजिए ताकि उन्हें ऑनलाइन पर अपलोड जा सके और बाहर के लोग भी जान पाए.आप अपना फोटो,विडियो हमे 9990436770 पर भेजिए.मोकामा ऑनलाइन पुरे सप्ताह डॉ अब्दुल कलाम के बारे में पोस्ट करेगा ,पढाई और शिक्षा की बात होगी. इस सीरिज में सबसे पहला विडिओ निचे देखिये.


मोकामा को नया मुकाम दे रहे हैं पुस्तकालय

पुस्तकालयों से बदल रही है मोकामा की तस्वीर.बदलाव की बयार बह रही है मोकामा में.हर गली मोहल्ले में जहां दिखता पुस्तकालय है.हम नई इबारत लिखने की राह पर हैं.हमारे युवा अपने हौसले से नई राह बनाने को हैं।विद्यार्थी हिन्दी पुस्तकालय ने मोकामा में दशकों पूर्व शिक्षा की नई अलख जगाई। आज उसी राह पर चलते हुए मोकामा के हर मोहल्ले में कई पुस्तकालय संचालित हैं। इन पुस्तकालयों में सैकड़ों बच्चे हर दिन सामुहिक रूप से पढ़ते हैं और कई प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। पिछले कुछ सालों में हर पुस्तकालय से करीब 80 फीसदी बच्चे सफल रहे हैं और उन्होंने कई सरकारी नौकरी हासिल की है। ऐसा ही है मोलदियार टोला का स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय जो आज युवाओं को नई प्रेरणा दे रहा है। हर दिन कई बच्चे यहां पढ़ने आते हैं। हमारे गांव की बदलती तस्वीर की पहचान हैं ये पुस्तकालय ।

प्रखंड स्तरीय मेधा जाँच प्रतियोगिता 22 जुलाई को आयोजित

प्रखंड के बच्चों के लिए प्रखंड स्तरीय मेधा जाँच प्रतियोगिता करवाई जा रही है .इस प्रतियोगिता के माध्यम से संस्थान प्रतिस्पर्धा के इस दौर में क्षेत्र के बच्चो के शिक्षा एवं कार्यशेली जे स्तर को देश के बिभिन्न प्रतियोगिता के शिखर तक पहुचाना चाहती है.मेघा जाँच परीक्षा ,विज्ञान प्रदर्शनी ,चित्रांकन के द्वारा उन्हें आगे बढने में सहायता दी जाएगी.ये आयोजन पाटलिपुत्र जन संसथान हथिदह मोकामा के सौजन्य से आयोजित हो रहा है.प्रतियोगिता शुल्क 20 रूपये है .60 नंबर का परीक्षा होगा जो ओ.एम्.आर. शीट पर लिया जायेगा.इस परीक्षा मैं गणित,समान्य ज्ञान,विज्ञान,हिंदी,अंग्रेजी और रीजनिंग के प्रश्न पूछे जायेंगे .4 नंबर सही सवाल पर जबकि -1 गलत जवाब पर मिलेंगे .1 घंटे की परीक्षा होगी ,22 जुलाई 10 से 11 बजे दिन .4 ग्रुप मैं बच्चे होने.वर्ग 5 और 6 के लिए अलग ग्रुप होगा जिसका नाम चाकी होगा(शहीद प्रफुल्ला चन्द्र चाकी के सम्मान में),वर्ग 7 और 8 के लिए अलग ग्रुप जिसका नाम राजेन्द्र होगा (डॉ राजेन्द्र प्रसाद ),वर्ग 9 और 10 का अलग ग्रुप जिसका नाम दिनकर होगा(रामधारी सिंह दिनकर),जबकि वर्ग १० से आगे के सभी बच्चे जिनकी उम्र 18(01/01/18) से कम हो कृष्णा ग्रुप मैं होंगे(रामकृष्ण सिंह स्वतंत्रा सेनानी).

हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यम से परीक्षा देने की व्यवस्था है.स्थान पाटलिपुत्र जन संसथान हथिदह मोकामा एन. एच. 31 ,तारा उच्च विद्यालय के नजदीक .विशेष आप निचे दिए नंबर पर संपर्क कर सकते है.9097456347(Pravin Kumar),8873772297(Arvind Kumar).सभी बच्चों को इस प्रतियोगिता मैं भाग लेने पर शुभकामना आप सफल हों.

हिमा दास ने मोकामा के बच्चो को भी उत्साहित किया,खूब खेल रहे बच्चे

असम के एक छोटे से गांव की सांवली छरहरी सी लड़की जब दौड़ी तो एक मिनट से भी कम समय में विश्व एथलेटिक्स के नक्शे पर भारत के नाम की पहली सुनहरी मोहर लगा दी। अपने कारनामे का एहसास होते ही गले में असमी गमछा और कंधों पर तिरंगा लपेट लिया। विजेता मंच पर पहुंची तो राष्ट्रगान बजते ही उसकी निगाहें अपलक राष्ट्रीय ध्वज का निहारती रहीं और आंखों से आंसू बह निकले।रातोंरात देश की सनसनी बनी 18 बरस की हिमा दास, जिसने फिनलैंड के तांपेरे में आयोजित आईएएएफ विश्व अंडर 20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर स्पर्धा के फाइनल में 51.46 सेकंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता।यह ट्रैक स्पर्धा में भारत की पहली स्वर्णिम सफलता है। हिमा की जीत पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, खेल मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौर और क्रिकेट तथा बॉलीवुड की दुनिया के बहुत से लोगों ने उन्हें बधाई दी और उन्हें देश का गौरव बताया। देश को यह अद्भुत सम्मान दिलाने वाली हिमा की सफलता की कहानी कोई बहुत पुरानी नहीं है। पिछले कुछ ही समय में वह आंधी की तरह उठी और स्वर्ण पदक ले उड़ी।

हिमा दास की इस कामयाबी ने न पुरे देश के बच्चों को एक नई दिशा दी है बल्कि मोकामा जैसे संसाधन विहीन क्षेत्र में भी एक जादुई बिगुल फूंक दिया है .सैकड़ो बच्चे अब खेल मैं भी जान की बजी लगाने को तैयार हैं.इन बच्चों को द्रोणाचार्य के रूप में मोकामा के ही पुराने मगर धुरंधर खिलाडी रहे ललन दा का खूब साथ मिल रहा है .ललन दा अपने जमाने के हरफन मौला खिलाडी रहे है,क्रिकेट के तो वो पहुचे हुए खिलाडी थे मगर हर खेल में उनका कोई मुकाबला नहीं था.आज ललन दा गावं के बच्चो को कब्बडी के दावं पेंच सिखा रहे थे. उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा की खूब खेलो और खूब पढो,जीवन में कुछ भी मुश्किल नही जो चाहे वो कर सकते हो ,असंभव की सीमा से परे नीला उन्मुक्त सफलता का आकाश हाँथ फैलाये तुम्हारा इन्तजार कर रहा है .उठो छलांग मारके छु लो सफलता का सुनहरा आकाश .मोकामा चौक पर चन्दन सर के नेत्रित्व में 100 बच्चों का एक लिखित परीक्षा का आयोजन हुआ जिसमे चयनित छात्रों को भी ललन दा के द्वारा पुरुस्कृत किया गया .पुरुस्कृत किये जाने वाले बच्चे में अमन,आशीष,ध्रुव,ॐ सुन्दरम,तरुण,अमन कुमार,सतीश,शिवम,प्रशांत,बादल आदि शामिल थे .

मोकामा के शान, कुमार शानू ने बढ़ाया बिहार का मान

मोकामा सहित पूरे देश के युवाओं के प्रेरणास्रोत और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता तथा सामाजिक कार्यकर्ता कुमार शानू को उनकी उपलब्धियों के लिए 8 जुलाई को नई दिल्ली में बिहार प्रतिभा सम्मान प्रदान किया गया।केंद्रीय मंत्री एस.एस. अहलुवालिया ने कुमार शानू को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया और अमेरिका में आगे की पढ़ाई करने जा रहे कुमार शानू को उज्ज्वल भविष्य की बधाई दी।समारोह के संयोजक ब्रजेश कुमार ने बताया की “बिहार के कोने कोने से प्रतिभा संपन्न युवको का चयन किया गया है.जिन्होंने समाज को बेहतर बनाने में अपना योगदान दिया है.चाहे वो सिविल सर्विस में चयनित युवा हों,समाज को नयी दिशा देने वाले युवा हों,या वक्तिगत जीवन में बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाले युवा.”मोकामा के कुमार शानू का चयन उसके समाज में किये जाने वाले बेहतरीन कार्यों के लिए किया गया है.सीबीएसई के खिलाफ साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट में मिली जीत में शानू की अहम् भूमिका थी ,इस अधिकार से 50 लाख बच्चे ने फायदा लिया है. शानू ने अभी कुछ दिन पहले भी अपने पैतृक गावं मोकामा में 30 लोगो की टीम तैयार की है जो RTI के माध्यम से मोकामा के समाजिक व्यवस्था को मजबूत करेंगे . शानू के इन्ही सब सामाजिक कार्यों को देखते हुए उन्हें चुना गया है.फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी में शानू का चयन हुआ है,इसके लिए बिहार प्रतिभा सम्मान टीम उन्हें बधाई देता है वो जीवन में यूँ ही आगे बढ़ते रहे और समाज को बेहतर बनाने मैं अपना योगदान देते रहें”.

एक परिचय:-पटना सेंट पॉल के स्टूडेंट कुमार शानू ने बिहार का नाम पूरी दुनिया में रौशन कर दिया है। उनका सेलेक्शन अमेरिका के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में लॉ की पढ़ाई के लिए हुआ है। अपने बचपन को याद करते हुए वह कहते हैं 90 के दशक में जब मेरा जन्म मोकामा में हुआ था उस वक्त वहां क्राइम रेट बहुत ज्यादा था इसीलिए मेरी मम्मी हम तीनों भाई-बहनों को लेकर पटना आ गई। यहां हम किराए के घर में रहने लगे। मेरा एडमिशन सेंट पॉल स्कूल दीघा में कराया गया। दसवीं तक मैंने यहीं से पढ़ाई की। लोयला स्कूल से मैंने बारहवीं तक की पढ़ाई की। यह कहते-कहते कुमार शानू थोड़े गंभीर हो जाते हैं। वह आगे कहते हैं मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन मैंं अमेरिका के इतने प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करूंगा। वह कहते हैं यह एक ऐसा ख्वाब था जिसे साकार करने में शरद सागर के डेक्स स्कूल ने मेरी मदद की। फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी में शानू का हुआ सेलेक्शन.अमेरिका के इस कॉलेज में एलएलएम प्रोग्राम की पढ़ाई के लिए दुनियाभर से सिर्फ पंद्रह स्टूडेंट को चुना जाता है। 25 साल के कुमार शानू इन्हीं कुछ खुशनसीब स्टूडेंट में से एक हैं। उन्हें यूनिवर्सिटी की ओर से 20 हजार डॉलर स्कॉलरशिप भी दी गई है। 90 के दशक में मोकामा में जन्मे पर क्राइम रेट ऐसा था कि परिवार पटना आ गया, लोएला स्कूल से 12 वीं तक पढ़ाई की .दादाजी से मिली दूसरों की सेवा करने की प्रेरणा .कुमार शानू अपने दादाजी से बेहद प्रभावित हैं। उनकी जिंदगी पर दादाजी का बहुत गहरा असर रहा है। अपने दादाजी के बारे में बातें करते हुए शानू गर्व से भर उठते हैं। वह कहते हैं मेरे दादाजी सरकारी शिक्षक थे लेकिन वह सैलरी नहीं लेते थे। हम संपन्न किसान परिवार से आते थे इसीलिए किसी तरह की आर्थिक परेशानी नहीं थी। दादाजी का मानना था कि सक्षम लोगों को बढ़-चढ़ कर समाज की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने हमें जो जीवन मूूल्य दिए वो जीवन के अबतक के हर पड़ाव पर मेरे काम आया। मुझे मेरे पिताजी से भी सीखने को काफी कुछ मिला। मां ने अपराध के कारण समाज के युवाओं का पतन होते देखा था। वो बताते हैं कि मां दूरदर्शी थी वो जानती थी कि यह माहौल हमारे मन पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा। इसलिए वो हमें लेकर पटना आ गईं। उनकी सोच का आज सकारात्मक परिणाम निकला है। मां भी मेरी सफलता से काफी खुश हैं और पिताजी भी।?

सीबीएसई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मिली जीत बड़ी सफलता .सीबीएसई के खिलाफ साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट में मिली जीत ने कुमार शानू का हौसला बढ़ाया। वह कहते हैं पहली बार सूचना के अधिकार के तहत 50 लाख स्टूडेंट को जांची हुई उत्तरपुस्तिका देखने को मिली। इस जीत ने मुझे लोगों के लिए काम करने का हौसला दिया। पढ़ाई पूरी कर लौटूंगा तो बिहार की हर संभव मदद करूंगा .कुमार शानू कहते हैं कि मैं बिहार में ज्यूडिशियल सिस्टम को स्ट्रांग करना चाहता हूं। जब तक यह नहीं होगा बाहर से इन्वेस्टर यहां नहीं आएंगे और राज्य का विकास नहीं होगा। वह कहते हैं पढ़ाई पूरी करके वापस आने के बाद मैं वहां के अनुभवों से राज्य की पूरी मदद करने की कोशिश करूंगा। पढ़ाई के लिए किया था दिल्ली का रुख.कुमार शानू कहते हैं मैं ऐसा करना चाहता था जिससे दूसरों की मदद कर सकूं । इसलिए लॉ करने की ठानी। नोएडा के एमिटी लॉ स्कूल से डिग्री लेने के दौरान पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया अल्तमस कबीर से मिला। उनसे मिलने के बाद मैंने लोगों को सोशल इश्यू पर अवेयर करने की ठानी। दोस्तों के साथ मिलकर मैंने राइट टू एजुकेशन एक्ट से कई बच्चों का एडमिशन बड़े स्कूलों में करवाया।

शरद सागर ने किया दो दिवसीय मोकामा दौरा,बच्चों संग की बात

जुलाई 5, 2018,मोकामा के ऐतिसाहिक स्थलों पर किया हज़ारों युवाओं का सम्बोधन, राष्ट्रकवि दिनकर के स्कूल जाकर भी किया छात्रों को सम्बोधित .भारतीय युवा आइकॉन और विश्व प्रसिद्द युवा उद्यमी श्री शरद सागर ने किया दो दिवसीय मोकामा दौरा। 4 और 5 जुलाई के दौरे की शुरुआत श्री शरद सागर ने मोकामा से लखीसराय जाकर एक सरकारी स्कूल में सैंकड़ों बच्चों से बातचीत कर की। शरद सागर ने विश्व प्रसिद्द मोकामा टाल का भी भ्रमण किया। मोकामा टाल को दाल के कटोरे के नाम से जाना जाता है। मोकामा टाउनहॉल में किया 600 से भी ज़्यादा बच्चों को सम्बोधित.5 जुलाई सुबह 10 से 12 शरद सागर ने मोकामा के ऐतिहासिक टाउनहॉल में लगभग 10 स्कूलों से आये 600 से अभी अधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को किया सम्बोधित। अपने भाषण में श्री शरद सागर ने कहा – “मेरा जीवन दिनकर की कविताओं से प्रेरित रहा है और दिनकर का जीवन और उनकी कविताएं इसी मोकामा से प्रेरित रही हैं। इसलिए मेरा मोकामा आना सम्मान की बात है। हमें ज़रूरत हैं की मोकामा से हम भारत के लिए अगला नेतृत्व तैयार करें। हमने अपने बच्चों को नेतृत्व से दूर रखा है। आज हमें ज़रूरत है की हम शिक्षा और नेतृत्व को जोड़ें ताकि देश के अगले डॉक्टर, चिकित्सक, अभियंता और राजनेता मोकामा जैसे छोटे शहरों से आएं।”

टाउनहॉल में श्री शरद सागर के साथ मोकामा के ही रहने वाले श्री कुमार शानू थे। श्री कुमार शानू एक सामाजिक कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हैं जिन्होंने अपारदर्शिता को बढ़ावा देते सुस्त सरकारी विभागों के खिलाफ कई मुक़दमे लड़े हैं। शानू ने सीबीएसई के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक मुकदमा भी जीता जिसके बाद सीबीएसई भी सूचना का अधिकार क़ानून के अंतर्गत आता है। टाउनहॉल में आपन बिहार के संस्थापक अविनाश कुमार भी मौजूद थे। टाउन हॉल के बाद श्री शरद सागर ने मोकामा के ऐतिहासिक राम रतन सिंह महाविद्यालय जाकर श्री राम रतन जी की प्रतिमा को माल्यार्पण भी किया।मोकामा घाट जाकर राष्ट्रकवि दिनकर के ऐतिहासिक स्कूल का किया दौरा और बच्चों को किया सम्बोधित – श्री शरद सागर ने मोकामा घाट स्थित सरकारी उच्च विद्यालय के निमंत्रण को स्वीकार किया और वहां स्कूल के सभी बच्चों को किया सम्बोधित.मोकामा घाट हाई स्कूल में डॉ सुधांशु शेखर जी ने मंच संचालन कर बच्चों को शरद जी के बारे में बताया,एवं प्रचार्य द्वारा शरद जी को बुके भेंट कर समानित किया गया ,इस मौके पे रंजन सर ,अब्दुल मोगनी सर,रंजन सर,धरमेंद्र सर,गोपाल सर,कन्हैया सर ,किरण मैडम , कुंदन मैडम आदि मौजूद थे.300 से ज्यादा बच्चे और शिक्षक गण वंहा मौजूद थे .कुंदन मैडम के द्वारा राष्ट कवि दिनकर जी का एक शोध किया गया था ,जिसे उन्होंने बच्चों एवं शरद सागर जी को सुनाया .शरद जी रामधारी सिंह दिनकर जी के छात्रावास ,वो कूआं जन्हा दिनकर जी स्नान करते थे ,वह क्लास रूम जन्हा दिनकर जी पढ़ते थे देखा और स्कुल प्रांगन का भ्रमण किया. वहां स्कूल के बच्चों से शरद सागर ने कहा – “देश और दुनिया भर को दिनकर और उनकी कविताओं ने प्रेरित किया और आप सभी तो उसी कक्षाओं में पढ़ते हैं जहाँ राष्ट्रकवि पढ़े। इन्ही जगहों से दिनकर ने इस देश का मार्गदर्शन किया। आज आवश्यक है की आप सब भी वही मार्गदर्शन करें जो इसी विद्यालय के एक छात्र ने किया।शरद जी ने दिनकर जी की कविता भी बच्चों को सुनाई. “4 जुलाई को मोकामा के स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों को किया सम्बोधित और की मुलाकात – मोकामा टाल समिति के अध्यक्ष एवं स्थानीय शिक्षक, अध्यापकगण, उद्यमी, एवं लोगों के परेशानियों को समझा और एक बेहतर नेतृत्व का निर्माण करने पर बात की.

मोकामा के विद्यार्थियों के साथ साथ स्थानीय ग्रामीण भी शरद सागर को सुनने आये थे .डॉ सुधांशु शेखर,आनंद मुरारी,प्रणव शेखर शाही,विक्रांत जी ,चन्दन जी ,अजय सर,प्रभात जी,चन्दन जी आत्मा,गौतम जी,बीट्टू जी,आनंद कुमार सिंह और सेकड़ो स्थानीय लोग भी उन्हें सुनने के लिए उत्सुक नज़र आये .


आज बच्चों के संग रहेंगे शरद सागर

जाने माने समाजसेवी व् उद्यमी शरद सागर आज और कल मोकामा में होंगे .आज 5 जुलाई को 9 बजे सुबह टाउन हाल(मोकामा मारवारी स्कूल के पास) में बच्चो और ग्रामीणों से संवाद करेंगे .जबकि 12:30 बजे मोकामा घाट उच्च विद्यालय में दिनकर जी के बारे मैं और बच्चों से संवाद होगा.आप लोग भी जो उनसे संवाद करना चाहते है वो दोनों मैं कंही भी अपनी सहूलियत के हिसाब से उनसे संवाद कर सकते है .शरद सागर एक भारतीय युवा आइकॉन, विश्व प्रसिद्द उद्यमी एवं 21वीं शताब्दी के लीडर हैं जिनके शिक्षा एवं सामाजिक सेवा में किये गए काम एक पूरी पीढ़ी को प्रेरणा देती है। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें वाइट हाउस में आमंत्रित किया, फोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें प्रतिष्ठित 30 अंडर 30 की सूची में शामिल किया, रॉकेफेलर फॉउंडेशन ने उन्हें अगली सदी के 100 इन्नोवेटरों में शामिल किया, नोबेल पीस सेण्टर ने उन्हें नोबेल शान्ति पुरस्कार समारोह में आमंत्रित किया एवं भारत का प्रमुख अखबार दिव्या भास्कर ने उन्हें “21 वीं सदी के स्वामी विवेकानंद” की उपाधि दी। शरद सागर कोई सेलिब्रिटी नहीं हैं।

भारत के एक छोटे से गाँव में जन्मे शरद को 12 साल की उम्र में पहली बार स्कूल जाने का मौका मिला। हाई स्कूल की पढाई पूरी करते तक शरद प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतररष्ट्रीय वाद विवाद प्रतियोगिता के विजेता रहे, ओलिंपियाड एवं शैक्षिक परीक्षाओं में शीर्ष स्थान पाया एवं जापान, कोरिया, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडिया के प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय एवं संयुक्त राष्ट्र मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। कक्षा 10 में शरद ने इन वैश्विक अवसरों को दूसरे बच्चों तक पहुँचाने के लिए सामाजिक संस्था डेक्सटेरिटी ग्लोबल की स्थापना की।

पुण्यतिथि पर याद किये गये युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद

मोकामा के बड़े ही श्रधा के साथ याद किये गये स्वामी विवेकानंद .मोकामा चौक बाज़ार पर चन्दन सर के नेत्रित्व मैं सेकड़ों बच्चों ने स्वामी विवेकानंद की 116 वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया गया. सर्वप्रथम स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण किया गया. चन्दन सर ने स्वामी जी के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद गुरु-शिष्य परंपरा की एक ऐसी मिशाल हैं, जो आज अपनी शताब्दी से अधिक हमारी शताब्दी में प्रासांगिक हैं. चन्दन सर ने कहा कि स्वामी विवेकानंद बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. उनके आदर्श को अपना कर युवा वर्ग अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं. इस मौके पर कई बच्चों ने स्वामी विवेकानंद जी के अद्भुत विचारों की चर्चा की .वर्त्तमान भारत में भी उनके जैसा संत नहीं दीखता है.”उठो जागो और तब तक चलते रहो जबतक मंजिल न मिल जाय” जैसे सफलता के मूल मन्त्र देने वाले विवेकानंद को याद करने का मकसद बच्चो को नई उर्जा और आत्मविश्वास से सराबोर करना था.बच्चों ने न केवल आज स्वामी जी की पुन्य तिथि मनाई बल्कि उनके आदर्शों पर चलने की शपथ भी ली . जीवन मैं सफल होने के लिए स्वामी जी का मन्त्र बहुत ही उपयोगी माना जाता है.जब जब कोई निराश होता है,जब उसके पावं डगमगाने लगते है स्वामी जी के प्रेरणादाई वाक्य जीवन में नयी उर्जा भर देती है.

जनता दल यु के प्रवक्ता और एम् एल सी नीरज कुमार ने सोशल मिडिया के माध्यम से युवाओ के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद को याद किया.उन्होंने अपने फेसबुक वाल पर लिखा स्वामी जी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक है जितने उनके युग में थे.वेदान्त के ज्ञाताऔर प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु, साहित्य, दर्शन और इतिहास के प्रकाण्ड विद्वान, युवाओं के प्रेरणा स्रोत श्रद्धेय स्वामी विवेकानन्द जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत् शत् नमन और विनम्र श्रद्धांजलि.