आकाल जैसा समय ,सारे जल श्रोत सुख चुके है ,कैसे हो धान की खेती

मोकामा टाल में नदी, नहर आदि जलस्रोत सूखे पड़े हैं. खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से किसान धान का बिचड़ा डालने से कतरा रहे हैं. टाल के अधिकांश किसानों के पास पटवन के लिये बोरिंग का साधन नहीं होने से खेतों में नमी के लिए अब किसान बारिश की आस में हैं, लेकिन बारिश के भी आसार नहीं दिखने से किसान बेबस हो रहे हैं. रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र बारिश की इंतजार में बीत चुका. अब किसानों को आद्रा नक्षत्र से उम्मीद है. टाल के कुछ किसानों ने बोरिंग से पटवन कर रोहिणी नक्षत्र में बिचड़ा डालने की हिम्मत जुटायी, लेकिन बढ़ती तपिश से उनका यह प्रयास निरर्थक साबित हुआ.

अधिकारियों का कहना है कि टाल इलाके में बारिश का औसतन रिकॉर्ड 10 एमएम है जबकि धान का बिचड़ा डालने के लिये कम से कम 50 एमएम पानी की जरूरत है. दूसरी ओर तापमान भी बिचड़ा डालने के अनुकूल नहीं है. इसके लिए तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तक होना चाहिए जबकि वर्तमान में इससे काफी अधिक तापमान रिकॉर्ड किया जा रहा है. ऐसे हालात में बोरिंग का पानी नाकाफी साबित हो रहा है.घनघोर बारिश के बाद ही तापमान पर नियंत्रण हो सकता है. हालांकि जून के अंतिम सप्ताह में खेती के अनुकूल बारिश का पूर्वानुमान है. रोहिणी के बाद आद्रा नक्षत्र में ही धान का बिचड़ा डालने की परंपरा है. घोसवरी प्रखंड के कृषि पदाधिकारी अरविंद कुमार सिंह ने जानकारी दी कि मोकामा टाल इलाके में घोसवरी प्रखंड में 1736 हेक्टेयर, पंडारक प्रखंड में 1934 हेक्टेयर, मोकामा प्रखंड में 600 हेक्टेयर, अथमलगोला प्रखंड में 1683 हेक्टेयर, बख्तियारपुर प्रखंड में सबसे ज्यादा 2487 हेक्टेयर धान की बुआई का लक्ष्य निर्धारित है. सरकार धान की खेती को बढ़ावा देने के लिये अनुदानित दर पर बीज व दवाएं उपलब्ध करा रही है. पटवन पर भी अनुदान देने की योजना है. मोकामा प्रखंड कृषि पदाधिकारी रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि पानी के अभाव में धान की खेती को लेकर किसान अभी उदासीन हैं. अनुदानित दर पर उपलब्ध कराये गये धान के बीज व दवाएं प्रखंड कार्यालय में पड़े हैं. मौसम अनुकूल नहीं होने से किसान अभी बीज खरीदने को तैयार नहीं हैं.(सौजन्य:-प्रभात खबर)

दाल नही गलेगी ?

3 सालों से किसानों की फसल घर में ही पड़ी है .कोई इसे मिट्टी के मोल भी खरीदने को तैयार नहीं है.मोकामा टाल का दाल पुरे भारत में सबसे अच्छे गुणवत्ता वाला दाल माना जाता है .1 साल की उपज से भारत भर को दाल खिलाता है.पर सरकारी उदासीनता कहिये राज्य और केंद्र किसी के पास मोकामा के किसानो की समस्या का कोई हल नहीं है.अभी कुछ दिन पहले ही किसानो ने महा आन्दोलन किया था.तमाम तरह के वाडे किये गये मगर ढाक के तीन पात ,कुछ नहीं हुआ .महिना हुए किसान आन्दोलन को सरकार सो रही है .दाल उत्पादक किसानों को सरकारी आश्वासन काम नहीं आया. अब तक दाल की खरीद शुरू नहीं हो पायी है, जबकि सहकारिता मंत्री ने 15 जून से ही दाल खरीद की बात कही थी. वहीं, राज्य में गेहूं खरीद की भी स्थिति अच्छी नहीं है.

राज्य के चार जिले पटना, लखीसराय, शेखपुरा और नालंदा में दाल का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है. इस साल भी पैदावार अच्छी हुई, लेकिन किसानों को उचित कीमत नहीं मिल रही है. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.मोकामा टाल के नाम से मशहूर इस दाल उत्पादक क्षेत्र को दाल का कटोरा भी कहा जाता है. पिछले दिनों दाल खरीद को लेकर यहां के किसानों ने आंदोलन किया था. एक लाख एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में इस इलाके में दाल की खेती होती है. मुख्य रूप से इस क्षेत्र में मसूर की खेती होती है. सहकारिता मंत्री राणा रणधीर सिंह ने बताया कि सरकार दाल खरीद का प्रयास कर रही है. जल्द ही चार जिलों पटना. नालंदा, लखीसराय और शेखपुरा में दाल की खरीद शुरू होगी. इधर, सरकारी तौर पर गेहूं खरीद की रफ्तार काफी धीमी है. 34 जिलों में इसकी खरीद हो रही है. अब तक मात्र 8600 टन गेहूं की ही खरीद हो पायी है. इस कारण किसान 1400 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर ही गेहूं बेचने को विवश हैं.(सौजन्य:-प्रभात खबर)

रखिये अपने जानवरों को सुरक्षित और स्वस्थ

दुधारू जानवर गाय भेंस इत्यादी न सिर्फ हमारी आमदनी का जरिया है बल्कि वो हमारे स्वस्थ भारत का प्रतिक भी हैं.पशु धन समृधि का प्रतिक है.
पर कभी कभी हमारे जाने अनजाने में हमारे पशु बीमार हो जाते है उनसे न सिर्फ हमारी आर्थिक हानी होती है बल्कि मानसिक नुक्सान भी होता है.
इसलिए हमें समय समय पर अपने जानवरों को अच्छे पशु चिकित्सक से उनका निरिक्षण करवाना चाहिए.अपने शहर मोकामा में अब जानवरों के लिए मेट उपलब्ध है जिससे भी काफी हद तक उन्हें बिमारियों से बचाया जा सकता है .रबड़ स्टडेड स्थिर चटाई एक आदर्श भारी रबर है, जो घोड़े के अस्तबलों, पशु शेड और कुत्ते केनेल में बिस्तर के रूप में उपयोगी है. रबर अपने रबर गुणों के कारण एक एंटी बैक्टीरियल बाधा की तरह काम करता है,जिससे जानवरों को संक्रमण से बचाव होता है.

यह मुख्य रूप से पशुओं, जैसे घोड़े, गाय, सुअर, आदि के लिए फर्श चटाई के रूप में उपयोग किया जाता है. यह फीड की लागत को कम कर सकता है और पशु आराम, गर्म और सुखा रह सकता है.काऊ मैट पर गाय बैठने से उसके थन ख़राब नहीं होता है तथा ईंट वाले खरंजा पर गाय के पैर ख़राब नहीं होते है.इससे गाय की जिंदगी भी बढ़ती है.यह गाय रबर की चटाई अच्छी तरह से सूखा, गैर विषैले है.यह गाय रबड़ की चटाई लोचदार है, इसलिए यह प्रयोग में टिकाऊ है.यह चटाई अपने शहर मोकामा में आसानी से उपलब्ध है जिसे आप मैनक टोला ,मोकामा में श्री अरविन्द जी इस नंबर पर संपर्क कर सकते है 09852870858.

टाल में पईन उड़ाही पर तनाव

हाथीदह थाना क्षेत्र के टाल में गुरुवार को दो गांवों के लोग पईन उड़ाही के मुद्दे पर अचानक आमने-सामने आ गए। तनातनी की स्थिति के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शात किया। घटनास्थल से पुलिस ने जेसीबी बरामद किया। वहीं विधि व्यवस्था के मद्देनजर कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया।ज्ञात हो कि क्षेत्र के किसानों की माग पर सूबे के जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह टाल क्षेत्र में पईन उड़ाही का कार्य बरसात पूर्व पूरा कराने पर दृढ संकल्पित हैं। मकसद है टाल क्षेत्र में देर तक जल जमाव न रहे ताकि दलहनी फसलों की बुआई समय पर हो जाए। आए दिन इस कार्य के संचालित होने में पईन की पहचान को लेकर कई गांवों के किसान आपस में उलझ जाते हैं तो कहीं निर्माण कार्य में लगी एजेंसी से भिड़ जाते हैं। इससे काम में रुकावट आती है।

ऐसा ही मामला गुरुवार को हुआ जब बड़हिया गांव के किसानों ने जुटकर पईन उड़ाही का कार्य बंद करा दिया। इन लोगों का कहना था कि जिस जमीन पर उड़ाही की जा रही है वहां पईन का अस्तित्व कभी था ही नहीं। नक्शे में भी इसका उल्लेख नहीं है। यह उड़ाही किसानों की निजी जमीन पर की जा रही है। सैकड़ों एकड़ किसानो की जमीन बर्बाद हो जाएगी। छोटे व सीमात किसानो के सामने भुखमरी की नौबत आ जाएगी। इस आरोप से उलट औंटा गांव के लोग इस उड़ाही को जायज ठहरा रहे थे। इसी बात को लेकर दोनों गांवों के लोग आपस में उलझ गए। विधि व्यवस्था बिगड़ने की आशका की सूचना थाने को दी गयी। मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शात कराया। समाचार लिखे जाने तक दोनों गांवों के लोग हाथीदह थाने पर जमा थे। थाना अध्यक्ष अविनाश कुमार ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है।(सौजन्य:-दैनिक जागरण)

किसानों को तत्काल कोई राहत देने से इनकार

मोकामा बड़हिया के किसान अपने दलहनी फसल की उचित मूल्य पर खरीद के किये क्रय केंद्र खोलें की मांग को लेकर एक दिवसीय शांति पूर्ण धरना पर बैठे थे. धरने का असर पटना से लेकर लखीसराय तक देखने को मिला .21 किलोमीटर से भी लम्बा जाम लग गया.इतना बड़ा आन्दोलन एकदम शांतिपूर्ण तरीके से हुआ.किसान महाबन्दी पटना से लेकर लखीसराय तक सफल रहा है,कंही ज्यादा कंही कम पर हर जगह लोग सड़कों पर उतरे। एक ऐसा आंदोलन जो सबको सीख दे गया,जब बड़हिया मे किसानों ने रेल रोका तो यात्रियों की सुविधा का पूरा ख्याल रखा गया।उन्हें खाने के लिए नाश्ते का पैकेट,पीने के लिए पानी मुहैया कराया गया। सड़को पर लोगो ने बिस्कुट बांटे, कई जगहों पर टाल का सत्तू से बना शीतल पेय पिलाया गया। लम्बी लम्बी जाम में फंसे गाड़ी और यात्रियों को टाल के बेसन से बना पकोड़ा भी बांटा गया।जिनको फ़िक्र था किसानों का उन्होंने किसान आंदोलन सफल बनाने के लिए अपना सहयोग दिया।

43 डिग्री की तपती धूप में मातृ शक्ति भी आंदोलन का हिस्सा बनी।हर आदमी ने अपनी औकाद। से बढ़कर आंदोलन में मदद किया।एक मुसलमान भाई ने अपना पूरा ठेला तरवुज जाम में फंसे यात्रियों में बाँट दिया। एक अखब्बार वेंडर ने 1000 से ज्यादा अखबार जाम में फंसे यात्रियों को दे दिया ताकि उनका समय कट जाय।जाम में फंसे यात्री भी सुकून से आंदोलन समाप्त होने का इन्तजार कर रहे थे। कंही कोई तोड़ फोड़ की कोई घटना नही। सांसद वीणा देवी पुरे समय किसानों के साथ तपती धूप में बैठी रहीं,पसीने से तर वतर होकर भी बैठी रहीं।पार्टी लाइन से परे किसानों के साथ रहीं। 80 साल से ज्यादा बुजुर्ग भी टस से मस नही हुए।ललन सिंह भी पार्टी पॉलिटिक्स छोड़ धरने में शामिल हुए। उन सभी छोटे बड़े लोगो को सलाम जिनकी छोटी बड़ी मदद से ये किसान आंदोलन सफल हुआ।केंद्र सरकार ने दाल की गिरती कीमतों के मद्देनजर किसानों की समस्याएं दूर करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। हालांकि, सरकार ने तुरंत किसी तरह की राहत देने से इनकार किया है। दूसरी तरफ, 2019 में आम चुनाव के मद्देनजर सरकार ने खाद्य सुरक्षा कानून के लाभार्थियों के लिए अनाज की कीमतों में अगले एक साल तक बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के चार साल पूरे होने के मौके पर केंद्रीय खाद्य आपूर्ति व उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान ने आज यहां इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा, ‘दाल की कीमत बढ़ जाए, तो परेशानी। कम हो जाए तो परेशानी।

बिहार विधानसभा चुनाव में यह एक बड़े मुद्दे के रूप में उभरा था। हम लोगों ने 20 लाख टन का बफर स्टॉक तैयार किया। अब जमाखोरी कम हुई तो दाम घटना शुरू हो गया। दाल की इस बार बंपर फसल हुई है। हमने धान और गेहूं की तर्ज पर दाल की न्यूनतम कीमत भी तय की है। दाल की कीमत हमारे लिए चिंता का विषय जरूर है। हमने इस पर एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है।’ हालांकि, उन्होंने किसानों को तत्काल कोई राहत देने से इनकार किया। दाल के आयात पर शुल्क बढ़ाने से जुड़े एक सवाल पर मंत्री ने कहा, ‘विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के मुताबिक हम किसी वस्तु के आयात पर रोक नहीं लगा सकते हैं। हम बस शुल्क कम या अधिक कर सकते हैं। इस पर तुरंत कोई फैसला नहीं लिया जा सकता है।’ केंद्र सरकार ने हाल में मोजांबिक से दाल आयात करने का निर्णय लिया था।

किसान महाबन्दी देश के दुसरे किसानो के लिए नज़ीर पेश करेगा

दलहन फसलों के लिए सरकार समर्थन मूल्य 4250 रुपए कर तो दी है किंतु उनकी खरीद के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जाती है। और किसान ₹3200 रुपए में दलालों के बीच उधार बेचने के लिए मजबूर हो जाते है। किसानों को आश्चर्य तो तब होता है जब यही दालें विदेशों से आयात कर ली जाती है, और किसानों को बाजार के भरोसे, साहूकार के भरोसे छोड़ दिया जाता है। आज दिनांक 28/5/2018 को किसान के रूप में अपनी ताकत को पहचानते हुए मोकामा और बड़ैहीया टाल के किसानों ने दलहनी फसलों के समर्थन मूल्य ₹8000 करने और खरीद के लिए सभी प्रखंड में दलहन क्रय केंद्र खोलने के लिए लखीसराय से बख्तियारपुर तक शांतिपूर्ण बंदी का ऐलान किए, और शांतिपूर्ण बंदी सफल रहा। और इस बंदी का समर्थन मुंगेर लोकसभा के सांसद माननीया श्रीमती वीणा देवी, लो ज पा प्रत्याशी श्री कन्हैया सिंह जी, जन अधिकार पार्टी के प्रदेश महासचिव श्री नीलीनरंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, तमाम सारे पार्टी का कार्यकर्ता एवं किसानों और व्यापारियों का सहर्ष पुरजोर समर्थन मिला और सभी लोगों ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक मंच पर आवाज उठाते हुए सड़क से सदन तक लड़ाई करने की बात कही।

सांसद महोदया श्रीमती वीणा देवी ने किसानों को संबोधित करते हुए कही कि मैंने बार-बार सदन में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए दलहनी समर्थन मूल्य और टाल योजना की बात लिखित रूप से भी कई बार मैंने मेमोरेंडम दिया लेकिन आज तक हमारी मांगों को आश्वासन देते हुए नजरअंदाज कर दिया गया। मैं भी किसान की बेटी हूं और मोकामा की हूं इसलिए किसानों के दर्द को समझती हूं। इसलिए पहले किसान उसके बाद पार्टी इसलिए मैं किसानों के समर्थन में हूं और किसानों के साथ हूं और अभी तो यह अंगड़ाई है अभी तो पूरी लड़ाई बाकी है मैं इस धरना के माध्यम से सभी किसानों ें को आश्वस्त करना चाहूंगा की अगर सरकार समर्थन मूल्य बढ़ाती है और क्रय केंद्र खोलती है तब तो ठीक है नहीं तो मैं किसानों के साथ सड़क से लेकर सदन तक ताल में ताल मिला कर चलने का काम करूंगी। धरना दे रहे कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान के हितैषी गोरख सिंह जी संचालन किसान नेता श्री मुरारी सिंह जी विशिष्ट वक्ता श्री मोती बाबू, अशोक बाबू, सामाजिक कार्यकर्ता एवं किसानों के बारे में हर समय सोचने वाले चंदन जी एवं तमाम मोकामा के किसान भाइयो नें पुरजोर तरीके से अपने अपने भाषण में किसानों को संबोधित किया। कार्यक्रम पूर्णरूपेण सफल रहा इसके लिए चंदन जी और मुरारी जी को बहुत-बहुत धन्यवाद। जय किसान, जागो किसान।

किसानों ने किया सड़क से लेकर रेल तक चक्का जाम

मोकामाः किसानों ने मोकामा, बाढ़ और लखीसराय में सड़क जाम कर दिया है. किसान से दलहन फसल के समर्थन मूल्य नहीं मिलने और क्षेत्र में क्रय केंद्र नहीं खोले जाने से नाराज है. इस वजह से सैकड़ों किसानों ने जिले के विभिन्न रेलमार्ग और सड़क मार्ग को बाधित कर दिया. जाम की वजह से कई ट्रेन अन्य स्टेशनों पर खड़ी रही. वहीं, यात्री भी जाम और गर्मी की वजह से हलकान दिखे. इसके अलावा एनएच 80 पर भी ट्रकों की लंबी कतार लगी थी.किसानों ने विभिन्न स्टेशनों पर पहुंच कर रेल को बाधित किया और रेल का चक्का जाम भी कर दिया. यही नहीं उन्होंने रेलवे के पूछताछ केंद्र और टिकट काउंटर को भी बंद करा दिया. एनएच 80 पर भी यही हाल दिखा. ट्रक की लंबी लाइन सड़कों पर दिखी. वहीं, यात्री भी जाम और गर्मी की वजह से काफी परेशान दिखे.

इस दौरान मोकामा में एक ट्रक में भीषण आग लग गया. बताया जाता है कि ट्रक के पीछे डाले में खाना बनाया जा रहा था. तभी अचानक ट्रक में आग लग गई. ट्रक धूं-धूं कर जलने लगी. हालांकि स्थानीय लोगों ने किसी तरह आग पर काबू पाया.किसानों द्वारा बंद का काफी असर दिख रहा है. किसानों ने नगर पंचायत, प्रखंड मुख्यालय, कृषि और बैंक समेत कई कार्यालयों को बंद करा दिया. यहां पूर्णतः कार्य प्रभावित हुआ. हालांकि पुलिस बंद के दौरान गश्ती करते नजर आये. पुलिस मुस्तैदी से लगी है जिससे की कोई अप्रिय घटना न हो सके.चौक-चौराहों पर सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई है. मोकामा स्थित मोर गांव में किसानों और पुलिस के बीच झड़प देखने को मिला.(जी न्यूज़ )

बख्तियारपुर में सड़क पर दाल फेंक जताया आक्रोश

किसानों को अनाज का उचित मूल्य नहीं मिलने, केंद्र और बिहार सरकार की किसान विरोधी नीतियों, टाल क्षेत्र की उपेक्षा के विरोध में सोमवार को अखिल भारतीय नौजवान, किसान, मजदूर संगठन एवं फतुहा बड़हिया टाल विकास समिति के बैनर तले किसानों ने सड़क पर दलहनी फसलों को फेंक कर प्रदर्शन किया।इस दौरान किसानों ने सरकार विरोधी नारे लगाते हुए बाजार बंद रखने की अपील की। वहीं थाना मोड़ के निकट एसएच को बाधित कर दिया। राष्ट्रीय संयोजक विवेक शर्मा, किसान उमेश सिंह, सुनील कुमार, छोटे सिंह, रामानंद तिवारी, पंकज सिंह, अखिलेश चौधरी, रामाशंकर सिंह, महेश सिंह आदि मौजूद थे। (Dainik Bhaskar)

किसान महाबन्दी ,पूरी तरह बंद रहा मोकामा

किसानों द्वारा बुलाए गए बंद का खासा असर देखने को मिला जिसमें स्थानीय बाजार पूरी तरह स्वत:स्फूर्त बंद रहे। शहरी और ग्रामीण इलाके में सुबह से ही यातायात बाधित रहा। मेकरा, सुल्तानपुर, मोर, शिवनार, औंटा, महेंद्रपुर, हथिदह सहित अन्य गांवों में किसान सड़कों पर उतरे और प्रदर्शन किया। औंटा के पास ट्रेनों को भी रोका गया। हालांकि आरपीएफ के समझाने-बुझाने पर प्रदर्शनकारी किसान रेल ट्रैक से हट गए। मोकामा के जयप्रकाश चौक पर किसानों न टेंट-पंडाल लगाकर धरना दिया।आन्दोलन के संयोजक चंदन कुमार ने बताया कि दलहन फसलों की खेती करने वाले किसानों को उनके उत्पाद का न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल रहा है और न ही दलहनी फसलों के उत्पाद का कोई खरीदार ही है। मसूर की खेती करने वाले किसानों को ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मसूर का मौजूदा बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य 3950 रुपये प्रति क्विंटल के विरुद्ध मात्र 3200 रुपये प्रति क्विंटल है। किसान नेता मोती प्रसाद, अशोक नारायण सिंह, भवेश कुमार ने बताया कि हमारी परेशानियों का सबसे बड़ा कारण है मसूर की खेती करने वाले किसानों को बेहतर दाम नहीं मिलना। किसान नेताओं ने कहा कि व्यापारी मसूर को 3200 रुपये से 3400 रुपये प्रति क्विंटल खरीदने को तैयार तो होते हैं लेकिन नकद पैसेदेने के लिए तैयार नहीं होते। मोलदियार टोला के किसान धम्रेद्र सिंह ने बताया कि पिछले साल 200 क्विंटल मसूर को व्यापारी के यहां बेचा था। इस बार 400 क्विंटल मसूर उनके घर में रखा हुआ है। वहीं व्यापारी ने पिछले साल खरीदी गई मसूर का अभी तक भुगतान भी नहीं किया है। धम्रेद्र सिंह के घर बेटी की शादी है और उन्होंने सोचा था कि 2 साल का अनाज बेच कर बेटी के हाथ पीले कर लेंगे लेकिन न तो पिछले साल के मसूर का दाम उन्हें मिल पाया और इस बार भी मसूर के बिकने पर संशय ही है। बंद का असर यहां तक रहा कि मुंगेर से लोक जनशक्ति पार्टी की सांसद वीणा देवी किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए मोकामा में वह खुद धरने पर बैठ गई। उनके साथ लोजपा के प्रदेश महासचिव और मोकामा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी कन्हैया सिंह भी धरना पर बैठे हुए थे। जन अधिकार पार्टी के प्रदेश महासचिव ललन सिंह भी किसानों के साथ सड़कों पर नजर आए।

वहीं पूर्व मंत्री श्यामसुंदर सिंह धीरज भी किसानों के जुलूस और धरना में शामिल हुए। उन्होंने मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है। जन अधिकार पार्टी के प्रदेश महासचिव ललन सिंह ने कहा किसानों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है और किसान अपने हक हकूक की लड़ाई लड़ रहे हैं.(सौजन्य:-रास्टीय सहारा)विडियो देखिये

बंद रहा फतुहा,बख्तियारपुर ,खुशरूपुर

प्रखण्ड मुख्यालय में सोमवार को फसलों के उचित समर्थन मूल्य को लेकर क्षेत्र के किसानों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने केन्द्र व राज्य सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। इस अवसर पर किसानों की तरफ से छह सूत्री मांगों का ज्ञापन प्रखंड विकास पदाधिकारी राकेश कुमार को सौंपा गया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे परसा के किसान अवधेश सिंह ने बताया कि सरकार मांग के बावजूद अबतक दलहन, तिलहन व धान की खरीदारी के लिए क्रय केंद्र नहीं खोल पायी है। इसके अलावे किसानों को किसी अनाज के लिए न ही उचित समर्थन मूल्य मिल पा रहा है। किसान बाध्य होकर सड़क पर उतरने को मजबूर हैं। मौके पर दर्जनों किसान मौजूद थे।(रास्टीय सहारा)विडिओ देखिये