नागपंचमी पर भगवती स्थान सज धज का तैयार

मोकामा गंगा किनारे माँ विसहरी भगवती विराजती हैं.यूँ तो हर दिन माँ की पूजा बड़े ही धूम धाम होती है ,मगर मंगवार और शनिवार को यंहा भक्तो की भीड़ बहुत बढ़ जाती है. गंगा किनारे माता भगवती का मंदिर शक्ति के लिए जाना जाता है .इस मंदिर में आस्था रखने वाले लोग बताते है की उन्होंने यंहा मुर्दे को जीते देखा है .यंहा माँ भगवती विषहरी रूप में विराजती है .बीमार ,लाचार ,अपंग लोग यंहा अपने स्वस्थ की कामना करते है माँ भगवती उनकी मांगे जरुर पूरी करती है .सापं ,बिच्छू व् अन्य जहरीले जंतु के काटे को माँ पल में ठीक करती है . सिर्फ मोकामा के ही नहीं वरन दूर दूर से लोग सापं बिच्छू काटे को लेकर यंहा आते है और ठीक होकर जाते है .लोगों का विस्वास है की अगर किसी व्यक्ति को जहरीले जंतु ने काटा हो वो बिना किसी डॉक्टर बैद्य को दिखाए माँ के दरवार में आ जाये तो वो जरुर ठीक हो जायेगा .जब यंहा के घरो में शादी होती है तो लड़का लड़की यंहा माता का आशीर्वाद लेने जरुर आते है .जब लड़के की शादी होती है तो लड़का माँ का आशीर्वाद लेकर ही शादी करने जाता है .जब लड़की की शादी होती है तो लड़की यंहा मंगरोड़(एक प्रकार की मिठाई जो आता ,मैदा ,गुड ,चीनी आदि से बनाया जाता है ) चढाने जाती है .अगर किसी कारन(पकरुआ,प्रेम विवाह आदि ) शादी मोकामा से न हो तो भी शादी के बाद भी नव दम्पति यंहा जरुर आते है .

सालाना मेला नागपंचमी को बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है .आज के नागपंचमी मेले के लिए पूरी तैयारी हो चुकी है .मदिर को बहुत ही अच्छे तरीके से सजाया गया है.ग्रामीणों ने बताया की मेला 12 बजे से शुरू होकर रात के 9 बजे तक चलता है ,भक्त इस बीच कभी माँ के दर्शन कर लेते है.माँ भक्तो की हर मनोकामना पूरी करती है.नागपंचमी का त्योहार श्रावण कृष्ण पंचमी और श्रावण शुक्ल पंचमी इन दोनों तिथियों में मनाया जाता है। बिहार, बंगाल, उड़ीसा, राजस्थान में लोग कृष्ण पक्ष में यह त्योहार मनाते हैं जो इस इस साल 2 अगस्त को है।भविष्य पुराण के पंचमी कल्प में नागपूजा और नागों को दूध पिलाने का जिक्र किया गया है। मान्‍यता है कि सावन के महीने में नाग देवता की पूजा करने और नाग पंचमी के दिन दूध पिलाने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं और नागदंश का भय नहीं रहता है। यह भी मान्यता है कि नागों की पूजा से अन्‍न-धन के भंडार भी भरे रहते हैं।सावन के महीने में नागपंचमी के दिन रुद्राभिषेक कराने का काफी महत्‍व है। भगवान शिव के आशीर्वाद स्वरूप नाग पृथ्वी को संतुलित करते हुए मानव जीवन की रक्षा करें, इस पर्व को मनाने की यह भी एक मान्‍यता है।