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वर्ष 2009 में 27 दिसम्बर के दिन सूरज आया था और हमसे बच्चा बाबू को छीनकर ले गया था । वैसे सूरज को तो रोज आना है , नहीं आएगा तो अनर्थ हो जाएगा ,लेकिन मेरा स्वार्थी मन कहता है कि यदि उस दिन वह नहीं आता तो बच्चा बाबू आज हमारे बीच होते । उसने ही उन्हें हमसे छीना है । मैं इसके लिए उसे दोषी मानता हूँ और दुखी मन से उससे कुछ कह रहा हूँ —

ऐ 27 दिसम्बर , 2009 के सूरज
उस दिन तुम क्यों आया था ?
हमसे उन्हें छीनने
हृदय को शोक -विह्वल करने
अश्रु – कण बीनने ।
तुमने दिया है यह दारुण – दुख
तुम्हारा भी तेज
हो जाएगा क्षीण
देखना एक दिन ।

हमें रुलाकर
क्या मिला तुम्हें दिवाकर
यदि उस दिन नहीं आता
तो क्या बिगड़ जाता
तू नहीं आता,
रोशनी फिर भी रहती
तेरे आने से लेकिन वह चला गया
अंधेरा छा गया जिसके बिन ।
तुम्हारा भी तेज
हो जाएगा क्षीण
देखना एक दिन ।

बहुत बड़ा अनर्थ हो गया
एक तेरे आने से,
आने से पहले
पूछ तो लेता जमाने से ।
ले गया जिनको हमसे छीन
कैसे रहेंगे उनके बिन ।
तुम्हारा भी तेज
हो जाएगा क्षीण
देखना एक दिन ।

Ashutosh Arya
बच्चा बाबू को छीनकर ले गया