बाबा परशुराम जन्मोत्सव 17 अप्रैल 2018 से आरम्भ होगा

बाबा परशुराम जन्मोत्सव महायज्ञ पर गंगा पूजन एवं कलश यात्रा 17 अप्रैल 2018 को प्रातः 6 बजे से आरम्भ होगा।
परशुराम सेवा समिति के तत्वावधान में भी 17 अप्रैल से 21 मई 2018 के बीच परशुराम स्थान परिसर मोकामा में परशुराम जयंती का आयोजन किया जा रहा है।बाबा परशुराम जन्मोत्सव महायज्ञ पर गंगा पूजन एवं कलश यात्रा 17 अप्रैल 2018 को प्रातः 6 बजे से आरम्भ होगा। कलश यात्रा की शुरुआत तपस्वी जी ठाकुरबाड़ी गंगा घाट से होगी जो नगर भ्रमण करते हुए परशुराम मंदिर परिसर जाएगी। वृंदावन के आचार्य महेंद्र शुक्ल के सौजन्य से 17 अप्रैल से प्रतिदिन सुबह 7 बजे से यज्ञ के विधान होंगे। संत श्री देवकी नंदन भारद्वाज 17 से 20 अप्रैल तक संध्या 5 बजे से श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराएंगे। समापन समारोह 21 अप्रैल को होगा।

मोकामावासी अपने नगर देवता बाबा परशुराम के प्रति श्रद्धा और समर्पण भाव हर वर्ष उनका प्रकटोत्सव ‘परशुराम जयंती’ मनाते हैं। बाबा परशुराम की महिमा जितनी अपार है उतना ही परशुराम स्थान, मोकामा (पटना, बिहार) का दृश्य भी मनोरम है। पूरे परिसर में बजरंगबली, दुर्गा मां, शिव पार्वती, राधा कृष्ण के भी मंदिर हैं। मोकामा वासी बाबा परशुराम की पूजा नगर देवता के तौर पर करते हैं। हर शुभ कार्य में लोग यहां शीश नवाते हैं।एक ओर जहां मौजूदा समय में राष्ट्र और समाज जाति के नाम पर विभाजित हो रहा है वहीं दूसरी ओर मोकामा का परशुराम जयंती समारोह सामाजिक समरसता की एक नजीर है जिसमें हर हर जाति, चाहे दलित-पिछड़े हों या सवर्ण’ के लोग भगवान परशुराम को अपना मानकर उनकी पूजा, आराधना, उपसना करते हैं और उनके प्रति अनुराग रखते हैं।

‘परशु’ प्रतीक है पराक्रम का। ‘राम’ पर्याय है सत्य सनातन का। इस प्रकार परशुराम का अर्थ हुआ पराक्रम के कारक और सत्य के धारक। भगवान पराशुराम राम के पूर्व हुए थे, लेकिन वे चिरंजीवी होने के कारण राम के काल में भी थे और कृष्ण के काल में भी थे। भगवान परशुराम विष्णु के छठवें अवतार हैं। इनका प्रादुर्भाव वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हुआ, इसलिए उक्त तिथि अक्षय तृतीया कहलाती है। परशुराम शस्त्र और शास्त्र के समन्वय का नाम है, संतुलन जिसका काम है। अक्षय तृतीया को जन्मे हैं, इसलिए परशुराम की शस्त्रशक्ति भी अक्षय है और शास्त्र संपदा भी अनंत है। ऐसे पराक्रमी और ज्ञानवान अवतार के आशीष से युक्त है पावन भूमि मोकामा , जहां बसते है बाबा परशुराम। बाबा परशुराम मंदिर पूरे वर्ष श्रृंगारित रहता है प्रकृति के सौंदर्य से श्रद्धालु यहाँ मंदिर परिसर स्थित पीपल के उस पेड़ का दर्शन करते हैं,जँहा साक्षात परशुराम निवास करते है। मान्यता है कि इस पेड़ के दर्शन मात्र से सभी शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं मोकामा वासी अपने ग्राम देवता बाबा परशुराम की आराधना के साथ ही कोई भी पुनीत कार्य आरम्भ करते हैं। परशुराम मंदिर पूरे बिहार में सामाजिक समरसता की नजीर पेश करने वाला पावन धाम है यहाँ हर धर्म और जाति के लोग अपने आदि देव बाबा परशुराम की आराधना के लिए आते है. अक्षय तृतीया पर हर वर्ष परशुराम जयंती का भव्य आयोजन होता है हजारों श्रद्धालु विशाल जुलूस और कलश यात्रा के साथ नगर भ्रमण करते हैं हाथी, घोडा, ऊंट सहित पारम्परिक वाद्य यंत्रों का अनोखा संगम दिखता है जुलुस में। बाबा परशुराम के दर्शन मात्र से आप भी दिव्य शांति का अहसास करेंगे। परशुराम धाम मोकामा में आपका स्वागत है .सामाजिक समरसता की नजीर पेश करने वाले बाबा परशुराम जयंती महोत्सव में आप परशुराम धाम, मोकामा पहुंचकर दर्शन पूजन करें।