मोकामा
समाचार

अनंत या अंसारी कौन है भारी

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पटना पुलिस के हत्थे चढ़ा मोनू और निलेश  ने जब बताया की वो मोकामा विद्यायक अनंत सिंह की हत्या का प्लान कर रहा था ,तो पुलिस भी उसकी बात का यकीन नहीं कर पा रही थी की वो लोग अनंत सिंह को मार सकते है .पर  जब उसने बताया की वो अनंत को मारने सोनपुर मेले भी गये थे , पूरी रेकी की थी मगर उस दिन अनन्त सिंह आये नहीं तो उनका प्लान कामयाब नहीं हुआ.

पुलिस ने उसे पूछा की वो अनंत सिंह को क्यों मारना  चाहती है तो उन्होंने बताया की उत्तर प्रदेश के बाहुबली विधायक मुख़्तार अंसारी ने उन्हें 50 लाख की सुपारी दी है.और मुखिया मणि पहलवान जो अनंत का शागिर्द है उसने उसकी बहन का निर्वाचन रद्द करवाने के लिए चुनाव आयोग के पास गया था.वो उन दोनों को मार डालना चाहता है.

आखिर अंसारी  क्यों मरना चाहता है अनंत को,बड़ा सवाल है. वैसे अंनत के दुश्मनों की कमी नहीं है.घर में ही चाचा भतीजा की लड़ाई में बहुत  लोग मारे जा चुके ,ये लड़ाई भी लगभग ख़त्म है क्योंकि अनन्त भी नहीं चाहते की घर में और खून खराबा हो ,जबकि विवेका पहलवान भी इस लड़ाई में बहुत गवां चुके है अपना ध्यान आजकल पूजा पाठ  में लगा रहे है.अंनत का पुराना दुश्मन भोला पहलवान भी लड़ाई से उकता चूका है शांति से जीना चाहता है .अंनत से खुद एक साक्षत्कार में कहा है की मोकामा के उनके जो राजनितिक विरोधी है चाहे वो ललन सिंह हो ,सूरजभान सिंह हो कोई भी उनको मारने  का प्लान नहीं कर सकते .तो फिर अंसारी क्यों सुपारी दे रहा है अनंत की मौत का.

बड़ा सवाल है की न तो अनंत ने कभी  यु पी चुनाव में और न ही अंसारी ने बिहार चुनाव में कभी अपने पैर जमाने की कोशिश की है .कोई राजनितिक लड़ाई तो दूर दूर तक दिखाई नहीं देती .कोई ठीका या बिजनस का फेरा हो सकता है ,मगर यह भी गले नहीं उतरता है क्योंकि दोनों का साम्राज्य बिलकुल अलग अलग है .

तो क्या कोई बड़ा राजनिति का खिलाड़ी इन दोनों के जरिये अपना निशाना साध रहा है. याद कीजिये २०१५ का विधानसभा चुनाव ,जब पूरा बिहार चुनाव ही अनंत विरोध में लड़ा गया था .कंही बड़े बड़े खिलाड़ी डर तो नहीं गये अंनत की उस जीत से जब उसने निर्दलीय होकर चुनाव लड़ा हो तमाम  विरोध के वावजूद भी जीत दर्ज की .अनंत सिंह को जदयू से निकाल दिया गया था और उसे हराने की पूरी कोशिश भी की गई ,सभी ने अंनत से मुह मोड़ लिया था .मोकामा और आसपास अंनत का बहुत नाम है. पटना में भी छोटे  मोटे हर चुनाव में अंनत का ही सिक्का चलता है .डर तो नहीं लग रहा बड़े बड़े आकाओं को जो अंनत को सिर्फ अपना पिछलगू समझते थे.उन्हें येसा  तो नहीं लगने लगा की अनंत सिंह अब उनसे भी आगे निकल सकते है.  सवाल बड़ा गहरा है क्योंकि लोकसभा का चुनाव नजदीक है जिन्होंने ने अंनत को हराने की पूरी कोशिश की थी उन्हें ये डर तो नहीं की अब अंनत उनके रस्ते का रोड़ा बन सकते है .

अगर अंसारी की कोई अपनी अदावत है अनंत से तो लड़ाई बड़ी भारी  हो सकती है क्योंकि दोनों ही एक पर एक है .दोनों राजनीती के येसे चेहरे है जो पार्टी नहीं अपने दम पर विधायक बनते है.चाहे पार्टी कोई हो ये दोनों ही जीत कर विधानसभा जाते है.दोनों के पास धन बल का येसा जमावड़ा है की किसी को भी 19 -20 नहीं कहा जा सकता .ताकत और सोहरत में दोनों का कोई मुकाबला नहीं.