मोकामा ऑनलाइन

मोकामा कन्हायपुर में अमरजीत कुमार की मौत से गमनिन हुआ माहौल

मोकामा के कन्हायपुर में अमरजीत कुमार के पोखर में डूब कर मौत हो गई. पटना किउल रेलवे ट्रेक के किनारे बहुत सारे पोखर हैं ,जिसे ज्यादातर मवेशी को नहाने के लिए इस्तेमाल होता है.

मगर यंही एक पोखर में अमरजीत कुमार के फिसल कर गिरने फिर डूबकर मृत्यु से पूरा गावं गमनिन है.यंहा के पोखर में ज्यादा पानी नही होता है.पर अभी बरसात के कारन बहुत ज्यादा पानी होने से वो बाहर नही निकल पाया और और डूबकर उसकी मृत्यु हो गई .मृतक वृज नन्दन पासवान का पुत्र था.मृतक की उम्र मात्र 19 साल थी.थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर राजेश रंजन ने हादसे की पुष्टि की है.

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मोकामा में मौत पर माहौल गमनिन ,

पटना जिला कन्हायपुर का ये इलाका जायदातर खेती के लिए ही जाना जाता है.तरह तरह की सब्जी की खेती , टाल में मसूर और चना की खेती से ही यंहा के किसान अपना जीवन यापन करते है.गंगा नदी के किनारे बसा ये गावं खेती और मवेशी के लिए छोटे छोटे पोखर पर ही निर्भर है.और ये हादसा हो गया है तो सारे किसान दुखी है.मोकामा जैसे प्रखंड में एक प्राथमिक उपचार की भी व्यवस्था नहीं है.येसे सेकड़ों हादसे अक्सर होते रहते हैं,मगर जनप्रतिनिधि और प्रशासन को इसकी तनिक भी चिंता नहीं है.मोकामा जो आज से महज 10 साल पहले तक बिहार के सबसे अच्छे स्वास्थ सुविधाओं से परिपूर्ण वाला जगह था.मोकामा का नाजरथ अस्पताल ३०० से करीब बेड और २० से जायदा टॉप क्लास के डॉक्टर से लेस था. बड़ी से बड़ी आपदा पर लोग मोकामा आते थे और सस्वस्थ होकर अपने घर वापस जाते थे.उतम प्रसूति के लिए ये पुरे बिहार का सबसे सुरक्षित अस्पताल में से एक था मोकामा का नाजरथ अस्पताल .आज मोकामा का ये गौरव बोझ और भार भर है.इसी तरह मोकामा का रेफरल अस्पताल भी अनेकों उपकरणों और अच्छे डॉक्टर से भरा पड़ा था.गरीब गुरबो को दवाई भी मिल जाती थी .फिर नजर लग गई विकास पुरुस की और सारे उपकरण यंहा से दूर भेज दिए गये,डॉक्टर का ताबल्दा करवा दिया गया.आज मोकामा के इस अस्पताल को खुद ही इलाज की जरूरत है.मोकामा के किसी भी जनप्रतिनिधि का ध्यान मोकामा के स्वास्थ व्यवस्था पर शायद इसलिए नही जाता क्योंकि उनके घर में अभी तक किसी को इसकी जरूरत नहीं पड़ी. जब कभी थोरी जरूरत हो तो उनके लिए पटना और दिल्ली दूर नहीं.फिलहाल अमरजीत कुमार के मौत पर गम मनाइये और भारत बंद और चुनाव चुनाव खेलिए .