मोकामा
साहित्य

विश्व कविता दिवस पर मोकामा की एक कविता

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उत्तम नदी अति पावनी गंगा,घाट पर जाते ही मन हो जाता चंगा।
चलते हैं जब चर्चे मोकामा के हाल के,निकल पड़ती है बातें फिर मोकामा के टाल की।
हंसी-खुशी, शोर-शराबे, हल्ले-गुल्ले,बड़ी रंगीन हैं यहां के गलियां, टोले और मुहल्ले।
मजलिस लगी रहती है दालानों और बंगलों पर,टूट पड़ते हैं मोकामावासी लाल और सफेद रसगुल्लों पर।
घूमनें जाएं मोकामा बाजार तो लगे यह छोटी कलकत्ता,आबादी, मस्ती, रौनक का जोर नहीं यहां अलबत्ता।
बन्दना