” नितीश जी की मोदी राजनिती “

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मैंने इससे पहले नितीश जी के अधिकार यात्रा पर अपनी राय रखी थी / मैं समझता हू कि इसपर मत भिन्नता हो सकती है और होना भी चाहिए / लकिन  पिछले दिनों जब जद ( उ ) की राष्ट्रीय कार्य कारनी की बैठक में जो राजनीतिक प्रस्ताव लाया गया उससे कई जानकारों को बड़ी हैरानी हुई / आम तोर पर किसी भी पार्टी की बैठक उसके दिशा और दशा के आकलन और आगे की रन निति तय करने के लिए होती है /
बैसे राजनितिक दलों में कुछ पंक्तियाँ तो तकिया कलाम हो गई है , जैसे की किसी पार्टी को चुनाव में जीत मिली तो  ” ये हमारे पार्टी के नेता , कार्य करता और नीतियों की जीत है / हमने जो प्रोग्राम जनता के सामने रखा था उसको जनता ने समर्थन दिया / ” और कुछ पार्टी में तो उनके नेता ही सब कुछ होते है लकिन इतना अंतर होता है कि जीत हमेशा उनके नेता के प्रोग्रेम को मिलता है और हार कि जिम्मेदारी उनके नेता की कभी नहीं होती / और हारने के बाद हमेशा सभी पार्टियाँ यही कहती हैं कि ” हम इस हार कि बिबेचना करेंगे और तब हम आपको अपनी कमियों को बतायंगे/ ” लकिन आज तक किसी पार्टी ने कुछ न ही बताया है न ही कुछ सिखा है /
लकिन मेरी समझ कुछ बिन्दुओं को रेखांकित करती है , जैसे कि बिहार में शाशन करने बाली पार्टी बदल गई लकिन दिल्ली में बिहार में  सरकार चलाने बाली पार्टी का प्रतिनिधितुअ बही लोग कर रहे हैं , यही लोग पिछली सरकार के प्रबक्ता हुआ करते थे जैसे शिवानन्द तिवारी , अली अनबर अंसारी और सबीर अली / इन्ही लोगो ने लालू जी की डफली खूब बजाया है और आशा करता हूँ की अगर अगली बार लालू जी फिर सत्ता में आते हैं तो ये लोग उनकी पार्टी में आगे की सीट पर बैठे होंगे /
दूसरी बात जो मैं समझ रहा हुईं कि नितीश जी को अपनी सरकार के बिकास की सीमा समझ आ गई है / उनको पता है की इसके आगे की चुनोतियों से पार पाना उनके लिए या उनकी सरकार के लिए आसान नहीं है / बिहार की जनता को अब बिजली , रोजगार , शिछा और स्वस्थ्य चाहिए जिसे पूरा करना उनकी सरकार के लिए बहुत आसान नहीं है / इसलिए उनको एक भाब्नातमक मुद्दे की तलाश है जिसे अगले चुनाव में परबान चढ़ा सके / फिर नितीश जी तो बही हैं जिनको काम नहीं करने के कारन बाढ़ की जनता ने नकार दिया था / शायद उनके पार्टी के लोग इतने मदमस्त हैं की उनकी हार भूल गए हैं /
नरेंद्र मोदी जी अकेले मुख्य मंत्री हैं जो कुछ सालो से डॉ. मनमोहन सिंह जी पर सीधे वार कर रहे हैं , ये उनकी रन निति का हिस्सा है / नितीश जी और उनकी पार्टी के लोगो को लगा की जो ब्यक्ति सुर्ख़ियों में है उसी को निशाने पर रखो ताकि उनकी पार्टी को भी प्रचार मिल जाये / क्योंकि नितीश जी जानते हैं की अभी उनको दिल्ली की राजनिती में तो आना नहीं है तो अगर उनकी पार्टी केंद्र की सत्ता में न हो तो भी उनको कोई अंतर नहीं आएगा, क्योंकि उनके पार्टी को इतनी सीट तो अबश्य मिल जाएँगी की किसी भी सरकार को समर्थन देकर कीमत ली जा सकती है  / लकिन शरद यादव जैसे नेताओं की बेचैनी भी समझी जा सकती है उनको भी अंदाजा है कि इस खेल से राष्ट्रीय राजनिती करने वालों को कुछ नहीं मिलने वाला / क्योंकि सरकार बनाना और चलाना दो अलग अलग बातें हैं / तीसरे या चौथे मोर्चे कि सरकार बन नहीं सकती और बन भी गई तो चल नहीं सकती / आज जब देश कि कोई भी पार्टी कांग्रेस के ९ साल के शाशन के अपयश लेना नहीं चाहती , जिसने सरकार में भागेदारी कि ओ पार्टियाँ भी  कांग्रेस से किनारा कर रही हैं या किनारा करना चाह रही हैं , उस समय कांग्रेस के साथ जाना तो दूर उसके पास जाते हुए दिखना भी आत्म घाती कदम होगा / लकिन ये स्थिति कांग्रेस को बल देता है क्योंकि ये दिखना भी कि नितीश किसी भी स्तर पर नजदीक आ रहे हैं तो इससे उनको बाहर से समर्थन करने बाले दलों पर दबाव बनेगा कि अगर उनके अलग होने के बाद नितीश जी ने सरकार बचा लिया तो उनका बचना मुश्किल है /  और नितीश जी को लगता है कि  बिना कांग्रेस के साथ गए अगर ओ मोदी जी कि आलोचना करते रहते हैं तो केंद्र सरकार से धन तो अब्श्ये मिल जायेगा और कांग्रेस को भी कोई दिक्कत नहीं है उसने भी नितीश जी को बिशेष राज्य के दर्जा का लोली पॉप दिया हुआ है / कांग्रेस को जितना लाभ मोदी जी की आलोचना से नहीं मिलेगा उससे ज्यादा नितीश जी के सवाल से हासिल होगा और नितीश जी को बदले में कुछ मदद केंद्र से मिल जाएगी , बैसे भी नितीश जी राज्य सभा की सदाशयता भी उद्योग पतिओ की देते हैं  / और नितीश जी ये भूल रहे हैं की जिस कांग्रेस को सेक्युलर होने का अघोसित प्रमाण पत्र दे रहे हैं उस कांग्रेस पर १९४७ के कोलकत्ता दंगों से लेकर १९८४ के दिल्ली के नर संहार से होते हुए  २०१२ के उदयपुर दंगो तक न जाने कितने दंगो में हाथ रंगा हुआ है /एक धरा बीजेपी में भी है जो की मोदी जी को आगे आने नहीं देना चाहते क्योंकि उनको लगता है की मोदी को रोकना नामुमकिन सा है , तो उन्होंने नितीश जी को समर्थन किया हुआ है / ये बीजेपी की अंदरूनी राजनिती है / लकिन नितीश जी को इस राजनिती में इतना आगे नहीं आना चाहिए था / आज देश में कांग्रेस के खिलाफ माहौल बना हुआ है , कही लोक सभा के चुनाव में भी  जनता ने उ प की तरह जनादेश दिया तो नितीश जी को झटका लग सकता है / क्योंकि चुनाव में ये भी हो सकता है की बिकल्प के अभाव में जनता बीजेपी को ही समर्थन दे दे / उ प्रदेश में भी तो यही हुआ /
मुझे आज से २० साल पहले ही गुजरात जाने का अब्षर मिला , मैंने उस समय जो बिकास बहाँ देखा था आज भी बिहार उससे महफूज है / फिर २० सालो में गुजरात ने और तरक्की कि और गुजरात किस तरह का राज्य है उसे देश के सबसे बड़े उद्योग के मालिक ने सिद्ध किया जब देश के सभी राज्य ने नानो के कारखाने के लिए उनको अपने यहाँ बुलाया तो उन्होंने वेस्ट बेंगोल में हाथ जलने के बाद सिर्फ गुजरात जाने का निर्णय किया  ,  क्या नितीश जी ने बिहार को इस स्थिति में ला दिया है की टाटा को बिहार आने का न्योता दे सके / बिहार की बिकास  यात्रा तो अभी शुरू ही हुआ है और नितीश जी और उनकी पार्टी ने अभी से ही बिहार को पूर्ण बिकषित राज्य समझ लिया है / मैं नितीश जी से जानना चाहता हूँ की समग्र बिकास क्या होता है क्या पिछले चुनाव में जीन लोगो ने उनके गठ बंधन को वोट नहीं दिया था उनको उनके बिकास का लाभ नहीं मिलता है / नितीश जी ने अपनी पार्टी को बहुत ही मुश्किल में ड़ाल दिया है , इस राजनिती से पता नहीं अल्प संख्यक वोट कितना मिलता है लकिन सवर्ण वोट उनसे अलग हो जायेगा /

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