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“मोकामा टाल से 10 दिनों में पानी नहीं निकला तो दलहन पर संकट”

मोकामा टाल इलाके को दाल का कटोरा कहा जाता है, लेकिन वहां अब भी पांच से छह फुट बाढ़ का पानी जमा है। कृषि विज्ञान केन्द्र के वरीय कृषि वैज्ञानिक विष्णुदेव सिंह के अनुसार मोकामा टाल इलाके से 10 दिन के अंदर पानी नहीं निकला तो दलहन की खेती संकट पर संकट आ जाएगा।

रबी मौसम में दलहन की बुआई 15 अक्टूबर से 10 नवम्बर तक की जाती है। मोकामा के टाल में 20 हजार बीघा व मोकामा टाल में 56 हजार बीघा के साथ बड़हिया, ऊंटा और मरांची के लाखों एकड़ में दलहन की खेती होती है। 20 अक्टूबर को बीडीओ सहित कई अधिकारी मोकामा के डुमरा गांव के पास हेमजा कट से पानी निकालने गये थे, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के बाद खाली हाथ लौट गये।

चने की खेती हो सकती है बम्पर : इस साल चने की खेती बम्पर हो सकती है क्योंकि इस साल मोकामा टाल इलाके में पानी भरा हुआ है। पानी निकलने में 20 दिन लग सकते हैं। मसूर की फसल कम अवधि में तैयार होती है। इस वजह से मसूर की खेती प्रभावित हो सकती है। चने की फसल तैयार होने में 130-150 दिन लगते हैं। ऐसे में अगर किसान लेट भी चने की बुआई करते हैं तो अच्छी उपज होने की संभावना है।

दूसरा कारण यह भी है कि पिछले तीन-साल में चने की कीमत 28 रुपये किलो हो गई थी। इसके कारण किसानों को चने की सही कीमत नहीं मिल पा रही थी। इससे चने की खेती से विमुख होने लगे थे। अभी मार्केट में चना 140 रुपये किलो मिल रहा है। इसको देखते हुए किसान चने की खेती करने पर अधिक जोर दे रहे हैं।486171079-River_6

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