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ओछी सोच

किसी गाव में एक किसान  रहते थे। पति जो भी बोलते पत्नी ठीक उसके विपरीत करती थी। नतीजा ये हुआ उसे कभी कभी भूखे सो जाता था क्योकि उसकी पत्नी जो उसे पसंद रहता पत्नी ठीक उसके विपरीत बनाती थी। कुछ समय बीत जाने पर उसका पति समझ गया की मेरी पत्नी मेरे विपरीत सोचती हैं। उसके वाद कहना ही क्या जो भी बात पत्नी से करानी होती वो उसके विपरीत बोलता और जैसे ही वो विपरीत पत्नी सही से वो काम कर देती थी।  एक दिन गाव में अचानक बाढ़ आयी गाव के लोग अपने अपने जानवर को लेकर गाव से पालयन करने लगे। इस किसान के पास के एक भैंस था। किसान और उसकी पत्नी को नदी पर करना था तब किसान ने बोला भैंस की पुंछ पकड़ कर पहले में पार करता हूँ दूसरी छोड़ पड़ पहुंते में इसे वापस भेज दूँगा तुम ठीक उसी प्रकार से पकड़ तुम भी चले आना। किसान ने ये बात ठीक से पूरी तरह से कहा भी नहीं था। उसकी पत्नी तुरंत बोल उठी पहले में नदी पार करूंगी। किसान के लाख समझाने पड़ भी वो नहीं मानी मानती भी वो उसे तो विपरीत सोचने की आदत जो थी। किसान की पत्नी भैंस की पुंछ पकड़ कर आधी नदी ही की थी उसकी पति का आवाज आया ठीक से पकड़ना छोड़ ना मत  इतना कहते ही उसकी पत्नी ने भैंस की पुंछ छोड़ दी और नदी में डूब गयी। सूर्य राज

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