Home » शिक्षा » बसंत के आगमन पर………..

बसंत के आगमन पर………..

बसंत सुंदर या तुम सुंदर हो
इसका निर्णय करेगा कौन!
मानव की तो क्या शक्ति है
देव दानव भी इस पर मौन!!
दोनों ही मस्ती से भरती हैं
दिव्यता का देतीं अहसास!
मेहनत से जो नहीं मिलता है
वह मिलता इन दोनों के पास!!
रंग- बिरंगी तबियत दोनों की
निकाले न निकले कोई कमी!
तीन लोक में वह कहां मिलता
वह उपलब्ध है सुनो इसी जमी!!
इन दोनों का संग होने पर यहां
सुख नहीं पगले आनंद मिलता!
मुलाधार चक्र से लेकर
सहस्त्रार सहस्रदल खिलता !!
विरह की अग्नि कैसे तपाती
वही जाने इसे जो तपता है!
गर्दन उतरे आह न निकले
हर पल उसका नाम जपता है!!
बसंत देवी स्वागत है तुम्हारा
सहेली लगती तुम मेरे हमदम की !
मिल- मिलकर जो मिल नहीं पाता
याद दिलाती बस विरह व गम की !!
याद ही तुम्हारी तृप्तिदायक है
नहीं मिलती हो क्या पछताना!
दूर ही दुर बस रहना है तुम्हारा
बसंत बहार से चाहत पहुंचाना!!
भाग्यशाली हम नहीं हैं इतने सुनो
सरेआम मिल सकते जो खुलकर!
दुनिया अभी भी पिछडी हुई है
नहीं रह सकते प्रेम में मिलकर !!
जैसी भी हो ओ बसंत की सहेली
रहो मौज से तुम दोनों की याद में!
दिव्य मिलन न बस देहों का मिलना
मिलन ऊर्जा का; न बाहरी स्वाद में!!
सभी सुनों इस धरा के मेरे भाईयों
क्या हुआ जो यहां हम नहीं मिले!
सभी हेतु मेरी प्रार्थना है भगवन
सबके जीवन में जरुर प्रेम खिले!!
बसंत सुनो सबकी मदद करना
कोई भी न रहे यहां शुद्ध प्रेम खाली!
पवित्रता से जो भी कदम बढाए
रक्षा करना उसकी जैसे उपवन माली!!
-आचार्य शीलक राम

Mokama  Online

Mokama Online

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *