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सुल्तानपुर: एक परिचय!

बिहार के पटना जिला के मोकामा प्रखंड में मोकामा से 7 किलोमीटर पश्चिम में एक गावं है ‘सुल्तानपुर’ | यह गावं मोर पश्चिम ग्राम पंचायतके अंतर्गत मोर से 2 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है | इस गावं के उत्तर दिशा में गंगा नदी है तो दक्षिण में दिल्ली हावड़ा रेल लाइन गुजरती है, जबकि नेशनल हाइवे 31 गावं के बीच से गुजरती है | काली मिटटी, दोमट मिटटी एवं बलुई मिटटी( टाल, भीठा और दियारा) अर्थात खेती के सभी फसलों को उपजाने हेतु प्रकृति ने यहाँ दिए है इस गावं को | आइये इस गावं के कुछ विशेषताओं पर प्रकाश डाले:–

१.      शैक्षणिक पक्ष:- आजादी के दौरान से ही इस गावं के विद्यार्थी पटना विश्वविद्यालय, इलाहावाद विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय जैसे देश के अग्रणी संस्थानों में शिक्षा प्राप्त कर शिक्षक, प्रोफ़ेसर, इंजीनियर, प्रखंड पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, मजिस्ट्रेट, चार्टर एकाउंटेंट, इंस्पेक्टर, दरोगा, रेलवे, भारतीय डाक मेंएवं सामाजिक कार्यकर्ता बने | पुरुष के साथ-साथ महिला भी शिक्षिका एवं व्याख्याता पद पर कार्य किया |

२.      सामाजिक पक्ष:-एक छोटा गावं होने के वावजूद भी यहाँ अनेक जातियां( भूमिहार, ब्राह्मण, यादव, कोईरी, कुर्मी, धानुक, कुम्हार, बढ़ई, नाई, दुसाध, धोबी, मोची, डोम इत्यादी) निवास करती है और कृषि कार्यों व सामाजिक उन्सवों के लिए एक दूसरे पर निर्भर है |इस गावं में वैसे तो सरकारी प्राथमिक स्वाथ्य केन्द नहीं था लेकिन स्वर्गीय नंदकिशोर दा ने अपने घर पर ही स्वास्थ्य केन्द्र बनाकर जो इस क्षेत्र के लोगों की सेवा की है वो आज भी लोग याद करते है, क्योकि दूर-दूर से लोग पुराने जख्मों का इलाज करने उनके पास आते थे और वो न्यूनतम फीस या कभी कभी निःशुल्क भी इलाज किया करते थे |इस गावं में आधुनिक कृषि के प्रणेता स्वर्गीय युगल शर्मा थे जिन्होंने कृषि को अनाज उत्पादन से आगे जाकर देखा और फल, फूल की खेती का विस्तार किया | उनकी प्रेरणा को आज के युवा आगे ले जा रहे है | कहा जाता है कि सामाजिक समरसता का इससे बड़ा उदहारण और क्या होगा कि 1980 के दशक तक मोकामा थाना में इस गावं का कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं था |

३.      धार्मिक-सांस्कृतिक पक्ष:- मोकामा अंचल तुलसी साहित्य परिषद के सह संयोजक स्वर्गीय साधू शरण शर्मा भी रहे और स्वर्गीय शिववालक शर्मा इसके सदस्य रहे दोनों इसी गावं से थे | पूरे अंचल में तुलसी जयन्ती परंपरागत रूप से घूम-घूम कर मनाई जाती थी जिसमे राष्ट्र कवि स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर भी शिरकत कर चुके है | इसके साथ ही यहाँ शरद पूर्णिमा भी धूमधाम से मनाने की परंपरा रही है | सुल्तानपुरमें काली पूजा का प्रारंभ 1947-52 के बीच माना जाता है जो कि प्रत्येक वर्ष अब भी लक्ष्मी पूजा के रात्री में भगवती स्थान में मूर्ती स्थापित कर युवाओं के द्वारा मनाया जाता है |

४.      राजनैतिक पक्ष- वर्तमान में युवा पीढ़ी राजनीती में भी हिस्सा ले रही है और परिणाम स्वरुप पंकज शर्मा कि पत्नी मंजू देवी प्रखंड प्रमुख है जबकि स्वराज शर्मा कि पत्नीसविता शर्मा जिला परिषद सदस्य रह चुकी है | हाल में हुए विधान परिषद स्नातक चुनाव में पटना क्षेत्र से इसी गावं के व्यंकटेश शर्मा दूसरे स्थान पर रहे |

   हम सब ग्रामवासी इस गावं के उज्जवल भविष्य की कामना करते है | धन्यवाद

मार्गदर्शन एवं सहयोग:- रजनीश शर्मा

संकलन एवं संपादन:- नीरज पराशर

सन्दर्भ पुस्तक:- गावं गौरव(मगही भाषा)प्रकाशित सन 2005.

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8 Responsesso far.

  1. main v ishi gaon ka hu. apko sultanpur k cricket team par v kuch likhna chahiye tha. har jagah se har k ati

  2. Raju Kumar says:

    mai to us prakhand ka hu lekin mujhe garv hai ki mere parkhand mai ek esha gaon hai jaha officer , samajik karyakata se le kar neta bhi hai

  3. Kumkum Jha says:

    Shayad main us gaon jati v to apke gaon k bare me itna nahi jan pati lekin isko padhne k bad gaon ka pura picture clear ho gaya thanx

  4. Smit Kumar says:

    Sir ji, hamare gaon ke bare me sabko itni jankari dene ke liye apka bahut bahut dhanyabad.
    Ek baat aur batana chahta hoon ki hamare gaon me ek library aur primary school ki v suvidha hai. Par dhora sa dookh is baat se hai ki itna political approach hone ke baad v library ka building gir chuka hai aur school ki isthiti v bahut achchi nahi hai, ye log is taraf thora dhyan dete to achcha hota.
    Thanx.

  5. sultanpur ke rahnewale hai isiliye apko apne gaon mein khubiyan hhi dikhti ai waise hmara itihas malum ho ginij book mein darj hai

  6. Nice introduction of a small village.

  7. मोकामा आन लाइन, आपको वहुत, वहुत धन्यवाद. सुल्तानपुर जैसे गांव की कहानी छाप कर एक अनूठा कायं िकया है . इस गांव तक पहुचने का रास्ता और महत्वपूणॆ व्यक्ितयाे के नंबर भी छापने का कष्ट करें. अाज के समाचार पऩ और मीिडया शहरोन्मुखी हैं. िबहार के ऐसे गांव पर हर देशवासी काे घमंड है.
    राम चंद़ शमाॆ,
    बीडीओ काेरांव,
    इलाहाबाद.

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