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Author Archives: sudheer

स्त्री की स्त्री दुश्मन – सुधीर मौर्य

सच कहें तो स्त्री विमर्श खोखलेपन से गुज़र रहा है। ऐसा खोखलापन जिसे खुद स्त्री ने निर्मित किया है। इस खोखलेपन में वो खुद सहर्ष रहने को तयार है कभी किस्मत, कभी समाज तो कभी पुरुष को दोष देकर। स्त्रियों ने जिस तीव्रता से उच्च शिक्षा ग्रहण की उस तीव्रता से वो खुद को पुरुष […]

मुज़फ्फरनगर से उठते धुंवे के सवाल – सुधीर मौर्य

मुज़फ्फरनगर के दंगो की आंच की आंच में सवाल मुह बायं खड़े हैं। ऐसे सवाल जिनके जवाब हमें अब हर कीमत पे तलाशने होंगे। ऐसे सवाल जो रूहों को भी बेचैन कर रहे हैं, ऐसे सवाल जो हर वक़्त अंतर्मन को कचोटते रहते हैं। क्या अपनी मां – बहनों की अस्मत की रक्षा करना गुनाह […]

ख़त और लालटेन की रौशनी…सुधीर मौर्य!

आम और महुए से झड के आती हवाओं ने जब कभी जिन्दगी के वर्क पलते… …मरुस्थल में कटहल के पेड़ों से, उसे बबूल के कांटे चुनते पाया वो बबूल के कांटे जो उग आये थे उस राह के दोनों तरफ के मखमली पेड़ों पे जिनके बीज बोये थे तुमने अपने फरेब के साथ मेरे जले […]

वो हिन्दू थे – सुधीर मौर्य

सुधीर मौर्य  =========   उन्होंने विपत्ति को आभूषण की तरह धारण किया उनके ही घरों में आये लोगों ने उन्हें काफ़िर कहा क्योंकि वो हिन्दू थे।   उन्होंने यूनान से आये घोड़ो का अभिमान चूर – चूर कर दिया सभ्यता ने जिनकी वजह से संसार में जन्म लिया वो हिन्दू थे।   जिन्होंने तराइन के […]

पराधीन रिंकल – सुधीर मौर्य !

Sudheer Maurya ================ कल 24 फ़रवरी को गरीब लड़की रिंकल को कैदी का जीवन बिताते हुए एक साल पूरा हो जायेगा। वो अब तक कैदी है, वो आज़ाद होगी भी या नहीं, मालूम नहीं। हम उसके लिए शायद बहुत कुछ कर न पाए, उसकी आज़ादी के लिए पुरे प्रयास हम न कर सके सो अगर […]

समाज और स्त्रियों का जबरन अपहरण!

 Sudheer Maurya ‘Sudheer’ **************************** संसार का निर्माण होते ही शायद स्त्रियों को पुरषों का गुलाम समझा जाने लगा।एक ही स्थान से, एक ही प्रक्रिया से पैदा होने के बावजूद उन्हें कभी भी पुरषों के समकक्ष स्थान  प्राप्त न हो सका। भारतीय संस्क्रीत में स्त्रियों को माँ , बहन और बेटी के रूप में पूजनीय माना गया है। पर  पत्नी […]

कौन कहता है ये इक्कीसवी सदी है!

Sudheer Maurya ‘Sudheer’ ******************************** आज कल बलात्कारियो को क्या सजा मिलनी चाहिए, ये चर्चा बड़े जोरो पर है। जहाँ तक में मानता हूँ ये चर्चा का विषय होना ही नहीं चाहिए, बलात्कारी को हर हाल में अधिकतम सजा मिलनी ही चाहिए। बलात्कारी, नाबालिग हो सकता है में इस बिंदु को सिरे से ही खारिज करता हु। कोई […]

कैद में मानवता.

सिसक रहें है ज़मीं के ज़ख़्म रिस रहा है लहू पहाडो के बदन से जल रहें हैं जंगल के जंगल हर रोज़ शमशान में इंसान अब इंसान कहाँ रह गया है नोचने लगा है बदन अपने ही जन्मदाताओं का अपने ही पालनहार का हाँ वो बदल रहा है आदमी से हैवान में अब शहर,शहर नहीं […]

कल्याणी का कोप!

************************** जसिरापुर और नसिरापुर दो गावं. इन दोनों गावं को विभाजित करके बहती हुई कल्याणी नदी. रात को जब इन गावों में बसे लोग दिन में खेत में किये गए हाड़तोड़ मेहनत की थकान खटिया पर लेट कर दूर कतरे उस समय कल्याणी की बहती धरा के कल-कल की ध्वनि उन थके-हारों किसानो पर तनिक […]