अनुशासन के पर्याय फुची दा हुए सेवानिवृत्त ,रुद्रावती विद्यालय में आखिरी दिन

पिछले कई दशक से रामकृष्ण रुद्रावती उच्च विद्यालय में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी रहे रामसागर सिंह उर्फ़ फुची दा आज अपने पद से सेवानिवृत्त हुए .उच्च विद्यालय में बच्चे अपना बचपना छोड़ किशोरावस्था में रहते है.पढाई और खेल कूद के साथ साथ वो हर अच्छे बुरे चीजो को अपना लेते है जो संभवतः उनके जीवन को बर्बाद कर दे.मोकामा के 90 से लेकर 2005 तक का खुनी माहौल जब बच्चे आसानी से अपराधियों के चंगुल मैं फस जाते थे .उनकी एक गलती उन्हें अपराध की दुनिया मैं धकेल सकती थी जन्हा से वापस आना असंभव होता है.फुची दा ने न केवल अपना स्कूल का काम किया वल्कि हमेशा विद्यालय के बच्चो को डरा कर, धमका कर ,फुसला कर सही रास्ते पर चलने को प्रेरित किया .कुछ बच्चे उन्हें उस समय समझ नहीं पाए और वन्ही से अपराध की दुनिया के रास्ते इस दुनिया से भी रुखसत हो गये .पर फुची दा सेकड़ो बच्चो को सही राह दिखाने में कामयाब रहे .

विद्यालय में फुची दा एकदम कड़क थे ,हर किसी के मन में उनका खौफ होता था ,जरूरत पड़ने पर वो पिटते भी थे.पर अन्दर से एकदम कोमल एक बाप की तरह हर बच्चे के अभिभावक जो बच्चो के जीवन को सवारने के लिए हमेशा तत्पर रहे.घर से लेकर विद्यालय तक सेकड़ो बच्चो के गार्जियन रहे .सकरवार टोला के रहने वाले फुची दा जरूरत पड़ने पर बच्चो के घर तक आकर उन्हें प्रेरित करते थे.अपने वक्तिगत जीवन में दुखों के पहाड़ पर बैठे ये हर समय बच्चे का भला ही करते रहे .इन्होने राजा बाबु ,सीताराम बाबु,सुरेश बाबु जैसे अनुशासन प्रिय शिक्षक के साथ काम किया.95 से लेकर 2005 के दौर में भी उन्होंने विद्यालय को सवारने की हर कोशिश की जब हर सरकारी स्कूल महज एक कंक्रीट का भवन रह गया था.फुची दा ने विद्यालय का वो स्वर्णिम दौर भी देखा जब पंकज कुमार आई ए एस और प्रभात कुमार टेकरीवाल नासा वैज्ञानिक जैसे होनहार पढाई कर रहे थे.उन्होंने वो दौर भी देखा जब उनके विद्यालय के बच्चे अपराध के दुनिया के सिरमौर भी बन रहे थे.आज उनके सेवानिवृत्त होने के मौके पर उन्हें विदा करने मोकामा के अभिवावक भी आये ,शिक्षक और बच्चों ने उनके विदाई समारोह मैं उनके लिए अपना आभार जताया.पारम्परिक तरीके से उन्हें सम्मान के साथ सेवानिवृत्त किया गया.
मोकामा ऑनलाइन शिक्षा के मंदिर के सबसे छोटे पुजारी रामसागर सिंह उर्फ़ फुची दा के सेवा सेवानिवृत्त होने पर उन्हें धन्यवाद देता है .आपके वजह से सेकड़ो बच्चे आज सुरक्षित और सफल हैं.ईश्वर ने आपको इन बच्चों के जीवन में खुशियाँ देने का माध्यम चुना और आपने बखूबी इसे निभाया.आप सदा स्वस्थ रहें.उम्मीद करते है की आप भी सीताराम बाबु की तरह मरते दम तक रुद्रवती विद्यालय से कभी रिटायर्ड नहीं होंगे ,सरकार भले ही आपको वेतन न दें पर आप रुद्रवती को अपना प्यार हमेशा देते रहेंगे .आपको सेवानिवृत्त जीवन की बहुत बहुत शुभकामना .

अमरनाथ की यात्रा पर रवाना हुआ मोकामा के श्रद्धालु का दूसरा जत्था

अमरनाथ की यात्रा पर रवाना हुए मोकामा के श्रद्धालु |मोकामा। बाबा बर्फानी यानी अमरनाथ यात्रा के लिए मोकामा से श्रद्धालु भक्तों का समूह 30 जून को रवाना हुआ। ‘बम बम भोले’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गुंजायमान मोकामा स्टेशन पर अमरनाथ यात्रियों को विदाई देने लिए लिए बड़ी संख्या से मोकामा वासी उपस्थित हुए। सकरवार टोला निवासी ॐ प्रकाश चीकू ने बताया कि मोकामा वासी हर साल बाबा बर्फानी के दर्शन को जाते हैं. हर साल करीब 300 मोकामा क्षेत्र वासी अमरनाथ की यात्रा करते हैं। इस बार भी पहला जत्था 27 जून को रवाना हुआ था जिसमे ३५ लोग शामिल था.आज भी 25 लोगों का जत्था यात्रा पर निकल रहा है . जबकि अगले कुछ दिनों में और भी श्रद्धालु अमरनाथ जायेंगे। ॐ प्रकाश ,प्रभात ,गोपाल,दीपक,सुनील,रामबरन सिंह, सुनील कुमार, चन्दन कुमार,विजय सिंह सहित दर्जनों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के जयकारे लगाते हुए अमरनाथ को रवाना हुए.

गौरतलब है कि इस बार अमरनाथ यात्रा के लिए इलेक्ट्रोमेगनेटिक चिप, बाइक, बुलेटप्रूफ एसयूवी से लैस पुलिस काफिले और जगह-जगह बुलेटप्रूफ बंकर जैसे व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं.आपको बता दें कि दक्षिण कश्मीर स्थित हिमालय में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर बसी अमरनाथ गुफा में हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए अब तक दो लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने रजिस्‍ट्रेशन कराया है.

मोकामा की बेटी 3 बार मेट्रिक फेल ,तीनो बार गणित में 17 नंबर ,संयोग या साजिश

बिहार बोर्ड से छात्रा ने पूछा सवाल, मैट्रिक में तीन बार से एक ही पेपर में समान अंक क्‍यों?बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में फेल कर रही एक छात्रा को तीन बार से एक ही विषय में समान अंक आ रहे हैं। छात्रा का कहना है कि ऐसा संभव नहीं, उसे इस बार करीब 70 अंक की अपेक्षा थी।अगर यह संयोग है तो अद्भुत है। अगर नहीं तो बड़ा सवाल भी है। बिहार विद्यालय परीक्षा समीति (बिहार बोर्ड) के हाल में जारी मैट्रिक रिजल्ट में एक छात्रा को एक ही विषय में तीसरी बार 17 अंक आए हैं। छात्रा शुक्रवार को बिहार बोर्ड कार्यालय में अपनी ऐसी समस्‍याओं के साथ पहुंचे सैकड़ों अन्‍य छात्र-छात्राओं में शामिल थी।लगातार तीन परीक्षाओं में समान नंबर.पटना के मोकामा की रहने वाली छात्रा प्रियंका कुमारी पिछले साल से मैट्रिक की परीक्षा में फेल कर रही है। वजह है गणित में 17 अंक। मोकामा के मोर स्थित श्रीभगवती हाईस्कूल की छात्रा प्रियंका को 1917 की मैट्रिक परीक्षा में गणित में 17 अंक आए। उसने कंपार्टमेंटल परीक्षा दी। उसमें भी गणित में 17 अंक हीं आए। फिर 2018 की परीक्षा के हाल में घोषित रिजल्‍ट में भी प्रियंका को गणित में 17 अंक ही आए हैं। छात्रा ने इसपर सवाल उठाते हुए अनियमितता की आशंका जाहिर की है।,/p>

छात्रा का दावा, आने चाहिए अधिक नंबर.प्रियंका का कहना है कि उसकी परीक्षा ठीक गई थी तथा उसे 70 के आसपास अंक आने चाहिए। उसके अनुसार मूल्‍यांकन में गड़बड़ी की गई है। हालांकि, बोर्ड के एक अधिकारी ने नाम नहीं देने के आग्रह के साथ कहा कि गोपालगंज में मैट्रिक की कॉपियां गायब हुईं हैं तो ऐसा नहीं कहा जा सकता कि कोई गड़बड़ी हुई ही नहीं है। लेकिन, जरूरी नहीं कि यह गड़बड़ी का ही मामला हो।

4 महीने से सरकारी अस्पताल में जड़ा है ताला ,44 गावं परेशान ,कितनी और जान चाहिए जनप्रतिनिधि जी

इंसान का मरना उतना बुरा नहीं है जितना उम्मीद का मर जाना.मोकामा को मोकामा के ही जनप्रतिनिधियों ने शमशान का शहर बनाने का निर्णय ले लिए है .बिहार का गौरव कहे जाने वाले नाजरथ अस्पताल के बंद होने के बाद तो मोकामा के लोग हर छोटी मोटी दुर्घटना और बिमारी से भी मर जाने लगे है .किसी भी दुर्घटना में गोल्डन ऑवर का बहुत महत्त्व होता है .यानि की अगर एक घंटे के अन्दर अगर रोगी को अस्पताल पहुचाया जा सके तो उसकी जान बचने की सम्भावना ज्यादा होती है . अगर आप मोकामा के हैं और अगर आपका दुर्घटना हो गया तो यकीं मानिये स्वय इश्वर भी आपको बचाने नहीं आयेंगे ,क्योंकि मोकामा में अब एक भी अस्पताल चालू नहीं है कुछ है भी तो डॉक्टर या दावाई की राह देख रहा है .मोकामा के घोसवरी प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चार महीनों से तालाबंदी है.कोई सुनने वाला नहीं है हमारे जनप्रतिनिधि तो मोकामा के नाम से ही चिढ़ते है उन्हें सिर्फ चुनाव में मोकामा याद आता है.सभी के सभी चाहे वो किसी भी सभा में मोकामा का पर्तिनिधितव कर रहे हों मोकामा उनके लिए कोई मायने नहीं रखता है.दुनिया के हर देश समाज में स्वास्थ सबसे बड़ी समस्या है इसपर कार्य करना न सिर्फ जनता की सेवा है बल्कि रोगी की सेवा को इश्वर की सेवा माना जाता है .पर मोकामा के चुने हुए नेता को किसी अस्पताल के बंद होने से कोई फर्क ही नहीं पड़ता .

घोसवरी प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चार महीनों से तालाबंदी है। तालाबंदी किसी और ने नहीं बल्कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने की है। हालांकि डॉक्टर इसके लिए अस्पताल में हुई तोड़-फोड़ को जिम्मेवार मानते हैं।अस्पताल में हुई तोड़फोड़ की घटना के बाद डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने इलाज बंद कर दिया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तालाबंदी होने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है।इस वजह से बंद हुआ पीएचसी .दरअसल, 1 मार्च को गर्भवती महिला की मौत से नाराज लोगों ने अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की थी। जिसके बाद अस्पतालकर्मियों ने पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं को ठप कर दिया। इलाज न होने से 44 गांव प्रभावित .पीएचसी बंद होने की वजह से बीते 4 महीने से लोगों का इलाज घोसवरी पीएचसी में नहीं हो पा रहा है। यहां तक की आठ पंचायतों के 44 गांवों के लोग बुरी तरह प्रभावित हैं। लोगों को इलाज के लिए मोकामा जाना पड़ता है या फिर सरमेरा जाना पड़ रहा है।सीनियर अफसरों से बात के बाद होगा कुछ.हालांकि घोसवरी बीडीओ की मानें तो उन्होंने उच्च अधिकारियों को इस मामले की जानकारी दे दी है। अब सीनियर अफसरों से बात कर बहुत जल्द स्वास्थ्य सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी।

सामूहिक उपवास पर उतरे टाल किसान ,मत्री उड़ा रहे है मजाक

दलहन और गेहूं की खरीद शुरू कराने तथा क्रय केंद्रों को खोले जाने में हो रही देरी से परेशान किसानों ने मोकामा प्रखंड मुख्यालय पर सामूहिक उपवास किया। मोकामा के अलावा घोसवरी प्रखंड मुख्यालय पर भी किसानों ने प्रदर्शन किया। किसानों ने दलहन की खरीद में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। किसानों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। टाल विकास समिति मोकामा-बड़हिया के संयोजक आनंद मुरारी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का संचालन अनंत कुमार ने किया। मौके पर युवा अधिवक्ता कुमार शानू, प्रणब शेखर शाही, स्वराज्य शर्मा, उमेश सिंह, जयकांत सिंह, सतीश सिंह, मनोज सिंह, विश्वनाथ, कन्हैया सहित अन्य मौजूद थे। किसान नेता गोरख सिंह ने कहा कि घोषणा के बावजूद सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रही है।

आर्थिक संकट .पूर्व आत्मा अध्यक्ष चंदन कुमार ने बताया कि मोकामा टाल के हजारों किसान दलहन की कम कीमतों तथा बाजार उपलब्ध नहीं होने से परेशान हैं। मजाक उड़ा रहे मंत्री ,किसान भावेश सिंह ने कहा कि किसान अपनी समस्याओं की बात करते हैं तो केंद्रीय कृषि मंत्री मजाक उड़ाते हैं।
घोषणा पर अमल नहीं ,टाल विकास समिति के संयोजक आनंद मुरारी ने कहा कि सहकारिता मंत्री ने खरीद की घोषणा की थी लेकिन अब तक अमल में नहीं लाया गया है। मोकामा में उपवास पर बैठे किसानों ने प्रदर्शन किया। (सौजन्य:-दैनिक भास्कर)

ज्ञान प्रभा के बच्चों की उत्कृष्ट सफलता

ज्ञान प्रभा के बच्चों की उत्कृष्ट सफलता|पुनः एक बार ज्ञान प्रभा के बच्चों ने इंटर और मैट्रिक परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। अपने मेहनत और लगन से सभी ने अच्छे अंक को प्राप्त किया। ज्ञान प्रभा के सभी बच्चे उत्तीर्ण हुए। सभी बच्चों को उनकी सफलता पर बहुत बहुत बधाई।विद्यार्थियों के नाम प्राप्तांक और श्रेणी इस प्रकार हैं.(कविता कुमारी-367- प्रथम),(आशना कुमारी – 364 – प्रथम),(आयशा कुमारी – 360 – प्रथम),(कोमल कुमारी – 358 – प्रथम ),(राधा कुमारी – 357- प्रथम),(सोनी कुमारी-355 – प्रथम),(अंकित कुमार -351- प्रथम ),(विकास कुमार – 350-प्रथम),(मिंकल कुमार -348- प्रथम),(शंकर कुमार – 339- प्रथम ),(ज्योति कुमारी- 336-प्रथम),(ज्योति कुमारी- 334 – प्रथम ),(अमीषा कुमारी -330 – प्रथम),(गुड़िया कुमारी -329 – प्रथम),(अमन कुमार – 317 – प्रथम),(अर्चना कुमारी -311- प्रथम),(राधिका कुमारी -305-प्रथम),(पल्लवी कुमारी -304- प्रथम),(बबली कुमारी – 304 – प्रथम),(खुशबू कुमारी – 303- प्रथम)(कुंदन कुमार – 303 – प्रथम)इसी प्रकार अन्य सभी विद्यार्थी अच्छे नंबर से पास हुए ।

अमरनाथ की यात्रा पर रवाना हुए मोकामा के श्रद्धालु

अमरनाथ की यात्रा पर रवाना हुए मोकामा के श्रद्धालु |मोकामा। बाबा बर्फानी यानी अमरनाथ यात्रा के लिए मोकामा से श्रद्धालु भक्तों का समूह २७ जून को रवाना हुआ। ‘बम बम भोले’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गुंजायमान मोकामा स्टेशन पर अमरनाथ यात्रियों को विदाई देने लिए लिए बड़ी संख्या से मोकामा वासी उपस्थित हुए। एलआईसी एजेंट मनोज कुमार ने बताया कि मोकामा वासी हर साल बाबा बर्फानी के दर्शन को जाते हैं. हर साल करीब ३०० मोकमा क्षेत्र वासी अमरनाथ की यात्रा करते हैं। इस बार भी २७ जून को रावण हुए समूह में ३५ लोग शामिल हैं जबकि अगले कुछ दिनों में और भी श्रद्धालु अमरनाथ जायेंगे। सुदर्शन , नन्दलाल सहित दर्जनों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के जयकारे लगाते हुए अमरनाथ को रवाना हुए.
गौरतलब है कि इस बार अमरनाथ यात्रा के लिए इलेक्ट्रोमेगनेटिक चिप, बाइक, बुलेटप्रूफ एसयूवी से लैस पुलिस काफिले और जगह-जगह बुलेटप्रूफ बंकर जैसे व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं.

आपको बता दें कि दक्षिण कश्मीर स्थित हिमालय में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर बसी अमरनाथ गुफा में हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए अब तक दो लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने रजिस्‍ट्रेशन कराया है.

जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए 5000 किलोमीटर की यात्रा कर रहा है मोकामा का बेटा

जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए 5000 किलोमीटर की यात्रा कर रहा है मोकामा का बेटा |राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता श्रीराम डाल्टन ने जल, जंगल और जमीन से जुडी पर्यावरण चिंताओं के प्रति देशवासियों को जागरूक करने के मकसद से एक भगीरथी अभियान चलाया है। मुंबई की फिल्मी चकाचौंध को छोड़ झारखंड का यह फ़िल्मकार बूंद-बूंद बचे पानी, तभी बचेगी जिंदगी के मकसद को लेकर मुंबई से झारखण्ड के नेतरहाट तक की ५००० किलोमीटर की पदयात्रा पर निकले हैं। मई और जून की इस तपती गर्मी में जब हम आप अपने घरों में कूलर और पंखे के तले बैठे हैं तब श्रीराम डाल्टन अपने साथियों के साथ महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिसा, बिहार होते हुए झारखंड तक पैदल यात्रा कर रहे हैं। वे नेतरहाट के बूढ़ा पहाड़ में पत्थलगड़ी करेंगे, जिसमें लोगों के लिए संदेश रहेगा कि नदी, पेड़-पौधे, पानी, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए आगे आएं।

प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करने के इस अभियान में बिहार के मोकामा के विभु वत्स भी शामिल हैं। यात्रा के बारे में विभु वत्स ने बताया कि आज पूरे देश में जल संकट की परेशानी है। न सिर्फ महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य बल्कि गंगा के तराई वाले राज्यों की स्थिति भी चिंतनीय बनती जा रही है। वे कहते हैं कि पिछले २० साल में मोकामा सहित पूरे बिहार में गंगा नदी में गाद इस कदर बढ़ा है कि आज गंगा का रूप कुछ जगहों पर नाले की शक्ल में होता जा रहा है। वहीँ महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में दर्जनों ऐसे जिले हैं जहाँ लोगों को बून्द बून्द पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। अगर इस विकट स्थिति को लेकर हम सजग नहीं हुए तो आने वाले समय में दुनिया पानी के बिना बेहाल हो जाएगी। वे अपने गृह क्षेत्र मोकामा का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि कुछ साल पूर्व तक हर वर्ष बारिश में मोकामा टाल डूबता है लेकिन अब तो सावन भादो में भी टाल सूखा रहता है। पटना में गंगा कई किलोमीटर दूर चली गयी है। जल संकट के इसी मुद्दे का समाधान तलाशने और जल, जंगल और जमीन से जुडी पर्यावरण चिंताओं के प्रति जागरूक करने के लिए विभु वत्स इस अभियान से जुड़कर श्रीराम डाल्टन के साथ यात्रा कर रहे हैं। श्रीराम डाल्टन और विभु वत्स के अतिरिक्त दिल्ली के मूर्तिकार सूरज सिंह, गुजरात के किसान एवं लेखक आशीष पीढ़िया, झारखंड के राज डाल्टन, मुंबई के मनीष राज और आरजी श्याम , यूपी के विति सिंह राजपुरोहित शामिल हैं।

श्रीराम डाल्टन की फिल्म द लास्ट बहुरूपिया (हिंदी) को वर्ष 2013 में गैर फीचर फिल्म (कला एवं संस्कृति) की कैटेगरी में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। उन्होंने अशोक मेहता जैसे फिल्मकार के साथ मिलकर नो इंट्री, किसना, फैमिली, गॉड तुसी ग्रेट हो, वक्त और मेरिडियन जैसी फिल्में बनाई है। मुंबई में रहते हुए भी श्रीराम डाल्टन का दिल झारखण्ड में बसता है। श्रीराम ने वर्ष 2015 में दोस्तों के साथ मिल कर नेतरहाट फिल्म इंस्टीट्यूट की स्थापना की थी। इसके तहत उन्होंने स्थानीय कलाकारों को अभिनय, निर्देशन के अलावा फिल्म निर्माण से जुड़ी बारीकियों से रूबरू कराया। 2016 में नेतरहाट में ही पानी विषय पर गांव-देहात के लोगों के साथ मिलकर 13 छोटी-छोटी फिल्में बनाईं। 2017 मे “जंगल” विषय पर 6 शॉर्ट और एक फुल लेंथ मूवी सबने मिलकर बनाईं। जल, जंगल और जमीन यानी प्रकृति संरक्षण पर उनकी नई फिल्म “स्प्रिंग थंडर” बनकर तैयार है।

बहरी सरकार को बापू का सन्देश

मोकामा बड़हिया किसानो का अनाज पिछले 3 सालों से घर मैं पीडीए है.कोई भी सरकार इसे खरीदने मैं दिलचस्पी नहीं दिखा रही.किसानो की बेटियां व्याही जनि है,बच्चे को पढने के लिए भेजना है,बुजुर्गों को दवाई देना है,बरसात से पहले छप्पर छड्वाना है.मगर कैसे 3 सालों से अनाज का एक दाना तक नहीं विका है .टाल क्षेत्र के किसानों की दयनीय स्थिति को लेकर तथा रबी फसल गेहूं एवं दलहन का क्रय केंद्र खोलने में हो रहे टाल मटोल के विरोध में टाल विकास समिति मोकामा, बड़हिया एवं कृषि विकास समिति बड़हिया के तत्वावधान में गुरुवार को किसानों का एक दिवसीय उपवास प्रखंड कार्यालय बड़हिया,मोकामा ,घोसवारी में होगा। जिसमें प्रखंड एवं नगर क्षेत्र के किसान उपस्थित होकर एक दिन का का उपवास करेंगे। इसकी जानकारी देते हुए कृषि विकास समिति के संयोजक संजीव कुमार ने बताया कि दलहन का स्थायी क्रय केंद्र की स्थापना करने तथा तेलांगना सरकार की तर्ज पर बिहार के किसानों को भी 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता किसानों को देने की मांग की है। उक्त मांग को लेकर ही किसान उपवास पर रहेंगे।(सौजन्य:-दैनिक जागरण)

निकम्मे जनप्रतिनिधियों ने ली एक और जान

निकम्मे जनप्रतिनिधियों ने ली एक और जान |मोकामा को राजनीती का मक्का कहा जाता है । भारत और बिहार के हर पार्टी के बड़े बड़े नेता इसी मिट्टी से जन्मे हैं। आज भारतीय लोकतंत्र के हर सदन में यहां के लोग प्रतिनितिधत्व कर रहे हैं। हर छोटी बड़ी राजनीतिक पार्टियों में यहां के लोग बड़े बड़े ओहदे पर विराजमान हैं। फिर चाहे वह 10 जनपथ हो, चाहे 6-A दीनदयाल मार्ग , 1 आने मार्ग हो या 11 बलवंत मेहता राय मार्ग। हर दल में अपनी धाक जमाने वाले मोकामा के नेता मौजूद हैं।दुर्भाग्य से लोकतंत्र का असली चेहरा आजकल बाहुबल और धनबल ही है , तो पूरे बिहार में जिनकी तूती बोलती है सब यहीं से हैं। मगर स्वघोषित बड़े बड़े सूरमा के होते हुए मोकामा स्वास्थ्य में इतना कैसे पिछड़ गया, इसका जवाब किसी सरकार, दद्दा, भैया, प्रवक्ता के पास नहीं है।इतना बड़ा अस्पताल , बिहार का गौरव नाजरथ अस्पताल बंद हो गया। सरकारी अस्पताल तो खुद बीमार है। मोकामा, घोसवरी , मरांची में सरकारी आस्पताल तो है मगर डॉक्टर नहीं , दवाई नहीं ,जाँच नहीं ,सफाई नहीं। अगर आप स्वस्थ है तो इन सरकारी अस्पतालों में चले जाइये यकीनन आप कोमा में चले जायेंगे, बीमार होकर लौटेंगे। चाहे वर्तमान के जनप्रतिनिधि हो या पूर्व जनप्रतिनिधि किसी ने भी मोकामा के स्वास्थ्य व्यवस्था पर कभी सोचा तक नहीं।

हाँ, अगर स्वास्थ मंत्री कभी आये हैं तो बस मीडिया में बाईट देने के लिए। भगत किस्म के चमचे जिनका नारा बुलंद करते हैं उनके मुँह से अपने नेता के सामने यह बोल नहीं निकलता कि ‘आएं जी हममे सब बीमार होके मर रहलिये हैं अ तोरा देखाय नै दे हो।’हर दिन मौत के साए में है जिन्दगी। सड़क पर इतनी दुर्घटना हो रही है। पिछले 5-10 सालों में कितने नौनिहालों ने अपनी जान गवाई है, कितनी माताएं बाँझ हुई है, कितनी मांगों का सिन्दूर उजरा , कितनी बहनें राखी पर रोती हैं। आज मोकामा में ऐसा एक भी टोला या मोहल्ला नहीं है जहाँ किसी ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कमी के वजह से जान न गवाई हो। मोकामा का हर मोहल्ला मातम पर मजबूर हुआ है। मोकामा के हर वार्ड हर पंचायत के लोग इस बिगड़ी स्वास्थ व्यवस्था के कारण अपनी जान गंवाने को मजबूर हैं। डर कर जीने को लाचार हैं, सिसकने और रोने के लिए बेबस है क्योंकि आप अपने जनप्रतिनिधियों के सामने मुँह नहीं खोल रहे हैं। आज न कल सबकी बारी आ सकती है जब तक जिन्दा हैं वोट दे लीजिये , रख लीजिये जिन्दा लोकतंत्र को। लेकिन सोचिये खुद मरकर कब तक निक्कमे लोगों के लिए नारे बुलन्द करेंगे आप?

अभी कल की ही बात है अपने विपिन दा की बेटी की शादी थी। पूरा गांव इनकी बेटी की शादी में शामिल था। पटना से बारात आई थी। अपनी औकाद से बढ़कर उन्होंने खर्चा किया ताकि गांव और उनकी इज्जत बनी रहे। सारी परम्पराएँ निभाई जा रही थी। महिलाएं ,बच्चे , रिश्तेदार हर कोई खुश था अचानक विपिन दा की तबीयत बिगड़ गई और इलाज के आभाव में उनकी मौत हो गई।जी हाँ बेटी का कन्यादान करने वाला पिता स्वास्थ्य सुविधा न होने के कारण मर गए। आज अगर मोकामा में स्वास्थ व्यवस्था ठीक रहता तो यकीनन आज विपिन दा जिन्दा होते। शहनाई वाले घर में मातम नहीं पसरा होता। गांव अपनी बेटी को विदा करते हुए रोता, मगर दुर्भाग्य पूरा गावं बेटी विदाई पर खुशी के आंसू बहाने के बदले विपिन दा को कंधा देते समय रो रहा था। बेटी के विवाह मंडप पर पिता की चिता सजी थी।यह घटना मोकामा के हाथीदह गांव में सोमवार की रात में हुई। विपिन सिंह की पुत्री डोली कुमारी की पटना से बरात आयी थी। बरातियों के दुरागमन के बाद मंडप पर शादी की रस्में पूरी हो रही थीं। इसी दौरान विपिन सिंह अचेत होकर गिर पड़े। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। इधर, गांव के प्रबुद्ध लोगों ने हस्तक्षेप कर विवाह को संपन्न कराया। बाद में घटना की जानकारी मिलते ही शादी की खुशियां मातम में बदल गयीं। ग्रामीणों ने बताया कि विपिन सिंह अपनी इकलौती बेटी के विवाह को लेकर काफी खुश थे, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। दूसरी ओर, बड़े बेटे विकास की भी गुरुवार को बेगूसराय बरात जाने वाली थी। लेकिन अब गांव के लोग इस घटना से काफी मर्माहत हैं।

आपको क्या लगता है ये एक सामान्य मौत है , किसी सोची समझी साजिश का आभास नहीं होता आपको? पिछले एक दशक से लोग छोटी छोटी घटनाओ में जान गवा रहे हैं। दुर्घटना ,आत्महत्या ,अचानक से आया कोई दौरा, हर बार सिर्फ और सिर्फ मौत जबकि हर मौत को टाली जा सकती थी।हमारे जनप्रतिनिधि चाहे वो किसी भी सदन के हों , नेता चाहे किसी भी दल के हों इन्हें कोई शर्म नहीं है। सबकुछ लूट लिया आपका फिर भी चुपचाप हैं। कब तक सवाल नहीं करेंगे अपने सोये नेताओं से। अगर उनमें कुछ गैरत बची है तो कम से कम मिल-बांट कर मोकामा की स्वास्थ्य व्यवस्था तो सुधार दें।