भव्य परशुराम मंदिर निर्माण के लिए दंडी स्वामी अनन्तानंद सरस्वती जी ने नींव रखी

भगवान परशुराम सनातन धर्म के मान्यता के अनुसार जिवित और चिरंजीवी देव हैं और 24 अवतारों में छठवे अवतार हैं उनके द्वारा मानवता के अभ्युदय एवं उत्कर्ष हेतु संपादित कर्मों को ध्यान में रखकर बिहार की संपूर्ण जनता ने मोकामा के अतिप्राचीन परशुराम मंदिर के भव्य स्वरूप देने हेतु आज दिनांक 27/04/2018को राजगुरु मठ पीठाधीश्वर दंडी स्वामी अनन्तानंद सरस्वती जी के हाथों शिलान्यास किया गया और समस्त परशुराम भक्तों ने स्वामीजी के समक्ष एक संकल्प लिया कि मंदिर की ऊँचाई कम से कम 108 फीट हो और पूर्ण रुप से चुनार के पत्थरों से निर्मित हो । पूजा अर्चना नरेन्द्र. देव द्वारा किया गया और कार्यक्रम की अध्यक्षता संजित सिंह द्वारा किया गया । गरिमामय उपस्थिति .. मोकामा से आनंद मुरारी, संजीव, रौशन, प्रणव शेखर शाही के साथ परशुराम सेवा समिति के तमाम सदस्य। ब्रजेश पासवान , कुंदन पासवान बिहार शरीफ, निखिल चौधरी, बाल्मीकि कुमार, अमित कुमार राम लखन सिंह सोनु जी एवं अविनाश जी भी बाहर से आकर अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराया ।


मरांची गावं वाले ने गैस पाइप लाइन बंद करवाया

जगदीशपुर-बरौनी गैस पाइपलाइन परियोजना के विरोध में मंगलवार को मरांची के ग्रामीणों ने जम कर हंगामा किया। ग्रामीणों का आरोप है कि गेल के अधिकारी बार-बार एलाइनमेंट बदल कर तथा समझौते के विपरीत जाकर काम कर रहे हैं। उग्र ग्रामीणों ने पाइप लाइन परियोजना का काम भी रोक दिया। मुखिया रामकुमार सिंह ने कहा कि प्रस्तावित सिक्स लेन सड़क के उत्तर दिशा की ओर बसावट भी नहीं है लिहाजा उसी दिशा से पाइपलाइन ले जाई जानी चाहिए। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि काफी कम गहराई कर पाइपलाइन ले जाई जा रही है। पाइप लाइन के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो किसी से बात नहीं हो सकी। मोकामा के मरांची में विरोध जताते स्थानीय किसान। इस दौरान उन्होंने वादा खिलाफी का आरोप लगाया।
समझाैते से उलट काम
मरांची उत्तरी पंचायत के मुखिया राम कुमार सिंह और सरपंच अजय कुमार ने बताया कि गेल के अधिकारियों, अभियंताओं और ग्रामीणों के बीच सहमति बनी थी कि प्रस्तावित सिक्स लेन सड़क के उत्तर दिशा की ओर से पाइपलाइन को ले जाया जाएगा। सिक्स लेन सड़क के उत्तर या सड़क के नीचे से भी पाइपलाइन को ले जाने पर ग्रामीणों को आपत्ति नहीं थी लेकिन प्रस्तावित सड़क के दक्षिण से पाइपलाइन ले जाई जा रही है। जमीन का पेच प्रस्तावित सिक्स लेन सड़क के दक्षिण बसावट की जमीन है और सड़क बन जाने के बाद जमीन वाणिज्यिक जमीन के तौर पर इस्तेमाल की जा सकेगी लेकिन यदि वहां से पाइप लाइन ले जाई जाएगी तो फिर जमीन की कोई उपयोगिता नहीं रह पाएगी। (सौजन्य भास्कर)

राष्टकवि दिनकर भाषाई संगम के राजकुमार

मिथिला के कंठ और अंगिका के चरण-चारण मे सम्माहित दिनकर जब ज्ञान अर्जन को मगध के हृदय मोकामा आये होंगे,तब भी हिंदी के हस्ताक्षर बच्चा बाबू के मोकामा ने उनके युक्ति एवं बौद्धिक प्रबलन मे कोई कमी नही रखा होगा । भौतिक ज्ञान के साथ साथ संघर्ष की इमारत प्रफुल चाकी के सहादत से सुगन्धित मोकामा ने दिनकर के जीवन संघर्ष के संदर्भ मे एक अलग ही अध्याय जोडा होगा । इसमे मे कतई अतिशयोक्ति नही की जब दो अलग-अलग संस्कृतिक प्रदेश के संगम स्थल से मोक्षदायनी गंगा के मध्य राष्ट्रकवि दिनकर नाम के अंतरराष्ट्रीय कवि का सृजन हुआ होगा तब ही जा कर दिनकर संस्कृति के राजकुमार कहलाये होंगे । मानिये तो ये मोकामा का लवणीय धरा ही होगा जिसने एक साधारण से मात्र छात्र को राष्ट्रकवि के ओहदा तक पहुँचाया हो…….एक सयोंग ही मानिए ठीक उसी प्रकार दशकों बाद अंगिका और मिथिला की अनूठा संगम से मै भी निकल कर मगध के हृदय मोकामा आया हूँ,और एक दशक तक यहाँ रह कर बहुत कुछ सिख रहा हूँ और बहुत कुछ सीखना है….इसमे कोई शक नही की मगध के लाज मोकामा की संस्कृति,स्मिता कल भी कालजायी थी और मेरे अनुषर्ण काल के बाद भी अमिट रहेगी..
(साभार:-मोनू सिंह गौतम )
आज मिथिला के लोग भाषा को लेकर लड़ रहे हैं। उस समय मुझे कुछ याद आया जो मैं बहुत पहले कहीं पढ़ा था। हाँ राज्यसभा टीवी पर एक प्रोग्राम में देखा था यह सब। शब्दसः तो नहीं किन्तु भाव अपने शब्दों में रख रहा हूँ। जोड़ने की ताकत होगी तो लोग आपकी बोली, आपकी भाषा सबसे जुड़ेंगे। लड़ना भी जरूरी है किंतु, बस लड़ने से ही भाषा को उसका इक्षित अधिकार नहीं मिलता है। कुछ साहसिक और ऐतिहासिक करना भी होता है उस भाषा को अमर करने के लिए।”सन 74 की बात है। रामधारी सिंह दिनकर तिरुपति में हैं।भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करने को। लोगों की भीड़ जुटी है , तिरुपति के हर जगह से लोग जुट रहे हैं। हर जगह माइक लगाई जा रही है।अहिन्दी क्षेत्र है और हिंदी के प्रति राजनैतिक घृणा जोरों पर है। कुछ हिंदी के दक्षिणी विद्वान जो कि दिनकर से अवगत हैं कि आज कुछ ओजस्वी कहेगें यह महान पुरूष।दिनकर धोती कुर्ता गमछा धारण कर तिरुपति के मंदिर के प्रांगण में पहुंच गए हैं। भगवान वेंकटेश्वर की स्तुति करने को उनका जी कर रहा है।

वे तत्काल बने मंच पर चढ़ते हैं। लोगों का विशाल जनसमूह जुटता है और हिंदी का आग ‘दिनकर’ #रश्मिरथी का सस्वर पाठ शुरू करते हैं। #रश्मिरथी के हर सर्ग को सुनकर लोग भावविह्वल हो गए हैं। कर्ण के प्रसंग को सुन लोग सिसक रहे हैं। दिनकर भगवान वेंकटेश्वर को बता रहें कि कुरु के रण में क्या क्या किये आप ? विष्णुवतार ।इस तरह से कविता पाठ होता है और कुछ ही देर या दिन बाद दिनकर की तबियत बिगड़ती है। उन्हें चेन्नई ले जाया जाता है। लड़ते, जुझते हुए वो महामानव इस धरा से उन्मुक्त हो लेते हैं।”भाषा में दम हो और भाव हो तो उसको सब भाव देते हैं। हिंदी ने आगे ऐसे महापुरुषों को पैदा कम किया तो आज उसकी भव्यता भी खो रही है बस सिनेमा या गाना या प्रचार में आने भर से भाषाई गहराई थोड़े साबित होता है।दिनकर जैसा कुछ करना पड़ता है। दिनकर बनिये ,उनसे बेहतर बनिये,उन जैसा बनने की कोशिश कीजिये तब देखियेगा भाषा भी आपकी श्रृंग पर विराजमान होगी।नमन दिनकर आपको आपकी पुण्यतिथि पर।
(साभार:-अविनाश )

मोकामा में एक और सड़क दुर्घटना माँ बेटे की मौत

मोकामा में सडक हादसों की संख्या और मरने वालों की गिनती दिनोदिन बढती जा रही है .ताज़ा घटना आज की है हथिदह के पास एक ट्रक से धक्का लगने से माँ और उसके 6 वर्षीय बेटे की घटनास्थल पर ही मौत हो गई ,जबकि उसका पति भी गम्भीर रूप से घायल है .घायल को थाना अध्यक्ष अविनाश कुमार ने तत्काल अस्पताल पहुचाया जन्हा उसका इलाज चल रहा है .ये लोग अमरपुर थाना चकिया , बरौनी ज़िला बेगुसराय के रहने वाले हैं.
माँ का नाम मोना देवी है जबकि उसके पति का नाम गोरेलाल राय हैं.ये दुर्घटना तब घटी जब जब ये परिवार अपने बाइक से लखीसराय से बरौनी जा रहे थे ,इसी यात्रा के दौरान हथिदह के पास ये लोग एक ट्रक का शिकार हो गये .घायल को अच्छे इलाज के लिए रेफर किया गया है जबकि मृतक को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा चूका है.पुलिस ने ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया है.

‘सिमरिया’ के रामधारी ‘मोकामा’ में बन गए ‘दिनकर’

‘दिनकर’ सूर्य का पर्यायवाची है और रामधारी सिंह ‘दिनकर’ साहित्य के ऐसे ऊर्जास्रोत थे जिन्होंने अपने साहित्यिक शौर्य की बदौलत खुद को ‘दिनकर’ के रूप में प्रतिपादित किया। यह दिनकर का आत्मविश्वास है कि वह खुद को अपने समय का सूर्य घोषित करते हैं- “मत्र्य मानव की विजय का तूर्य हूं मैं, उर्वशी! अपने समय का सूर्य हूं मैं।”और दिनकर को खुद में सूर्य की भांति ओजस्वी ऊर्जा देखने की पहली प्रेरणा मिली थी ‘मोकामा’ में। वर्ष -1928 में मोकामा घाट स्थित मोकामा हाई स्कूल से मैट्रिक करने वाले रामधारी सिंह दिनकर जब बाद में साहित्यिक क्षेत्र में शीर्ष विराजित हुए तब उन्होंने अपनी रचनाओं में परशुराम और कर्ण जैसे इतिहास पुरुषों पर केन्द्रित रचनाएं लिखीं। रामधारी सिंह दिनकर के बारे में जब भी चर्चा होती है तब यह तो कहा जाता है कि उन्होंने एक प्रगतिवादी और मानववादी कवि के रुप में ऐतिहासिक पात्रों और घटनाओं को ओजस्वी तथा प्रखर शब्दों का तानाबाना दिया। लेकिन इस बात की चर्चा कम होती कि दिनकर की इस ओजस्विता के पीछे प्रेरणास्रोत भूमि ‘मोकामा’ रही।

पतित पावनी गंगा के उत्तरी छोर पर बसे सिमरिया घाट की बालू की रेत पर खेलने वाले बालक रामधारी सिंह को ‘दिनकर’ के रूप में सृजित करने का पहला पड़ाव मोकामा ने दिया था। 1920 के दशक में बालक रामधारी सिंह हर दिन नाव और स्टीमर से गंगा पार कर सिमरिया से मोकामा घाट आते थे। मोकामा जो मौजूदा समय में त्रिवेणी संगम है मगध, अंग और मथिला का। मोकामा में पढने के दौरान रामधारी सिंह का मोकामा स्थित परशुराम मंदिर भी जाना होता था। भारत में गिने चुने जगहों पर ही परशुराम के मंदिर हैं जिसमें मोकामा का परशुराम मंदिर सामाजिक समरसता का सूचक है। हाल के वर्षों में एक सामान्य धारणा हो गई कि परशुराम सिर्फ ब्राह्मणों द्वारा पूजित देव हैं जबकि मोकामा में शताब्दियों का इतिहास गवाह है कि ‘भूमिहार से लेकर चमार’ तक परशुराम को पूजते हैं। शायद इसी कारण जब स्कूली शिक्षा के दौरान बालक रामधारी सिंह ने मोकामा में परशुराम के अनुयायियों को भिन्न स्वरूप देखा तब उन्होंने उसे ही आगे चलकर ‘परशुराम’ पर केन्द्रित परशुराम की प्रतीक्षा लिखी। साथ ही अपनी कई अन्य रचनाओं में भी उन्होंने परशुराम के विविध स्वरूपों को प्रतिपादित किया। जैसे मोकामा के परशुराम सबको समेटकर चलने वाले हैं वैसे रामधारी सिंह दिनकर हिंदी के ऐसे कवि-लेखक हैं, जिनकी ‘रेंज’ इतनी व्यापक है कि वह अपने में साहित्य, समाज, इतिहास और राजनीति को एक साथ समेटकर चलते हैं।दिनकर की पहली प्रकाशित कविता का किस्सा बड़ा अनोखा है। 1920 के दशक में भारत में अंग्रेजों का शासन था और अंग्रेजों के खिलाफ लिखना दंडनीय अपराध। ऐसे में मोकामा घाट स्कूल में पढने वाले बालक रामधारी ने इसे चुनौती के रूप में लिया और स्कूल से प्रकाशित होने वाली वार्षिक पुस्तिका में उन्होंने अंग्रेजों के शासन को चुनौती देने वाली एक ओजस्वी कविता लिख दी लेकिन उन्होंने यह कविता छद्म नाम से लिखी। यानी उन्होंने रामधारी सिंह के नाम से नहीं बल्कि ‘अमिताभ’ ने यह कविता लिखी जिसके प्रकाशन होने के बाद स्कूल प्रबंधन को अंग्रेजी हुकूमत ने खूब खरी खोटी सुनाई। इस प्रकार अपनी पहली प्रकाशित कविता से ही बालक रामधारी ने भविष्य के दिनकर की राह दिखा दी।

हालांकि स्कूल की पुस्तिका में प्रकाशित उस कविता का कोई अंश अब मौजूद नहीं है लेकिन पुराने जमाने में मोकामा में यह किस्सा मशहूर था और दिनकर ने भी अलग अलग मंचों से इसका कई बार जिक्र किया था। बाद के वर्षों में दिनकर की एक और लोकप्रिय कविता की सृजन भूमि मोकामा रही। मोकामा के सुल्तानपुर ग्राम में उन दिनों दिनकर अक्सर साधुबाबू के ‘दालान’ पर बैठते थे। दालान के पास कई पेड़ थे जिनमें से एक पेड़ को एक दिन काट दिया गया और उसके बदले लोहे का खंभा गड़ दिया गया। आधुनिक भारत में यह विद्युतीकरण और मशीनीकरण का दौर था। दिनकर ने जब अपने सामने पेड़ कटा पाया और लोहे के खंभे गड़े देखे तब उन्होंने उसी दालान पर बैठे बैठे कुछ समय में ही एक कविता लिख दी -”

मनुष्य के मशीनों की ओर आकर्षित होने पर आधारित होकर दिनकर ने उस समय यह कविता लिखी थी। दिनकर की रचनाओं की व्यपकता का आलम यह है कि वह गांधी से लेकर मार्क्स तक, आर्य से लेकर अनार्य तक, हिंदू संस्कृति के आविर्भाव से लेकर प्राचीन हिंदुत्व और इस्लाम से लेकर भारतीय संस्कृति और यूरोप के संबंधों तक को परखते हुए विपुल लेखन करते हैं। यह लेखन विविधता अनायास ही नहीं आया था बल्कि इसके पीछे भी दिनकर की मोकामा घाट की स्कूली शिक्षा एक कारण है। अंग्रेजों के जमाने में उस स्कूल में हिन्दी, उर्दू, बांग्ला और अंग्रेजी जैसी भाषाओं में न सिर्फ शिक्षा दी जाती थी बल्कि वैश्विक स्तर पर ब्रिटिश शासन के विस्तार के कारणों को भी उन्होंने अंग्रेजों की जुबानी जानी थी। वे जानते थे कि मोकामा के हाथीदह में कैसे मुगलों की सेना के हाथी गंगा में बह गए, वे जानते थे कि कैसे किसान पीड़ित हैं और शोषित होते हैं। ऐसी और भी कई बातें जिसे उन्होंने मोकामा में नजदीक से महसूस किया।

शस्त्र और शास्त्र के गुणों से भरपूर मानव ही प्रगतिपथ पर आरुढित हो सकता है और निर्भयता को प्राप्त कर सकता है। इसकी प्रेरणा वे परशुराम से ही लेते हैं। जाति कोई अभिमान का विषय नहीं है बल्कि यह स्वाभिमान का सूचक है। इसलिए दिनकर अक्सर चुटीले अंदाज में कहते थे- “ऐ मनु तेरा मनुहार हूं मैं ,सिमरिया घाट का भूमिहार हूं मैं। “लेकिन इसका यह कतई अर्थ नहीं हुआ कि दिनकर को किसी एक जाति विशेष का गौरव माना जाए बल्कि वे तो सूर्य के समान थे। जैसे सूर्य का प्रकाश सबको आलोकित करता है और सबके लिए बराबर है वैसे ही दिनकर की कविताएं सबका प्रतिनिधित्व करती हैं। वे ‘रश्मि रथी’ में कर्ण के लिए कहते हैं –

दिल्ली में एक बार किसी साहित्यिक संगोष्ठी में दिनकर ने कहा था कि मेरा जन्म जिस सिमरिया में हुआ और मेरी शुरूआती शिक्षा जिस मोकामा घाट में हुई, वहां मैंने कई ऐसे सूरवीरों को देखा है जिनके ओज के आड़े जाति नहीं आई। बल्कि वे अपने पराक्रम के बलबूते सफल हुए।

हालांकि दिनकर को उग्र राष्ट्रीयता के पीछे अपने गौरवशाली अतीत का भान और मान था। संस्कृति के चार अध्याय में दिनकर ने अतीत के इस गौरव को करीने और सलीके से सजाया है। इसी प्रकार दिनकर तो ‘उर्वशी’ में प्रेम, वासना और अध्यात्म का अद्भुत संगम हैं। यह पुरुरवा और उर्वशी की कहानी है जो महाभारत के शान्ति पर्व से उठाई गई थी। इसमें दिनकर ने मानव को देवदूत और ईश्वर से बहुत ऊपर रखा है। दिनकर कोरी बातें करने वालों में नहीं थे बल्कि वे मानव की उस सच्चाई को सहज शब्दों में बयां करने की कूबत रखते थे जिसे हम कहने से डरते हैं। इसलिए स्त्री और पुरुष के बीच नैसर्गिक आकर्षण को उर्वशी में दिनकर ने लिखा है –

ऐसे थे हमारे दिनकर जो हिमालय से अडिग, सूर्य से ऊर्जावान, समुद्र से शांत, धरती से सहनशील और वायु से वेगवान रहे। संयोग से पावन गंगा के दो तटों सिमरिया और मोकामा घाट में अपना बचपन और किशोरावस्था व्यतीत करने वाले रामधारी से दिनकर बने हमारे दिनकर का अवसान भारत के उस दक्षिणी समुद्र तटीय हिस्से मद्रास (अब चेन्नई) में 24 फरवरी 1974 को हुआ। जैसे गंगा हिमालय से उतरती है और समुद्र में अपना गंतव्य तलाश लेती है वैसे ही गंगा घाट के दिनकर भी गंगा से चले और मद्रास के समुद्र में अपना गंतव्य तलाश लिया।१९१० में स्थापित इसी स्कूल में पढ़े थे दिनकर
दिनकर के स्कूल के दिनों की उपस्थिति पंजी आज भी स्कूल में है इसी छात्रावास में रहते थे दिनकर

ट्रैकमैन की मौत

मोकामा के रामपुर डुमरा में एक दर्दनाक हादसे में ट्रैकमैन महेश पासवान की ट्रेन से काटकर मौत हो गई .मृतक ट्रैकमैन महेश पासवान मूलतः खगौल का रहने वाला था .वह यंही रेलवे में कार्यरत था और उसकी ड्यूटी रामपुर डुमरा स्टेशन के पास कीमैन की थी .इसका परिवार परिवार खगौल में ही रहता था.हादसे के बाद डीआरएम रंजन प्रकाश ठाकुर ने बाढ़ अनुमंडल अस्पताल पहुंचकर मामले की जानकारी ली और श्रद्धांजलि दी। रेल अधिकारियों के अनुसार ट्रैकमैन महेश पासवान रामपुर डुमरा स्टेशन के पास दो नंबर यूनिट में कार्यरत था। इसी दौरान वह पटना-झाझा मेमू ट्रेन की चपेट में आ गया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई.

101 परशुराम भक्तों ने एक साथ वीडियो लांच कर बनाया रिकॉर्ड

101 परशुराम भक्तों ने एक साथ वीडियो लांच कर बनाया रिकॉर्ड मोकामा। परशुराम जयंती-2018 ने जिस प्रकार मोकामा में भक्ति और श्रद्धा की अविरल गंगा बहाई, कुछ उसी तर्ज पर सोशल मीडिया में परशुराम जयंती-2018को समर्पित मोकामा ऑनलाइन के वीडियो ने लांचिंग के साथ ही कई इतिहास बना दिया। वीडियो संयोजक प्रणव शेखर शाही के नेतृत्व में 21 अप्रैल को भारत के विभिन्न शहरों और गांवों से एक साथ 101 परशुराम श्रद्धालुओं ने ठीक रात आठ बजे वीडियो लांच किया। इसके लिए मोकामा ऑनलाइन से विशेष व्यवस्था की थी और कुल 101 लोगों को लांचिंग समय के ठीक पूर्व एडमिन राइट दिया था। मोकामा के दोनों छोरों पर स्थित परशुराम मंदिर परिसरों से कुल 11लोगों ने मोबाइल पर वीडियो लांच किया।

इसके अतिरिक्त दिल्ली के मदनगीर साईं मंदिर में बासुकीनाथ, दिनेश शुक्ल , लोचन शर्मा, श्याम किशोर और जयंत त्यागी ने वीडियो लांच किया। बेगूसराय जिले के 13अलग अलग गांवों से सत्यम, अजय, संजीव, हर्षित रंजन, विकास सिन्हा, नीरज भूमिहार, अभिषेक, रोहण, राहुल भारद्वाज, नयन शर्मा, तिलक कुमार, विक्रम नंदन, भरत और रोहित ने, पटना के महावीर मंदिर से साकेत, रोहित बिहारी, चंदन, बिट्टू और उत्पल ने, करौटा के देवी स्थान से भारतेन्दु एवं अजय कुमार ने, बैकटपुर शिव मंदिर में करीब 50लोगों की उपस्थिति में राजीव, गौतम और राजेश ने, पुनारख से बृजनंदन और सौरव शुक्ला ने, मोर से बिन्दु कुमारी ने, डुमरा के मिसरिया स्थान से प्रतीक ने, बड़हिया क्षेत्र के अलग अलग मंदिरों एवं अन्य स्थलों से अभय, कमलेश, पवन, राकेश सिंह, चंचल, अनूप ने, लखीसराय के सात अलग अलग गांवों से प्रिंस, सुंदर, ईश्वर, रामलाल, भानूप्रताप सिंह, रितिक कुमार, प्रणव, प्रमोद, कन्हैया और कुंदन ने, देवघर में रानी कुमारी, संजय झा, अनिल, संजय कुमार ने, जमुई में विकास ने, गिरिडीह में दीपक और नवीन कुमार, सीवान में नीरज और अनीता ने और दरभंगा में संजय ने लांच किया। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में विनय, मनोहर और शरद ने, जौनपुर में महेन्द्र सिंह ने, इलाहाबाद में शाश्वत ने लांच किया। भोपाल में सक्षम, नागपुर में रवीन्द्र कुमार, मुम्बई में बंटी, अनिल और रोहित ने लांच किया। बेंगलूरु में प्रिय दर्शन, अमित, अनंत मिश्रा, हेमंत और दिलीप ने तथा चेन्नई में गौरव, प्रियांक चतुर्वेदी, मनोरंजन कुमार ने हैदराबाद में दीप्ति और सौरव ने लांच किया। हरियाणा के सोनीपत में महेश और कार्तिक ने, लक्ष्मी नगर दिल्ली   में सतीश पांडेय , मनीष पांडेय , रुपेश पांडेय ,शशांक , विवेक और राम ने, कोलकाता में दिलीप कुमार और निशांत ने तथा पूर्वी सिंहभूम में मुन्ना और जमशेदपुर में विवेक ने लांच किया। मोकामा ऑनलाइन अपने सभी शुभेच्छुओं को इस सहयोग हेतु हार्दिक आभार प्रकट करता है। इसके अतिरिक्त वीडियो हेतु वीडियो क्लिप्स, फोटो आदि भेजने वालों तथा अन्य सभी प्रत्यक्ष एवं परोक्ष सहयोगियों का पुन: आभार।

विडियो देखिये

मुंगेर सांसद ने कहा अगर चुनाव लडूंगी तो मुंगेर से ही ,चाहे गठबंधन रहे या टूटे

तमाम तरह के अटकलों को विराम लगाते हुए वर्तमान सांसद वीणा देवी ने कहा की अगर वो चुनाव लड़ेगी तो मुंगेर से ही,चाहे गठबंधन रहे या टूटे.उन्होंने कहा की वो पिछले 4 सालों से क्षेत्र की सेवा कर रही हैं ,उन्हें यंहा की जनता ने बहुत प्यार और आशीर्वाद दिया है उनलोगों के साथ मैं अन्याय नहीं कर सकती हूँ.मुंगेर मेरे रग रग में बस गया है,मैं यंहा से कंहा जाउंगी.वीणा देवी ने एक बड़ी ही भावनात्मक बात कहकर सभी को चुप करा दिया.उन्होंने कहा की “मैं इस क्षेत्र की बहु हूँ और भारतीय परंपरा के अनुसार बहु के मरने के बाद ही उसकी चिता ही उसके घर से निकलती है,जीते जी संभव नहीं की बहु अपना घर छोड़कर कंही और चली जाय,जब एक बार वीणा देवी इस घर में आ गई तो जीते जी कंही दुसरे के घर नहीं जा सकती.”विडियो देखिये.

नेत्रदान भवन की 50 वीं वर्षगांठ पर बोले मेघालय के राज्यपाल और सांसद वीणा देवी पहुची

शनिवार को नगर के बाढ़ सदर बाजार एरिया में नेत्रदान भवन के 50 वें वर्षगांठ के मौके पर स्वर्ण जयंती समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में बतौर मुख्य अतिथि मेघायल के राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा कि मानवता की सेवा सबसे पुनीत काम है। गरीब गुरबों की सेवा और कल्याण के लिए हमें हर संभव प्रयास करना चाहिये। उन्होंने कहा कि समाज में कई ऐसे लोग हैं जो नेत्रदान, रक्तदान समेत अन्य अंग दान कर हम सबको गौरवान्वित कर रहे हैं। मौके पर उन्होंने नेत्रदान भवन और समिति के कायरे की प्रशंसा भी की। वहीं स्थानीय सांसद वीणा देवी तथा विधायक ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह ने नेत्रदान भवन में हर साल गरीब लोगों के लिए आयोजित किये जानेवाले शिविरों की र्चचा करते हुए कहा कि हमें इसे और प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इससे पूर्व मेघालय के राज्यपाल गंगा प्रसाद, सांसद वीणा देवी, विधायक ज्ञानू समेत अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। मौके पर संजीव कुमार मुन्ना, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. सियाराम सिंह, जदयू जिलाध्यक्ष अशोक चंद्रवंशी आदि मौजूद थे।
(सौजन्य द सहारा न्यूज ब्यूरो बाढ़)

भारत बेंगन बनेगा मेमू रिपेयरिंग वर्कशॉप

डीआरएम के भारत वैगन कंपनी के निरीक्षण पर इलाके में र्चचा ,अधिकारी ने कुछ भी बताने से किया इनकार.दानापुर रेल मंडल के डीआरएम रंजन प्रकाश ठाकुर ने शुक्रवार को भारत वैगन की बंद पड़ी कंपनी का निरीक्षण किया। बताया जा रहा है कि पूमरे महाप्रबंधक के निर्देश पर डीआरएम ने कंपनी का जायजा लिया। रेलवे ने भारत वैगन कंपनी का अधिग्रहण कर लिया था। पिछले साल आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने इसे बंद करने का प्रस्ताव दिया था। लगातार घाटे में चल रही कंपनी को बंद करने का निर्णय इलाके के लोगों के लिए निराशाजनक था। डीआरएम के दौरे से एक नई उम्मीद जगी है। हालांकि डीआरएम ने अपने दौरे के बारे में कुछ भी स्पष्ट रूप से बताने से इनकार किया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भारत वैगन कंपनी की 30 एकड़ से अधिक बेकार पड़ी जमीन का रेलवे इस्तेमाल करना चाह रहा है।

सूत्रों की मानें तो रेलवे यहां मेमू रिपेयरिंग वर्कशॉप खोलने की योजना बना रहा है। पूमरे के महाप्रबंधक जब पिछले दिनों मोकामा आए थे तो भाजपा नेता डॉ. राम सागर सिंह ने जीएम का ध्यान भारत वैगन कंपनी की ओर आकृष्ट किया था तथा यह बताया था कि रेलवे चाहे तो इसका उपयोग दूसरी परियोजना के लिए कर सकता है। माना जा रहा है कि पूमरे महाप्रबंधक भी भारत वैगन की बेकार पड़ी जमीन को लेकर चिंतित थे। रेल सूत्रों के अनुसार यहां कुछ नया होने की पूरी संभावना है। गौरतलब है कि मोकामा के भारत वैगन कंपनी की स्थापना भारत भारी उद्योग मंत्रालय के द्वारा की गई थी। यूपीए-1 के दौरान रेल मंत्री रहे लालू प्रसाद यादव ने रेलवे में इस कंपनी का अधिग्रहण किया था। भारत वैगन की पहचान बीमार इकाई के तौर पर हो गई थी। रेलवे द्वारा अधिग्रहण किए जाने के बाद इसके कायाकल्प की उम्मीद जगी थी लेकिन यूपीए-2 में इस परियोजना पर ध्यान नहीं दिया गया। बंगाल की कंपनियों का यूपीए-2 की रेल मंत्री ममता बनर्जी ने अधिग्रहण किया तथा उन कंपनियों को पूरा पैकेज दिया गया लेकिन मोकामा भारत वैगन कंपनी इससे वंचित रह गई। कंपनी का घाटा बढ़ता चला गया और आखिरकार इसे बंद करने की सिफारिश करनी पड़ गई थी।द सहारा न्यूज ब्यूरोमोकामा