डॉ बैद्यनाथ शर्मा

पुण्यश्लोक डॉ० वैद्यनाथ शर्मा जी का कायिक स्वरूप भले ही आज नहीं है , लेकिन उनका स्मार्तव्य स्वरूप आज भी हमारे बीच विद्यमान है ।उनकी सौम्यता , सहृदयता , अपनत्व एवं आत्मीयता के भावों को हम आज भी महसूस करते हैं ।

हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि मनायी जाती है । इस वर्ष भी मनायी जा रही है । अतः आप सभी स्नेहसिक्तजनों से विनम्र अनुरोध है कि उनकी श्रद्धांजलि सभा में शामिल होकर उन्हें पुष्पांजलि एवं शब्दांजलि अर्पित करें ।

स्थान– गणित शिक्षक चंदन कुमार का अध्यापन स्थल
( यूनियन बैंक [ मोकामा ] के बगल में )
तिथि— 27-12-2017(बुधवार)

समय—अपराह्न 3 बजे ।

धूमधाम से मना क्रिसमस

मोकामा के नाजरथ में धूमधाम से मना क्रिसमस .फादर  ने संबोधन में कहा प्रभु यीशू को परमेश्वर ने संसार में पाप का अंत करने के लिए भेजा था न की पापियों के अंत के लिए. उन्होनें संसार के सभी प्राणियों को आपस में प्रेम भाव से रहने का संदेश दिया था.

मोकामा के आस पास के गावं से लोग क्रिसमस मनाने चर्च में आये.बच्चों  अनोखा उत्साह था.

जीसस क्राइस्ट के जन्मदिन के मौके पर मनाए जाने वाले इस त्योहार में ईसाई धर्म के लोगो ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया जबकि एनी धर्मो के लोगो ने भी यीशु को याद किया.मोकामा के नाजरथ चर्च का  दुनियाभर के चर्च में एक अहम् स्थान है.येसी मान्यता है की माँ मरियाक्म को यन देखा गया है.लोग  सुबह से ही प्रार्थना के लिए चर्च जा रहे थे जबकि  रात 12 बजे जीसस के जन्म के साथ ही लोग एक दूसरे को गले लगकर बधाई दे रहे  थे . चर्च में आए सभी लोगों को पादरी ने आशीर्वाद दिया , इसके बाद सभी लोगो ने  आपस में गिफ्ट्स और केक शेयर किया .

कब तक बाँझ बनेगी माएं.

पिछले 4-5 सालों में मोकामा में सड़क दुर्धटना में मारे जाने वालों की संख्या में बढ़ोतरी होती जा आ रही है. लगभग हर दुसरे दिन कोई न कोई मरता खपता रहता है. कब जागेगी प्रशासन ,क्यों कोई इंतजाम नहीं हो रहा ,सांसद ,विधायक पार्षद क्या सिर्फ चुनाव में ही बोलेंगे.

आखिर कब तक माएं बाँझ बनेगी,कब तक महिलाएं बेबा होगी.

आज भी मोकामा का एक होनहार लड़का प्रधुमन असमय काल के गाल में समा गया. क्या कुसूर था. यही न पढना चाहता था,अपने लिए,अपने परिवार के लिए,अपने देश के लिए कुछ करना चाहता था.अभी इंटर में था खूब मेहनत कर कुछ बनना चाहता था.बारह्पुर से मोकामा अपने सायकिल से इसी उम्मीद में ट्यूशन पढने  जा रहा था की वो कुछ कर पायेगा.मगर सत्ता और प्रसाशन के लालची लोगो ने सड़क को श्मशान बना के रख दिया है जिसमे आज वो भी लपेटे में आ गया.

आज सुबह 8 बजे बरहपुर  निवासी दिलीप सिंह का बेटा प्रधुमन जो इंटर का छात्र था ,जो बरहपुर  से मोकामा सायकिल से पढने जा रहा था. एक बालू लादे ट्रेक्टर से कुचल कर मर गया.

परिजनों का रो रो के बुरा हाल हो रखा है.गावं वालों से सड़क जाम कर दिया है.पुलिस उसे कुछ देर में हटा देगी मगर उनके घर का  कुलदीपक फिर नहीं आयेंगे.फिर उस घर में वो कभी नहीं मुस्कुराएगा.

काल के गाल मैं असमय एक फूल मुर्झा  गया. इश्वर उसकी आत्मा को शांति दें.

सत्ता और प्रशासन में बैठे लोग कुछ करें की येसी घटना दोबारा न हो.

 

Sandeep Mandal

महाराजा अहिबरन जयंती

24 /12/17 को मोकामा,जिला-पटना में महाराजा अहिबरन जी की जयंती मनाई गई,जिसमें कार्यक्रम की शुभारंभ महाराजा अहिबरन जी को पुष्पांजलि देकर की गई., फिर माल्यार्पण किया गया जिसमे हज़ारो की संख्या में बरनवाल परिवार उपस्थित हुए.कार्यक्रम में आये वक्ताओं ने बरनवाल समाज को सम्बोधित किया ,महाराजा अहिबरन जी के बारे में बताया. आज के सामज में उनके विचारो पर चलने का संकल्प लिया गया.डी ए वी स्कूल के प्रांगन में ये कार्यक्रम सादगी से मनाया गया.बरनवाल सेवा समिति के बेनर टेल ये कार्यक्रम आयोजित किया गया था.

विजय सिन्हा ने करवाई ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल वापस

मोकामा में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल समाप्त कराने की पहल शनिवार सुबह से शुरू हुई. मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रदेश जदयू कार्यालय भी इस मामले में गंभीर था. जदयू नेताओं को भी ट्रांसपोर्टरों से बात कर हड़ताल समाप्त कराने की जिम्मेदारी दी गई थी. युवा जदयू के प्रदेश महासचिव पवन कुमार सहित अन्य जदयू कार्यकर्ता हड़ताली ट्रांसपोर्टरों तथा अन्य लोगों के साथ सुबह से ही वार्ता कर रहे थे. हाथीदह थानाध्यक्ष अविनाश कुमार, मरांची थानाध्यक्ष राजीव पटेल की ट्रांसपोर्टरों से लगातार वार्ता हो रही थी और अंत में यह सहमति बनी कि वार्ता कराकर ट्रांसपोर्टरों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाया जाए तो ट्रांसपोर्टर अपनी हड़ताल वापस लेंगे. मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी भी पूरे दिन हाथीदह और मरांची के स्थानीय नेटवर्क से मामले की जानकारी लेते रहे और अंततः देर रात छः दिनों से चली आ रही हड़ताल वापस हो गई.

फर्जी बहाली था डॉ जितेंद्र रजक का आर आर एस कॉलेज, मोकामा में प्राचार्य बनना

पटना हाईकोर्ट ने  मगध विश्वविद्यालय, बोधगया में नियुक्त किये गये  21 प्राचार्यों की नियुक्ति को अवैध करार दिया है. न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाठी और न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद के दो सदस्यीय खंडपीठ ने भी गुरुवार को उनकी नियुक्ति को निरस्त कर दिया. खंडपीठ ने कहा कि हाइकोर्ट की एकलपीठ ने इन प्राचार्यों की नियुक्ति को रद्द करने का जो फैसला दिया था, वह सही है.
इसमें हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं. एकलपीठ का आदेश सभी दस्तावेजों  को देखने और सभी पक्षों को सुनने के  बाद आया है. खंडपीठ ने 21 प्राचार्यों की ओर से दायर नौ एलपीए  (अपील) पर पहले ही  सुनवाई कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. खंडपीठ ने पाया कि इन  प्राचार्यों की नियुक्ति प्रक्रिया में  व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी और अनियमितता का जो आरोप एकलपीठ के याचिकाकर्ता ने  लगाया है, वह सही है.
 
खंडपीठ  ने राज्य सरकार के आदेश पर  निगरानी विभाग द्वारा की जा रही जांच को  जल्द पूरा करने को कहा है. साथ ही यह भी आदेश दिया है कि जांच में इस बात का ध्यान रखा जाये कि कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाये.
एकलपीठ में सुनवाई के समय याचिकाकर्ता ने इन प्राचार्यों की नियुक्ति में चयन समिति द्वारा अनियमितता बरतने के साथ-साथ पैसे के लेन-देन की बात कोर्ट को बताया था. चयन समिति में शामिल तीन  सदस्यों ने भी अदालत को बताया था कि प्राचार्यों की नियुक्ति में बड़े  पैमाने पर अनियमितता बरती गयी. इतना ही नहीं, चयन  समिति के एक वरीय सदस्य  डॉ शिव जतन ठाकुर ने अदालत में स्वयं उपस्थित होकर कहा था कि मेरे अंधेपन  का फायदा उठा कर नियुक्ति में अनियमितता बरती गयी.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने  अदालत को बताया कि  इन  सभी नियुक्तियों का मामला उस समय का है, जब  बिहार में कुलपतियों की नियुक्ति ही विवादास्पद हुआ करती थी. काॅलेजों में नियुक्तियां  राज्य सरकार के परामर्श के बगैर हुआ करती थीं. पटना  हाईकोर्ट  के एक फैसले के बाद  कुलपतियों की नियुक्ति  के मामले में बड़ा  फैसला आया, जो सुप्रीम कोर्ट तक गया.  हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों  के आलोक में बिहार सरकार ने अपने विश्वविद्यालय कानून को संशोधित किया.
राज्य सरकार द्वारा गठित सर्च कमेटी के माध्यम से कुलपतियों की नियुक्ति का एक  नया प्रावधान बनाया. उसी तरह उस समय 21  प्राचार्यों की बहाली में भारी  गड़बड़ी की शिकायत सरकार को विधानसभा के ध्यान आकर्षण में प्राप्त हुई. तत्कालीन शिक्षा मंत्री  ने  गड़बड़ी की जांच का आदेश मगध  प्रमंडल के तत्कालीन आयुक्त को दिया. आयुक्त ने जांच में शिकायत को सही पाया. राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए  जांच  का जिम्मा निगरानी विभाग को सौंप दिया. सुनवाई के समय मगध विश्वविद्यालय  की ओर से बहाली प्रक्रिया से  जुड़े सारे दस्तावेजों को कोर्ट को सौप दिया गया.
दो फरवरी, 2012 को हुई थी नियुक्ति (बॉक्स)
मगध  विश्वविद्यालय में कुल 22 प्राचार्यों की नियुक्ति दो फरवरी, 2012 को की गयी  थी. 22 में केवल 21 प्राचार्यों ने ही योगदान दिया था. 29 मार्च,  2012 को मगध प्रमंडल के आयुक्त ने जांच रिपोर्ट सौंपी. 12  सितंबर, 2014 को 21 प्राचार्यों की नियुक्ति को हाईकोर्ट के न्यायाधीश शिवाजी पांडेय की एकलपीठ ने नियुक्ति को  निरस्त कर दिया. वर्ष  2015 में हटाये गये 21  प्राचार्यों ने एकलपीठ के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी थी, जिस पर दो सदस्यीय खंडपीठ ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया.
प्रभावित होनेवाले प्राचार्य
1. डॉ  शैलेश कुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य, एएनएस कॉलेज, औरंगाबाद
2.डॉ राजीव रंजन, प्राचार्य, जेजे कॉलेज, बिहटा, पटना
3. डॉ आनंद कुमार सिंह, प्राचार्य, डीएन  सिन्हा कॉलेज,जहानाबाद
4. डॉ राजेश शुक्ला, प्राचार्य, जेएल कॉलेज, खगौल, दानापुर
5. डॉ सीके वर्मा, प्राचार्य, आरएलएस यादव कॉलेज, बख्तियारपुर, पटना
6. डॉ  जवाहर प्रसाद सिंह, प्राचार्य, एसयू कॉलेज, हिलसा,
7. डॉ राज कुमार मजूमदार, प्राचार्य, एसपीएन कॉलेज, नालंदा
8. डाॅ गणेश महतो, प्राचार्य, दाउदनगर कॉलेज, औरंगाबाद
9. डॉ फूलो पासवान, प्राचार्य, राम लखन सिंह यादव कॉलेज, औरंगाबाद
10. डॉ सुशीला दास, प्राचार्य, आरपीएन कॉलेज, पटना सिटी
11. डॉ तपन कुमार शांडिल्य, मगध विश्वविद्यालय मुख्यालय
12 डॉ ओम प्रकाश सिंह, प्राचार्य, एसएन सिन्हा कॉलेज,  औरंगाबाद
13. डॉ सतीश चंद्र, प्राचार्य, विक्रम कॉलेज, पटना
14. डॉ दिलीप कुमार, प्राचार्य, नौबतपुर कॉलेज, पटना
15. डॉ सत्येंद्र प्रजापति, प्राचार्य, एसएन सिन्हा कॉलेज, बिहारशरीफ
16. डॉ एमएस हसन,  प्राचार्य, शेरघाटी कॉलेज, गया
17. डॉ सुनील सुमन, पीएस  कॉलेज, हिसुआ, नवादा
18. डॉ  मीरा कुमार,  प्राचार्य, जीबीएम महिला कॉलेज,  गया
19. डॉ विजय रजक, प्राचार्य, अरवल कॉलेज, अरवल
20. डॉ जितेंद्र रजक, प्राचार्य, आरपीएस कॉलेज, मोकामा, पटना
21. डॉ विनोद कुमार, प्राचार्य,  जवाहरलाल नेहरू कॉलेज मोकामा, पटना

शैलेंदर पासवान ने दबोचा श्याम सुन्दर को

चौकीदार की जांबाजी से हत्थे चढ़ा कुख्यात श्याम सुंदर.

पिछले 5 महीने से पुलिस और पब्लिक को दिन रात सताने वाले श्याम सुन्दर को मोकामा पुलिस ने धर दबोचा है. ये वही हत्यारा है जिसने अभी 5 दिन पहले अपनी चाची को हो ही जमीन के लालच में मार दिया था.महीने दिन पहले ही इसने कुछ महिलाओं से बलात्कार किया था.

पटना पुलिस के लिए सिरदर्द बना कुख्यात श्याम सुंदर आखिर चौकीदार शैलेंदर पासवान की जांबाजी से हत्थे चढ़ गया. मोकामा के बरहपुर में शनिवार की अहले सुबह एक पूर्व मुखिया के दलान पर कुख्यात के टिके होने की सूचना चौकीदार को मिली. उसने फौरन थानेदार को यह जानकारी दी. इस बीच कुख्यात मौके से भागने लगा, तब चौकीदार ने जान की बाजी लगा कर हथियारबंद श्याम सुंदर को दबोच लिया. तक़रीबन 10 मिनटों तक उठा-पटक के बाद थानेदार कैसर आलम, दारोगा सुबोध कुमार व अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गये और कुख्यात को पकड़ कर थाने लाया गया.

गणित दिवस (रामानुजम जयंती )

मोकामा संस्कृत पाठशाला के द्वारा विगत 25  वर्षों से महान भारत के सपूत गणितज्ञ श्री रामानुजम जी  की जयंती पर गणित दिवस का आयोजन किया जा रहा है. इस  वर्ष भी ये कार्यकर्म बड़े धूम धाम से मनाया गया. इस अवसर पर गणित प्रतियोगिता, विज्ञान पर्दर्शनी का आयोजन हुआ.

कार्यकम के संस्थापक संजय सर ने अध्यक्षता की जबकि पप्पू दा मुख्य अतिथि के रूप में थे .अजय सर  जैसे शिक्षक ने अपनी उपस्थिथि से इसमें चार चाँद लगा दिया.रौशन भरद्वाज और कीर्ति आज़ाद ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया.बिहट के चर्चित गणित शिक्षक नंदन जी और विकाश जी ने भी रामानुजम जयंती को सराहा.

पंकज जी और ललन जी ने संगीतमय प्रस्तुती दी .

वर्ग 9 का आदित्य कुमार ने चरखे से बल्ब जला कर सबको अचंभित किया.

इस बार 8 बच्चों को छात्रवृति भी डी गई .पहले स्थान प्राप्त करने वाले   को 1301,दुसरे  को 1001 (3 विद्यार्थी),जबकि तीसरे  स्थान पाने वाले को 801(4 विद्यार्थी)  रूपये की छात्रवृति दी गई. ये छात्रवृति संस्कृत पाठशाला के ही पूर्व छात्र उज्जवल कुमार(धौरानी टोला) के द्वारा दी गई .

 

 

जिए तो जिए कैसे

पिछले 5 दिनों के हरताल की वजह से मोकामा के अस पास ३००० से जायदा ट्रक फंसे हुए है .येसा  ही एक ट्रक जिसमे मछली भरी थी मोकामा के मोर गावं के पास फसी पड़ी है जिसकी मछली अब सड़ गई है और पुरे इलाके में जबरदस्त बदबू फैल रही है .आस पास के लोगो का जीना मुश्किल  हो गया है.गावं वालों की अपील है की  प्रशासन जल्द से जल्द इसको यंहा से हटा ताकि बीमारी फेलने से रोका जा सके.

Ramlakhan Singh

पकड़ा गया बलात्कारी श्याम सुन्दर

पिछले कुछ सालों से मोकामा के कन्हाई-पुर के आस पास जिस श्याम सुन्दर यादव ने आतंक मचा रखा था.महिलाओं का जीना हराम  कर रखा था. हत्याओं के दौर में औरतों और बच्चों तक को नहीं छोड़ता था.यूँ कहिये पुरे इलाके को चम्बल बना  कर रखा हुआ था.अभी कुछ पहले ही उसने जमीन के लिए अपनी चाची को भी मौत के घाट उतार दिया था .पुलिस जब भी कोशिश करती वो चकमा देकर भाग खड़ा होता था.मोकामा थाना ने उसकी गिरफ्तारी की है और  रीय पुलिस अधीक्षक मनु महाराज ने गिरफ्तारी की पुष्टि कर दी है.आज सुबह ही बारह्पुर गावं के पूर्व मुखिया के घर के बाहर वो पकड़ा गया ,सादे लिबास में मोकामा इंस्पेक्टर कैसर आलम और मोकामा पुलिस वंहा छुपी हुई थी थोरी हाथापाई भी हुई पर चाक चौबंद पुलिस ने उसे दबोच कर ही दम लिया. इसका पकड़ा जाना निश्चय ही इलाके में नयी  खुशिया भर देगा.लोग नए साल और क्रिसमस को नए उमंग के साथ मना पाएंगे.

पिछले कुछ दिनों में इसने इतना आतंक मचा रखा था की ये पटना पुलिस का सबसे कुख्यात अपराधी बन गया था. खुद मनु महाराज भी इसे जल्द से जल्द पकड़ना चाहते थे.पुलिस इसके और साथी के बारे में पूछ ताछ कर रही है .

 

कन्हाईपुर निवासी कुख्यात अपराधी श्याम सुंदर यादव ने मोकामा पुलिस की नाक में दम कर रखा था. श्याम सुंदर यादव ने कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया था. कुछ दिनों पहले अपनी विधवा चाची की गोली मारकर हत्या कर दी थी. उसके बाद गिरफ्तारी के लिए गई पुलिस टीम पर उसने ताबड़तोड़ फायरिंग भी की थी. रोजाना वह घोड़े पर सवार होकर हथियार से लैस होकर घूमता था. काफी छापामारी के बावजूद भी उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही थी लेकिन आज सुबह उसको गिरफ्तार करने में पुलिस को सफलता मिल गई.

गिरफ्तार श्याम सुंदर यादव पर 20 से अधिक मामले दर्ज हैं. उसके खिलाफ 6 मामले पुलिस पर फायरिंग के भी हैं. इसके अलावा हत्या, लूट, रंगदारी और अपहरण भी आरोप पर हैं. 2012 में तत्कालीन थानाध्यक्ष सोनालाल सिंह ने उसे गिरफ्तार किया था. तीन साल जेल में रहने के बाद वह जमानत पर छूटकर बाहर आया और उसके बाद फिर उसने अपराधिक घटनाओं को अंजाम देना शुरु कर दिया था. हाल के दिनों में श्यामसुंदर यादव का आतंक काफी बढ़ गया था.