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December 2012

किस्मत वालों को मिलती है शहादत : वाइस एडमिरल!

मां ने कहा, बेटा देश के काम आया रणवीर की शहादत से प्रेरणा लें : नीरज प्रतिमा का अनवरण मोकामा (एसएनएबी)। मातृभूमि की सेवा करने का मौका तो कई सपूतों को मिलता है पर कर्त्तव्य के दौरान वीरगति को प्राप्त बहुत कम लोग होते हैं क्योंकि मातृभूमि…

मां के भावुक अल्फाज और छलक गये आंसू!

मोकामा (एसएनएबी)। शहीद रणवीर रंजन के प्रतिमा अनावरण समारोह को संबोधित करने आयीं रणवीर की मां के शब्दों से पूरा माहौल भावुक हो गया। शहीद की मां किरण राज के संबोधन के दौरान कई लोगों के आंसू छलक गए। किरण ने कहा कि सोनू मेरा बेटा था और रणवीर…

शहादत को मिला सम्मान, प्रतिमा का अनावरण आज!

भारतीय नौसेना के शहीद लेफ्टीनेंट कमांडर रणवीर रंजन की याद में शहीद द्वार का निर्माण मोकामा (एसएनबी)। भारतीय नौसेना के वीर सपूत लेफ्टीनेंट कमांडर रणवीर रंजन की शहादत का सम्मान करते हुए भारतीय नौसेना द्वारा उनके पैतृक गांव में शहीद द्वार का…

स्कूल बाबू राम लखन सिंह ‘क़ानूनी’!

न कभी कानून की पढाई की न ही कभी वकालत की और न ही कभी न्यायलय गए.मगर उस जमाने में जब जयादातर झगडे ,मामले पंचो के द्वारा ही सुलझाए जाते थे,आपका बड़ा ही नाम था, आपकी निष्पक्षता, न्यायप्रियता और साथ में आपकी कठोरता के कारन ही लोग आपको अपना पंच…

स्कूल बाबू राम लखन सिंह ‘क़ानूनी

न कभी कानून की पढाई की न ही कभी वकालत की और न ही कभी न्यायलय गए.मगर उस जमाने में जब जयादातर झगडे ,मामले पंचो के द्वारा ही सुलझाए जाते थे,आपका बड़ा ही नाम था, आपकी निष्पक्षता, न्यायप्रियता और साथ में आपकी कठोरता के कारन ही लोग आपको अपना पंच…

अमर शहीद प्रफुल्ल चंद चाकी

२ मई १९०८ की सुबह  रेलवे के उस पुलिया पर दोनों और से दना दन गोलियाँ चल रही थी.जो लोग उस समय वंहा रेलवे स्टेशन पर अपने गाड़ियो का इन्तजार कर रहे थे  उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था लोग जन्हा जगह मिली वही छुप गए.लगभग २:३० घंटा गोलियों की गूंज से…

अमर शहीद प्रफुल्ल चंद चाकी !

२ मई १९०८ की सुबह  रेलवे के उस पुलिया पर दोनों और से दना दन गोलियाँ चल रही थी.जो लोग उस समय वंहा रेलवे स्टेशन पर अपने गाड़ियो का इन्तजार कर रहे थे  उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था लोग जन्हा जगह मिली वही छुप गए.लगभग २:३० घंटा गोलियों की गूंज…

मगही कवि भाई बालेश्वर!

मगही कवि भाई बालेश्वर सामंतवादी माहौल ने एक रिक्शा चालक को कवि बना दिया.जिला स्तर पर ही सही ,लेकिन उनकी एक पहचान है .बाढ़ कोर्ट में एडवोकेट लिपिक (ताईद) के रूप में कार्यरत भाई बालेश्वर की पहचान एक मगही कवि के रूप में ज्यादा है. विद्रोही तेवर…

मगही कवि भाई बालेश्वर

सामंतवादी माहौल ने एक रिक्शा चालक को कवि बना दिया.जिला स्तर पर ही सही ,लेकिन उनकी एक पहचान है .बाढ़ कोर्ट में एडवोकेट लिपिक (ताईद) के रूप में कार्यरत भाई बालेश्वर की पहचान एक मगही कवि के रूप में ज्यादा है.विद्रोही तेवर वाले भाई बालेश्वर का…