मिट रही पहचान, नहीं मिलते कद्रदान!

मिट रही पहचान, नहीं मिलते कद्रदान!

भारतीय मूर्ति कला पूरे विश्व में अद्वितीय मानी जाती थी है, और रहेगी भी। आज भी इसकी उतनी ही मांग है जितनी पहले थी। पर भारतीय कला को जीवंत रखने वाले कलाकारों को भर पेट दो वक्त की रोटी भी