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कैसे मनाऊँ मधुमास ,मधुकर ।
चला गया कोई अपना छोड़कर ॥
जलने का वह ( दीपक ) वादा किया था ,
तोड़ दिया वादा बुझकर ।।
साथ रहने का वह ( संजीव ) वचन दिया था ,
चला गया साथ छोड़कर ॥
कैसे मनाऊँ मधुमास,मधुकर
चला गया कोई अपना छोड़कर ।


गमों की बारात लेकर आया ।
यह गम सहा नहीं जाता है
कैसे दिल पर रख लूँ पत्थर ।
कैसे मनाऊँ मधुमास ,मधुकर
चला गया कोई अपना छोड़कर ।

ठंड लग रही थी तो चादर माँग लेते ,
क्या जरुरत थी कफन ओढ़ने की ।
तुम्हारे साथ खुश्बू भी चली गयी ,
क्या जरुरत थी चमन छोड़ने की ।
मुझसे कुछ गलती हुई थी
तो मुझे कहते ,
मैं ही चला जाता यह शहर छोड़कर ।
कैसे मनाऊँ मधुमास,मधुकर ,
चला गया कोई अपना छोड़कर ।

मन है उदास ,बदहबास
साथ छोड़ गया भोर का उजास ।
ले आओ उसे लौटाकर
या ले चलो मुझे उसके पास ।
मैं उसके बिना नहीं रह पाऊँगा
चला गया जो मुझे छोड़कर ।
कैसे मनाऊँ मधुमास,मधुकर ,
चला गया कोई अपना छोड़कर ।

Ashutosh Arya
नववर्ष मंगल नहीं , अमंगल की शौगात लेकर आया ।