सम्या-गढ़ – एक परिचय

सम्या-गढ़ मोकामा एक परिचय ,सम्या-गढ़ बिहार राज्य अंतर्गत पटना जिले की घोसवरी प्रखंड का एक आदर्श ग्राम है

कहा जाता की मोकामा से सटे शिवनार ग्राम से कुछ लोगों ने खेती के उद्देश्य से इस टाल क्षेत्र में बस गए जो कालांतर में सम्या-गढ़ मोकामा के नाम से जाना जाने लगा | सम्या-गढ़ ग्राम मोकामा से 5 किलोमीटर दक्षिण,एन एच -82 , मोकामा -सरमेरा पथ से होते हुए पैजना घाट तक पुनः पश्चिम दिशा में प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना द्धारा अर्धनिर्मित सड़क होते हुए पैजना, मालपुर ,केवटी ग्राम के बाद सम्या -गढ़ अवस्थित है |सम्या -गढ़ पंचायत में मुख्य रूप से केवटी, मिल्की ,लक्षमिपुर,शोभाठिका एवं सम्या -गढ़ ग्रामों को शामिल किया गया है | मोकामा से सम्या -गढ़ की दूरी लगभग 12 किलोमीटर है |यहाँ दो प्राथमिक ,एक मध्य एवं एक उच्च विद्यालय है | यहाँ एक पोस्ट ऑफिस के आलावे एक सरकारी हॉस्पिटल भी है |बर्ष १९८० के दशक में यहाँ पंजाब नॅशनल बैंक की एक शाखा भी खोली गई | सम्या-गढ़ मोकामा को आधुनिक स्वरूप प्रदान करने में श्री चंद्रमौली बाबु उर्फ़ श्री सरयुग नन्दन प्रसाद सिंह एकाकी योगदान माना जाता है | सरस्वती उपासक श्री चंद्रमौली बाबु को एक बार मोकामा विधान सभा का प्रतिनिधित्व करने का भी गौरव प्राप्त है |एतिहासिक रामनंदन उच्च विद्यालय   सम्या-गढ़ मोकामा  की स्थापना बाबु स्वर्गीय  श्री रामनंदन  प्रसाद सिंह के स्मृति में नन्दन परिवार के द्धारा  किया गया पुरे इलाके में इस  विद्यालय का शिक्षा के क्षेत्र में अद्धितीय योगदान है |सम्या -गढ़ ग्राम मोकामा से 5 किलोमीटर दक्षिण,एन एच -82 मोकामा -सरमेरा पथ से होते हुए पैजना घाट से पुनः पश्चिम दिशा में प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना द्धारा अर्धनिर्मित सड़क होते हुए पैजना, मालपुर ,केवटी ग्राम के बाद सम्या -गढ़ अवस्थित है |सम्या -गढ़ पंचायत में मुख्य रूप से केवटी, मिल्की ,लक्षमिपुर,शोभाठिका एवं सम्या -गढ़ ग्रामों को सामिल किया गया है

सम्या-गढ़ मोकामा
सम्या-गढ़ मोकामा

ग्राम मोर – चन्द्रगुप्त मौर्य का जन्मस्थान

मोर मोकामा प्रखंड का मुख्य कृषि प्रधान पंचायत है.

पटना से लगभग ८५ किलोमीटर पूर्व में ईस्ट इन्डियन रेलवे पर एक स्टेशन है मोर मोकामा. यह मोकामा प्रखंड के अंतर्गत एक गांव है जो ऐतिहासिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है. गंगा नदी के तट पर अवस्थित यह ग्राम भारतीय इतिहास की अनेक सच्चाइयों को अपने अंक में समेटे है. यहाँ प्राचीन टील्हे बहुत बड़ी संख्या में पाए जाते हैं. बौद्ध और ब्राह्मण धर्म – चिन्ह यहाँ बड़ी संख्या में मिले हैं. पीपल के वृक्षों की संख्यां भी यहाँ सर्वाधिक है.

मोर मोकामा – चन्द्रगुप्त मौर्य
मोर मोकामा – चन्द्रगुप्त मौर्य

संभवतः यही मोरिय क्षत्रियों का नगर था जो वर्तमान में “मोर” के नाम से प्रसिद्द है.
भारतीय इतिहास में चन्द्रगुप्त मौर्य के नाम बड़ी उपलब्धि है. वह भारत का प्रथम महान ऐतिहासिक सम्राट था जिसके नेतृत्व में चक्रवर्ती आदर्श को वास्तविक स्वरूप प्रदान किया गया. उसने भारत वर्ष में यवनों के विदेशी शासन को तहस नहस कर दिया एवं तत्कालीन मगध साम्राज्य को नन्द के अत्याचार से मुक्त कराया. मेरा मानना है कि चन्द्रगुप्त मौर्य की जन्म भूमि वर्तमान के मोर ग्राम  ही है. इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि चन्द्रगुप्त मौर्य मुरा पुत्र होने के कारन मौर्य कहलाया.
ये “मोरिय” कपिलवस्तु के शाक्यों की ही एक शाखा थे . जिस समय कोशल नरेश विडूडभ ने कपिल वस्तु पर आक्रमण किया, शाक्य परिवार के कुछ लोग कोशल नरेश के अत्याचारों से बचने के लिए गंगा के मैदानी भागों की और रुख किया और एक सुरखित स्थान पर बस गए. यह स्थान मोरों के लिए प्रसिद्द था अतः यहाँ के निवासी मोरिय कहे गए.बौद्ध-ग्रन्थ “महाबंसो“ के अनुसार मोरिय खत्तियों (मौर्य क्षत्रियों) का एक गण पिप्पलिवन प्रदेश में अवस्थित था और चन्द्रगुप्त इस गण के राजा का पुत्र था.

संभावना यही लगती है की मगध साम्राज्य का शासक नन्द ने पिप्पलिवन के मोरिय नगर (वर्तमान में मोर गांव) को ध्वस्त किया हो और मुरा (चन्द्रगुप्त मौर्य की माँ) अपने पति के मारे जाने अथवा बंदी बन जाने पर अपने नवजात पुत्र को लेकर कहीं छुप गई हो .

मोरियानाम खात्तियानाम वंसे जातं सिरीधरं

चंद्रगुप्तोती पयाचातनं चणक्को ब्राह्मणों ततो .

नवम धननन्ददन्तं घतेत्वा चंडकोघसा

सकले जम्बुद्वीपअन्हि रज्ज सम्भिसिंचिसो ..

महापरिनिब्बान सुत्त में मौयों को पिप्पलिवन का शासक तथा क्षत्रिय वंश का कहा गया है. उल्लेख है की बुद्ध के निर्वाण पर पिप्पलिवन के मोरियों ने कुशीनारा के मल्लों के पास अपने राजदूत को भेजकर भगवान के अस्थियों के एक अंश की मांग की थी. इसमें कोई शक नहीं की उस वक्त के मोर वासी बौद्ध धर्म के प्रति भी अपार श्रद्धा रखते थे.

जैन साहित्य के अध्ययन से यह ज्ञात होता है कि भगवान् महावीर के ग्यारह गन्धर्वों में से एक था मोरिय – सन्निवेश का कश्यप गोत्रीय मोरिय पुत्र. आज भी वर्तमान मोर के निवासियों का गोत्र “कश्यप” ही है.

हेम चन्द्र के परिशिष्टपर्वन एवं आवश्यक सूत्र की हरिभाद्रिया टीका के अनुसार चन्द्रगुप्त को मयूर पोशकों के ग्राम के मुखिया के कुल में उत्पन्न कहा गया है .

फलतः विभिन्न ग्रंथों के अध्ययन से यह सिद्ध होता है कि वर्तमान मोर ग्राम ही चन्द्रगुप्त मौर्य का जन्म स्थल है.

आगे इसपर और भी चर्चा होगी . आपके विचार आमंत्रित हैं …

संदर्भ – ग्रन्थ

१.      प्राचीन भारत का इतिहास एवं संस्कृति – के. सी. श्रीवास्तव

२.      विष्णुगुप्त चाणक्य – वीरेंदर कुमार गुप्त , राज कमल प्रकाशन

३.      मुद्रा राक्षस – विशाख दत्त

४.      महावंश , गेगर का अनुवाद , पृष्ठ २७

पीटकर किया अधमरा

घोसवरी  मछुआरे को पीटकर किया अधमरा, थाने पर पथराव

घोसवरी थाने के पैजुना में दबंगों ने मछुआरे शंकर साहनी को पीटकर अधमरा कर दिया. घटना के विरोध में शनिवार को मछुआरों ने जुट कर थाने पर पथराव किया. वहीं, तकरीबन चार घंटे तक थाने के सामने एनएच 82 पर डटे रहे. मछुआरों को उग्र देखकर वाहन सवारों के बीच अफरा-तफरी मच गयी. बताया जा रहा है कि बाढ़ के पानी में मछली मारने के दौरान भूल्ली यादव व उसके समर्थकों ने शंकर को बेरहमी से पीटा.

घोसवरी के  मछुआरे शंकर साहनी को पीटकर अधमरा कर दिया
घोसवरी के मछुआरे शंकर साहनी को पीटकर अधमरा कर दिया
इसका विरोध करने पर उसके परिवार की महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया. पीड़ित परिवार ने घटना की शिकायत थाने में जाकर की. पीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद शंकर को पटना रेफर कर दिया गया. घटना की जानकारी मिलते ही  निषाद समाज की सैकड़ों महिलाएं व युवकों ने थाने को घेर लिया.
उन्होंने झंडा लहराकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के समझाने के बाद भी विरोध- प्रदर्शन कर रहे लाेग उग्र होकर पत्थरबाजी करने लगे. पुलिसकर्मियों ने छिप कर अपनी जान बचायी. बाद में हथिदह, मोकामा व आसपास केथानों की पुलिस ने मिल कर मामले को शांत  कराने का प्रयास शुरू किया, लेकिन उग्र लोग आरोपित की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गये.
मछुआरों का नेतृत्व कर रहे शारदा देवी, अजय कुमार बिंद आदि ने आरोप लगाया कि पुलिस ने दबंगों के खिलाफ कार्रवाई में कोताही बरती. इधर, दबंगों की भय से मछुआरे अपने घरों में दुबके हैं. इससे उनकी जीविका पर आफत आ गयी है. मछुआरों के हंगामे से एनएच पर घंटों वाहनों की कतार लगी रही. बाद में स्थानीय प्रशासन ने किसी तरह समझा- बुझा कर मामले को शांत कराया. पुलिस ने आरोपितों की शीघ्र गिरफ्तारी का भरोसा दिलाया. तब जाकर आक्रोशित लोग वापस लौटे.

बदमाशों की जा रही पहचान

इस संबंध में थानेदार विभूति भूषण कुमार ने बताया कि भीड़ को गुमराह कर थाने का घेराव कराया गया. वहीं, भीड़ में घुसे असामाजिक तत्वों ने थाने पर पत्थर फेंके. पत्थरबाजी व हंगामे मामले में एफआईआर दर्ज की गयी है. वहीं असमाजिक तत्वों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जायेगा.(सौजन्य:-प्रभात खबर)

गंगा आदोलन में शामिल हुए आनंद मुरारी

 

गंगा आदोलन में आनन्द मुरारी ने राखी गंगा बचाने की बात .

गंगा आदोलन में आनन्द मुरारी ने राखी गंगा बचाने की बात.जीवनदायनी गंगा आज शासन-प्रशासन और लोगों की उपेक्षा से मरणासन्न स्थिति में पहुंच गई है। आनन्द मुरारी,प्रणव शेखर शाही शामिल हुए गंगा अभियान के सम्मेलन में.ऐसे में गंगा प्रेमियों ने इसे फिर से निर्मल और नदी में न्यूनतम पानी की उपलब्धता की मांग को लेकर देशभर में गंगा आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है। यह आंदोलन इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि प्रो. जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानद हरिद्वार में पिछले 87 दिनों से गंगा को लेकर अनशन पर बैठे हैं। ऐसे में यहां गांधी शांति प्रतिष्ठान में रविवार से आयोजित तीन दिवसीय गंगा सम्मेलन में जुटे गंगा प्रेमियों ने उनकी तपस्या को शांतिपूर्ण जन आंदोलन में बदलने का फैसला लिया है।

सम्मेलन में गंगा के साथ तमाम नदियों की दशा पर भी चिंता जताई गई। इसमें 11 राज्यों से 100 से अधिक गंगा प्रेमी हिस्सा ले रहे हैं। समापन वाले दिन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी भी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

नदियों में उतरा सिल्ट नीचे बिहार तक गंगा में जमा हो रहा है आनन्द मुरारी
नदियों में उतरा सिल्ट नीचे बिहार तक गंगा में जमा हो रहा है

[caption id="attachment_18353" align="alignleft" width="300"]नदियों में उतरा सिल्ट नीचे बिहार तक गंगा में जमा हो रहा है आनन्द मुरारी नदियों में उतरा सिल्ट नीचे बिहार तक गंगा में जमा हो रहा है आनन्द मुरारी

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पहले दिन दो सत्रों में एक स्वर में गंगा प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व पर्यावरण प्रेमियों ने सानद स्वामी की सेहत पर चिंता जताते हुए उनके 10 अक्टूबर से जल भी त्याग देने की चेतावनी को केंद्र सरकार से गंभीरता से लेने को कहा।

जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि आज विकास के नाम पर नदियों का गला घोटने का काम जारी है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि जिस प्रकार मनुष्य को जीवन जीने का अधिकार मिला हुआ है। उसी तरह से नदियों को भी यह अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि नदियों के अधिकार को लेकर हाईकोर्ट ने एक आदेश भी दिया था, जिसपर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से रोक लगवा दी है।

गंगा आंदोलन

के केंद्र उत्तराखंड के कनखल में स्थित मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने जीडी अग्रवाल से केंद्र की बातचीत के संबंध में बताया कि वह गंगा पर निर्माणाधीन व प्रस्तावित परियोजनाओं को खत्म करने, गंगा से खनन बंद करने और इसमें गिरते सीवर और घाटों के निर्माण में गंगा के लिए आवंटित धन का इस्तेमाल न करने जैसी कई मांगें हैं। उन्होंने गंगा को लेकर बनी समिति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री अपना-अपना स्वार्थ देख रहे हैं। एकता परिषद के संस्थापक पीवी राजगोपाल ने कहा पूरी दुनिया में विकास के नाम पर पानी का दोहन और शोषण किया जा रहा है, दुनिया पानी के बिना उजड़ रही है नदियों का अस्तित्व संकट में है। गाधी शाति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रंशात ने कहा कि गंगा सबको संभालती है, लेकिन गंगा की तरफ किसी की भी नजर नहीं है। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता व वैज्ञानिक धुन्नू राय ने कहा कि पैसा कमाने की ही होड़ है, जिसमें बिजली उत्पादन, पर्यटन और सिंचाई के नाम पर गंगा का दोहन हो रहा है। कानपुर के सीबी शर्मा ने बताया कि कानपुर से टेनरियों को उन्नाव स्थानांतरित किया गया है, लेकिन वहां से भी टेनरियों का गंदा जल गंगा में मिल रहा है।

मोकामा बिहार के आनन्द मुरारी ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में विकास के नाम पर कटाव से नदियों में उतरा सिल्ट नीचे बिहार तक गंगा में जमा हो रहा है।

जल जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने कहा कि गंगा एक नदी नहीं एक संस्कृति है इसके संरक्षण के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए।(सौजन्य:-दैनिक जागरण)

ज्ञान प्रभा शिक्षण संस्थान में हिन्दी दिवस मनाया गया

आज 14 सितंबर को ज्ञान प्रभा शिक्षण संस्थान में हिन्दी दिवस मनाया गया।

इस अवसर पर एक दिन पूर्व हिन्दी प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें सफल विद्यार्थियों को इस दिवस पर पुरस्कृत किया गया।इस मौके पर विद्यार्थियों ने काव्य पाठ किया । शिक्षण संस्थान के निदेशक पारस कुमार ने हिन्दी के महत्व और व्यापक उपयोग पर चर्चा की। प्राचार्य विद्यासागर ने हिन्दी के सुसज्जित लेखन कला पर प्रकाश डाला और कहा कि सुंदर लिखावट और बोलचाल हिन्दी के प्रति प्रेम को दर्शाता है।इस मौके पर कविता कुमारी, बबली कुमारी,सिमरन कुमारी,काजल गुप्ता,राजीव कुमार, आशीष कुमार, शाक्षी कुमारी,अंकित कुमार,देवेश कुमार इत्यादि बच्चों को पुरस्कृत किया गया। मंच का संचालन संतोष कुमार ने किया।
हर साल हिन्दी दिवस 14 सिंतबर को मनाया जाता है. 1918 में महात्मा गांधी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था. 1949 में जाकर संविधान सभा ने निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी. जिसके बाद हर जगह हिन्दी भाषा को फैलाने के बाद 1953 से 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है. हिन्दी दिवस का उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए वातावरण निर्मित करना, हिन्दी के प्रति अनुराग पैदा करना, हिन्दी की दशा के लिए जागरूकता पैदा करना तथा हिन्दी को विश्व भाषा के रूप में प्रस्तुत करना है.युवाओं के बीच अंग्रेजी भाषा के प्रति बढ़ते लगाव और हिंदी भाषा की अनदेखी करने की वजह से हिंदी प्रेमी बेहद निराश हैं. यही वजह है कि हर साल देशभर के लोगों को अपनी राष्ट्रभाषा के प्रति जागरूक करने के लिए हिंदी दिवस मनाया जाता है.हमारी एकता और अखंडता ही हमारे देश की पहचान है हिंदुस्तान हैं हम और हिंदी हमारी जुबान है.जब भी होता ये दिल भावुक और ये जुबान लड़खड़ती है ऐसे समय में बस अपनी मातृ भाषा ही काम आती है. भारत के हर घर को आपस में जो साथ मिलाए संपर्क सूत्र का काम करे जो वो भाषा हिंदी कहलाए.
ज्ञान प्रभा शिक्षण संस्थान में हिन्दी दिवस मनाया गया

मोकामा के बेटे कुमार शानू ने जीता अमेरिका में छात्र चुनाव

मोकामा के बेटे कुमार शानू ने जीता अमेरिका में फ़्लेचर स्कूल ओफ लॉ एंड डिप्लोमसी के छात्र चुनाव.

पटना जिला मोकामा के सकरवार टोला निवासी, उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता तथा वर्तमान में विश्व के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षनिक संस्थानो में शुमार फ़्लेचर स्कूल ओफ लॉ एंड डिप्लोमसी के छात्र कुमार शानू ने अमेरिका स्थित अपने कॉलेज में छात्र चुनाव जीत लिया है. मतदान करने वाले छात्र पच्चास विभिन्न देशों के नागरिक हैं. शानू ने बताया कि यह चुनाव में उन्हें एक रुपया भी ख़र्च करने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ीं लेकिन अलग अलग संस्कृति, सभ्यता और कार्यक्षेत्र से आने वाले बुद्धिजीवी छात्रों का समर्थन हासिल करना आसान नहीं था. दरअसल अमेरिका के फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी में 50 विभिन्न देशों के छात्र नामांकित हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ में कार्यरत और विभिन्न देशों के दूतावास और विदेश सेवा में कार्यरत अधिकारी भी वहां मास्टर की डिग्री लेने जाते हैं. कुमार शानू भी वहां मास्टर इन लॉ के छात्र हैं. शानू ने बताया कि कुल 6 उम्मीदवार चुने गए हैं. 12 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे तथा छह को जीत मिली है. इस चुनाव में 50 देशों के छात्र वोट करते हैं. अमेरिकी सेना के भी कई वरिष्ठ अधिकारी वहां से कानून की पढ़ाई कर रहे हैं. कई विभिन्न देशों के नौकरशाह भी वहां पढ़ाई करते हैं. कुमार शानू ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय विदेश नीति और कूटनीति का यह एक उत्कृष्ट संस्थान है तथा कई पूर्व प्रधानमंत्री, राष्ट्राध्यक्ष, नोबेल पुरस्कार विजेता तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त करने वाले कई लोग वहां के छात्र रहे हैं. काउंसिल मेंबर्स के 6 पदों पर चुनाव हुआ था तथा कुमार शानू भी चुनाव में काउंसिल मेंबर चुने गए हैं.
कुमार शानू मोकामा
मोकामा के बेटे ने जीता अमेरिका में छात्र संघ चुनाव

चुनाव जीतने के पश्चात अब शानू की कॉलेज के हर महत्वपूर्ण मामले में सहभागिता होगी. ज्ञात हो फ़्लेचर स्कूल ने विश्व को कई राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संयुक्त राष्ट्र अधिकारी, नोबल पुरस्कार विजेता और सभी क्षेत्रों में नायक दिए हैं. शानू की यह अप्रत्याशित जीत भारत के लिए गर्व की बात है.येसे ही एक चुनाव में केरल के वर्तमान सांसद शशि थरूर असफल हो गये थे.शानू के फ़्लेचर जाने के पहले शशि थरूर ने उनसे मुलाकात की थी और वंहा के बारे में बताया भी था .आज निश्चय ही शशि थरूर को भी भारत के इस बेटे पर गर्व हो रहा होगा.
शानू बिहार के पटना जिला के मोकामा से एक साधारण से परिवार से आते है.छोटे से गावं मोकामा से निकलकर शानू फ़्लेचर तक पहुचे और आज उन्होंने वंहा का छात्र चुनाव जीता है.कुमार शानू अपने दादाजी से बेहद प्रभावित हैं। उनकी जिंदगी पर दादाजी का बहुत गहरा असर रहा है. अपने दादाजी के बारे में बातें करते हुए शानू गर्व से भर उठते हैं. वह कहते हैं मेरे दादाजी सरकारी शिक्षक थे लेकिन वह सैलरी नहीं लेते थे. हम संपन्न किसान परिवार से आते थे इसीलिए किसी तरह की आर्थिक परेशानी नहीं थी. दादाजी का मानना था कि सक्षम लोगों को बढ़-चढ़ कर समाज की सेवा करनी चाहिए. उन्होंने हमें जो जीवन मूूल्य दिए वो जीवन के अबतक के हर पड़ाव पर मेरे काम आया। मुझे मेरे पिताजी से भी सीखने को काफी कुछ मिला.

अभिषेक को चलती ट्रेन से फेंक दिया

मोकामा में एक युवक अभिषेक को कुछ बदमाशों ने चलती ट्रेन से फेंक दिया.मोकामा का बदनाम करने में बाहरी तत्वों का हाथ मोकामा के लोगो से जयादा है.

आजकल एक नया फेशन चल निकला है कंही का भी आदमी गुंडा गर्दी करता है और मोकामा के नामा का धौंस जमता है.हर कोई अपने आपको फलाना सिंह का भाई गोतिया बना कर लड़ाई करता है और मोकामा को बदनाम करता है.पिछले कई सालों से जब कोई अपराधी पकराता है तो मोकामा घर बता कर लोगो को गुमराह करता है पर जब हकीकत सामने आती है तो वो कंही से भी मोकामा का नही होता.दूर दूर से लोग आस पास आकर अपराधिक घटनाओ को अंजाम दे रहे हैं.ताज़ा घटना भी कुछ यही व्यान करता लग रहा है.

मोकामा ऑनलाइन ट्रेन
चलती ट्रेन से युवक को निचे फेंका

मोकामा के हथिदह में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आ रही है .सीट के विवाद में युवक अभिषेक कुमार (30) को ट्रेन से फेंक दिया गया. इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. मोकामा और हथिदह लिंक स्टेशन के बीच बुधवार की सुबह में यह घटना घटी. बताया जा रहा है कि घायल युवक मनेर के पतीला गांव निवासी शीतल यादव का पुत्र है. वह सहरसा जाने के लिए राजेंद्र नगर टर्मिनल-सहरसा इंटरसिटी में सवार हुआ था. बख्तियारपुर स्टेशन पर पांच युवक ट्रेन में सवार हुए. सीट पर बैठने को लेकर यात्रियों के बीच विवाद शुरू हो गया.
इस बीच अभिषेक का पांचों युवकों से विवाद गहरा गया. दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गयी. इसके बाद युवकों ने अभिषेक को ट्रेन से बाहर फेंक दिया. बदमाशों की इस करतूत से ट्रेन में सवार अन्य यात्री सहम गये. घटना के बाद राजेंद्र सेतु के पास ट्रेन की रफ्तार धीमी होने पर घटना के जिम्मेदार युवक फरार हो गये. बाद में यात्रियों ने घटना की सूचना कंट्रोल को दी. सूचना मिलते ही हथिदह जीआरपी ने अविलंब घायल युवक को स्थानीय अस्पताल पहुंचाया.
यहां से गंभीर अवस्था में युवक को पटना रेफर कर दिया गया. इस संबंध में हथिदह जीआरपी थानेदार ने बताया कि घायल युवक स्पष्ट रूप से बोलने की स्थिति में नहीं है. उसकी जेब में मिले मोबाइल नंबर से उसके परिजनों को सूचना दी गयी. परिजन उसका इलाज पटना के निजी अस्पताल में करवा रहे हैं. घायल युवक की हालत गंभीर बनी हुई है.(सौजन्य:-प्रभात खबर)

मोकामा के सबसे सुरक्षित स्थान से चोरी

मोकामा में सबसे सुरक्षित स्थान पर चोरी.मोकामा का सबसे सुरक्षित माना जाना वाला इलाका सी.आर.पी.ऍफ़ और उसमे भी बेंक.

अब उसके केमरे और डीवीआर चोरी होना मानो नीम उपर करेला चढ़ा होना.जी हाँ बेंक अधिकारीयों द्वारा मोकामा थाना को यही व्यान दिया गया है. शाखा प्रबंधक ने मोकामा थाने को घटना की जानकारी दी है.
भारतीय स्टेट बैंक की शाखा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के मोकामा घाट ग्रुप केंद्र परिसर में ही है. वर्षों से वहीं बैंक संचालित हो रहा है। मैनेजर ने पुलिस को दिए बयान में बताया है कि बैंक खोलने के बाद जब वे लोग अंदर गए तो 5 सीसीटीवी कैमरे व डीवीआर गायब पाए गए.माना जा रहा है चोर भी आसपास के ही होने नही तो इतनी आसानी से कोई वंहा जा ही नहीं सकता .चोरो को वंहा की पूरी जानाकरी होगी.

मोकामा ऑनलाइन
मोकामा सीआरपीएफ कैंप की एसबीआई की शाखा से कैमरे व डीवीआर चोरी

आशंका जताई जा रही है कि चोरों ने नकद चुराने का भी प्रयास किया लेकिन उनको सफलता नहीं मिल सकी. सीआरपीएफ डीआईजी का आवास बैंक शाखा के पास में ही है. बैंक के आसपास बाउंड्री है और वहां घने पेड़ भी लगे हैं. मोकामा थाना ने मामला दर्ज कर लिया है. हालांकि अति सुरक्षा घेरे वाले परिसर में भी चोरी की इस हरकत के सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.अंदर के किसी कर्मचारी का भी हाँथ हो सकता है. क्योंकि इतनी सुरक्षित जगह पर बाहरी किसी आदमी का पहुच पाना भी मुश्किल है. चोर तो नकदी चुराने ही आया होगा पर उसे सफलता नहीं मिली होगी.तो उसने केमरे और डीवीआर पर हाथ साफ कर दिया.
हाथीदह थाना ने घटना को संदिग्ध बताया है. पुलिस सूत्रों की मानें तो अति सुरक्षा घेरे वाले बैंक परिसर में इस तरह चोरी की घटना को अंजाम देना आसान नहीं है. पुलिस ने मामले की प्राथमिकी दर्ज कर ली है लेकिन माना जा रहा है कि इसमें कोई साजिश भी हो सकती है. (सौजन्य:-दैनिक भास्कर) फेसबुक पेज मोकामा ऑनलाइन

मोकामा कन्हायपुर में अमरजीत कुमार की मौत से गमनिन हुआ माहौल

मोकामा के कन्हायपुर में अमरजीत कुमार के पोखर में डूब कर मौत हो गई. पटना किउल रेलवे ट्रेक के किनारे बहुत सारे पोखर हैं ,जिसे ज्यादातर मवेशी को नहाने के लिए इस्तेमाल होता है.

मगर यंही एक पोखर में अमरजीत कुमार के फिसल कर गिरने फिर डूबकर मृत्यु से पूरा गावं गमनिन है.यंहा के पोखर में ज्यादा पानी नही होता है.पर अभी बरसात के कारन बहुत ज्यादा पानी होने से वो बाहर नही निकल पाया और और डूबकर उसकी मृत्यु हो गई .मृतक वृज नन्दन पासवान का पुत्र था.मृतक की उम्र मात्र 19 साल थी.थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर राजेश रंजन ने हादसे की पुष्टि की है.

मोकामा ऑनलाइन
मोकामा में मौत पर माहौल गमनिन ,

पटना जिला कन्हायपुर का ये इलाका जायदातर खेती के लिए ही जाना जाता है.तरह तरह की सब्जी की खेती , टाल में मसूर और चना की खेती से ही यंहा के किसान अपना जीवन यापन करते है.गंगा नदी के किनारे बसा ये गावं खेती और मवेशी के लिए छोटे छोटे पोखर पर ही निर्भर है.और ये हादसा हो गया है तो सारे किसान दुखी है.मोकामा जैसे प्रखंड में एक प्राथमिक उपचार की भी व्यवस्था नहीं है.येसे सेकड़ों हादसे अक्सर होते रहते हैं,मगर जनप्रतिनिधि और प्रशासन को इसकी तनिक भी चिंता नहीं है.मोकामा जो आज से महज 10 साल पहले तक बिहार के सबसे अच्छे स्वास्थ सुविधाओं से परिपूर्ण वाला जगह था.मोकामा का नाजरथ अस्पताल ३०० से करीब बेड और २० से जायदा टॉप क्लास के डॉक्टर से लेस था. बड़ी से बड़ी आपदा पर लोग मोकामा आते थे और सस्वस्थ होकर अपने घर वापस जाते थे.उतम प्रसूति के लिए ये पुरे बिहार का सबसे सुरक्षित अस्पताल में से एक था मोकामा का नाजरथ अस्पताल .आज मोकामा का ये गौरव बोझ और भार भर है.इसी तरह मोकामा का रेफरल अस्पताल भी अनेकों उपकरणों और अच्छे डॉक्टर से भरा पड़ा था.गरीब गुरबो को दवाई भी मिल जाती थी .फिर नजर लग गई विकास पुरुस की और सारे उपकरण यंहा से दूर भेज दिए गये,डॉक्टर का ताबल्दा करवा दिया गया.आज मोकामा के इस अस्पताल को खुद ही इलाज की जरूरत है.मोकामा के किसी भी जनप्रतिनिधि का ध्यान मोकामा के स्वास्थ व्यवस्था पर शायद इसलिए नही जाता क्योंकि उनके घर में अभी तक किसी को इसकी जरूरत नहीं पड़ी. जब कभी थोरी जरूरत हो तो उनके लिए पटना और दिल्ली दूर नहीं.फिलहाल अमरजीत कुमार के मौत पर गम मनाइये और भारत बंद और चुनाव चुनाव खेलिए .

मोकामा के मोगेम्बो है रडार पर ,AK-47 के खरीदार पर नजर

मोकामा के मोगेम्बो है रडार पर , AK-47 के खरीदार पर नजर .सेंट्रल आर्डिनेंस डिपो जबलपुर से गायब किए गए AK-47 की खेप लोक मान्य तिलक एक्सप्रेस से भागलपुर उतारने वाले दो वेंडरों के एटीएस की जाल में फंस जाने की चर्चा है।कहा जा रहा है कि दोनों को एटीएस की टीम उठा कर अज्ञात स्थान पर पूछताछ कर रही है। दोनों के तार AK-47 आपूर्ति करने वाले गिरोह से हैं। सीओडी जबलपुर से गायब किए गए AK-47 की आपूर्ति करने वाले तस्कर इन्हीं दो वेंडरों के सहारे भागलपुर तक माल पहले भागलपुर लाते थे फिर यहां से सड़क मार्ग से मुंगेर ले जाया जाता था। भागलपुर से एंबुलेंस के जरिए तस्कर आसानी से हथियार अपने ठिकाने तक लेकर चले जाते थे। कहा जा रहा है कि दोनों वेंडर के जरिए 70 AK-47 मुंगेर मंगाई जा चुकी है। जहां से नक्सलियों को आपूर्ति की गई है। AK-47 की आपूर्ति को लेकर दोनों वेंडरों से की गई पूछताछ में जो चौंकाने वाली जानकारियां मिली है, उस आधार पर एटीएस और स्थानीय पुलिस उस नेटवर्क को खंगालने में लगी है जिसके जरिए नक्सलियों तक हथियार पहुंचे हैं। अत्याधुनिक हथियारों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में एटीएस सक्रिय हो गई है।

AK-47
सेंट्रल आर्डिनेंस डिपो जबलपुर से गायब किए गए एके-47 की खेप लोक मान्य तिलक एक्सप्रेस से भागलपुर उतारने वाले दो वेंडरों के एटीएस की जाल में फंस जाने की चर्चा है।

पूर्णिया, भागलपुर, नवगछिया, खगड़िया, सहरसा, मुंगेर, लखीसराय, मोकामा, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर, सिवान आदि जिलों के अलावा राजधानी के अंडरव‌र्ल्ड को आपरेट करने वाले सफेदपोशों पर एटीएस नजर रख रही है। बड़े पैमाने पर अत्याधुनिक AK-47 की खेप बिहार के कई जिलों में आपूर्ति कराए जाने का खुलासा होने पर एटीएस ऐसे सफेदपोश पर नजर रखने लगी है। पुलिस मुख्यालय इस बात को लेकर गंभीर है कि अब यदि आपराधिक गिरोहों के बीच का गैंगवार सामने आता है तो उसकी तस्वीर इन अत्याधुनिक हथियारों की मौजूदगी से काफी भयावह हो सकती है। कहा जा रहा है कि तस्करी कर लाए गए AK-47 की बरामदगी के लिए चलाया जाने वाला अभियान सौ प्रतिशत बरामदगी तक चलेगा।
विभागीय सूत्रों की माने तो अत्याधुनिक AK-47 की मौजूदगी सूबे के कई जिलों में पूर्व से हैं। जब पुरुलिया में ऐसे अत्याधुनिक हथियार वर्षो पूर्व हवाई मार्ग से गिराए गए थे। जिनमें मोतिहारी, बेतिया, गोपालगंज, चंपारण, सिवान, मोकामा, बड़हिया, किशनगंज, फारिबसगंज, जोगबनी आदि जिले शामिल हैं। इन इलाकों में कभी सतीश पांडेय, देवेंद्र दुबे, शहाबउद्दीन, बृज बिहारी, सूरज दा, छोटे सरकार, राजन तिवारी, नागा सिंह, नाटा सिंह, ललन सिंह, भुटकुन शुक्ला, छोटन शुक्ला, मुन्ना शुक्ला, दीपक सिंह, मुकेश-विकास, अमरेश सिंह, जाकिर, पप्पू, रणवीर, भरत, जैसे बाहुबलियों का दौर था। ऐसे घातक हथियारों की आपूर्ति हाल के महीनों में पूर्णिया, नवगछिया, खगड़िया, सहरसा, बेगूसराय, भागलपुर, कहलगांव, बांका में भी हुई है। जिससे अपराध बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कहा जा रहा है कि एटीएस इसका खुलासा स्थानीय पुलिस के सहयोग से शीघ्र कर सकती है।(सौजन्य:-दैनिक जागरण)